Monday, 19 January 2015

सब्सिडी को धीरे-धीरे तर्कसंगत बनाएंगे -वित्त मंत्री जेटली ने दिया भरोसा

चेन्नई। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वित्त वर्ष 2015-16 के आम बजट से पहले सोमवार को कहा कि हर तरह की सब्सिडी को तर्कसंगत बनाने और नीतियों में स्थिरता सुनिश्चित करने की जरूरत है ताकि निवेश आकर्षित हो और वृद्धि को प्रोत्साहित किया जा सके। मंत्री ने यहां सीआईआई के एक समारोह में कहा, ‘एक जनवरी से एलपीजी सब्सिडी बैंकों के जरिए दी जाएगी, हमें हर संभव धीरे-धीरे सब्सिडी को तर्कसंगत बनाना है। उम्मीद है कि सरकार पूर्व आरबीआई गवर्नर विमल जालान की अध्यक्षता वाले व्यय वित्त आयोग के सुझाव को 2015-16 के बजट प्रस्तावों में शामिल कर सकती है। माना जा रहा है कि जालान ने अपनी अंतरिम सिफारिशें वित्त मंत्रालय को सौंप दी हैं, जिसमें सब्सिडी और सार्वजनिक व्यय को तर्कसंगत बनाने का सुझाव दिया गया है। सरकार का तेल, उर्वरक आदि से जुड़ा सब्सिडी बिल लाखों करोड़ रुपये का है। मंत्री ने कर और अन्य नीतियों में स्थिरता की जरूरत को भी रेखांकित किया ताकि भारत को निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य बनाया जा सके। जेटली ने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के कार्यान्वयन से देश में कारोबार का माहौल सुधारने में मदद मिलेगी। मंत्री ने कहा कि जीएसटी का विभिन्न राज्यों ने स्वागत किया और नई प्रत्यक्ष कर प्रणाली लागू होने पर उनमें से किसी को भी एक रुपये का भी नुकसान नहीं होगा। भूमि अधिग्रहण कानून में प्रस्तावित बदलाव का हवाला देते हुए जेटली ने कहा कि इससे आखिरकार किसानों को अपनी जमीन की बेहतर कीमत हासिल करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इसके अलावा ग्रामीण बुनियादी ढांचा और औद्योगिकी गलियारे से जमीन की कीमत बढ़ेगी और ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
जेटली ने कहा कि नीति आयोग के गठन से राज्यों को देश के विकास में अपेक्षाकृत बड़ी भूमिका निभाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, ‘सभी मुख्यमंत्री आयोग की सामान्य परिषद के अंग बनने वाले हैं। केंद्रीय योजनाओं की संख्या घटाने का विचार है ताकि राज्यों के पास ज्यादा राशि उपलब्ध हो और वे अपनी योजनाएं खुद तैयार कर सकेंगे। मैं सिर्फ कुछ पहलों की रूपरेखा तैयार कर रहा हूँ।’ उन्होंने कहा, ‘इन सभी पहलों ने घरेलू रूझान और भारत के संबंध में वैश्विक रख में बदलाव किया है।’ वित्त मंत्री ने कहा है कि मुद्रास्फीति मोटे तौर पर नियंत्रण में है, कच्चे तेल में गिरावट और खाद्य मुद्रास्फीति पर नियंत्रण के बीच ब्याज दरों में कटौती की प्रक्रिया शुरू हुई। जेटली ने कहा, ‘मैं इसे प्रक्रिया की शुरूआत के तौर पर देखता हूँ इसलिए आने वाले दिनों में इसे और बढ़ावा मिलेगा। हमारी प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाएं हमसे बेहतर स्थिति में नहीं हैं। हम उनके मुकाबले ज्यादा तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इसलिए यह साल पिछले साल से काफी बेहतर होगा, हालांकि, बहुत अच्छा नहीं होगा।’

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