कभी हीरे-जवाहरात और महंगे ड्रेस पहनकर घूमने वाली निशा रविवार से
सफेद वस्त्रों में जैन साध्वी के रूप में नजर आएंगी। निशा के पिता मनोज भाई
न्यूयार्क में कोच फैक्टरी ‘रूबी’ के मालिक हैं। बेटी के इस फैसले का
उन्होंने सम्मान किया और संन्यासी जीवन के लिए हामी भर दी।
इस अनोखी यात्रा में निशा के परिवार के अलावा उनके अमेरिकी मित्र,
रिश्तेदार समेत श्वेतांबर जैन साधु-साध्वी भी मौजूद थे। निशा के साथ-साथ
अमेरिका से जैन समाज के सौ से ज्यादा लोग पहुंचे हैं।
साध्वी बनने का विधान जैन श्वेतांबरों के प्रमुख आचार्य विजय कीर्तियश सुरीश्वर जी महाराज के सानिध्य में हो रहा है। निशा के संन्यास जीवन की घोषणा के बाद से न्यूयॉर्क, शिकागो, लंदन समेत कई स्थानों पर स्वागत समारोह हुए। संन्यास लेने के लिए निशा न्यूयार्क से समवेत शिखर, पारसनाथ आई हैं।
कमाई दोनों हाथों से लुटाई
जैन धर्म की परंपरा के अनुसार शनिवार को निशा की वर्षी-दान यात्रा
निकाली गई। इसमें निशा ने अपनी पूरी कमाई दोनों हाथों से लुटा दिया।
वर्षी-दान (वरघोड़ा) को देखने के लिए शिखरजी में लोगों की भीड़ लगी रही। इस
दौरान 12 सौ परिवारों के बीच एक-एक हजार रुपए, कंबल, वस्त्र, थाली समेत 15
सौ रुपए की सामग्री भेंट की।
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