कोलंबो।
क्या श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे की हार में भारतीय
खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) का हाथ था? समाचार एजेंसी
रॉयटर्स ने राजनीतिक और खुफिया सूत्रों के हवाले से बताया है कि कुछ वक्त
पहले श्रीलंका द्वारा कड़ी आपत्ति दर्ज कराए जाने के बाद भारत को कोलंबो के
भारतीय खुफिया एजेंसी प्रमुख को वापस बुलाना पड़ा था। एजेंट पर कथित तौर
पर इसी महीने हुए राष्ट्रपति चुनाव में विपक्षी दल के उम्मीदवार मैत्रीपाल
सिरीसेना (वर्तमान राष्ट्रपति) की मदद का आरोप है। हालांकि, भारतीय विदेश
मंत्रालय के प्रवक्ता ने एजेंट की कथित संलिप्तता और उसे वापस बुलाने की
खबर को सिरे से खारिज किया है। प्रवक्ता ने कहा कि यह तबादला है, जो एक
रूटीन प्रक्रिया है।
कोलंबो और नई दिल्ली के सूत्रों के मुताबिक, श्रीलंका ने भारतीय एजेंट
पर राजपक्षे कैबिनेट को धोखा देने और विपक्षी उम्मीदवार सिरीसेना को मदद
पहुंचाने का आरोप लगाते हुए भारत को एजेंट को वापस बुलाने को कहा था। 28
दिसम्बर को ही श्रीलंका के 'संडे टाइम्स' ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि रॉ
के विपक्षी दल के साथ संबंध हैं। एक अन्य मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एक
श्रीलंकाई सांसद ने बताया कि रॉ प्रमुख ने पूर्व प्रधानमंत्री रानिल
विक्रमासिंघे को राजपक्षे को हराने के लिए कहा था।" सांसद के मुताबिक, रॉ
प्रमुख देश के पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा के संपर्क में भी था।
वहीं, विक्रमासिंघे के प्रवक्ता ने कहा, "मैं एजेंट से दो या तीन बार मिला।
लेकिन उसकी पहचान से बिल्कुल अनजान हूं।"
राजपक्षे ने किया टिप्पणी से इनकार
महिंदा राजपक्षे ने मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया है। उन्होंने सिर्फ इतना कहा है, "मैं तब तक किसी पर शक नहीं करूंगा, जब तक कोई ठोस सबूत न मिले।" इस बीच श्रीलंका के नए राष्ट्रपति सिरीसेना ने कहा है कि वह अपने पहले विदेशी दौरे में अगले महीने भारत जाएंगे। उन्होंने कहा कि उनकी विदेश नीति के एजेंडे में भारत सबसे ऊपर है।
महिंदा राजपक्षे ने मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया है। उन्होंने सिर्फ इतना कहा है, "मैं तब तक किसी पर शक नहीं करूंगा, जब तक कोई ठोस सबूत न मिले।" इस बीच श्रीलंका के नए राष्ट्रपति सिरीसेना ने कहा है कि वह अपने पहले विदेशी दौरे में अगले महीने भारत जाएंगे। उन्होंने कहा कि उनकी विदेश नीति के एजेंडे में भारत सबसे ऊपर है।
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