Tuesday, 13 January 2015

परंपरा: पत्नी को पति के किस हाथ की तरफ सोना या बैठना चाहिए और क्यों?

उज्जैन। कहा जाता है कि पति-पत्नी का रिश्ता जन्म-जन्मांतर का होता है। हिंदू धर्म ग्रंथों में पत्नी को वामांगी कहा जाता है। इसका अर्थ होता है बाएं अंग की अधिकारी। इसलिए पुरुष के शरीर का बायां हिस्सा स्त्री का माना जाता है। दरअसल माना जाता है कि अर्धनारीश्वर भगवान शिव के बाएं अंग से स्त्री की उत्पत्ति हुई है जिसका प्रतीक है शिव का अर्धनारीश्वर शरीर।

किन कामों के समय पति को उल्टे हाथ की ओर होना चाहिए- शास्त्रों में कहा गया है कि स्त्री पुरुष की वामांगी होती है। इसलिए सोते समय, किसी सभा में, सिंदूरदान, आशीर्वाद ग्रहण करते समय और भोजन के समय पति को हमेशा पत्नी की बाईं और रहना चाहिए। इससे शुभ फल की प्राप्ति होती है।

वामांगी होने के बावजूद भी कुछ कामों में स्त्री को दायीं ओर रहने की बात शास्त्र कहता है। शास्त्रों में बताया गया है कि कन्यादान, विवाह, यज्ञकर्म, जातकर्म, नामकरण और अन्न प्राशन के समय पत्नी को पति के दायीं ओर बैठना चाहिए।

पत्नी को पति के दाएं या बाएं बैठने संबंधी इस मान्यता के पीछे तर्क यह है कि जो कर्म सांसारिक होते हैं उसमें पत्नी पति के बायीं ओर बैठती है। क्योंकि यह कर्म स्त्री प्रधान कर्म माने जाते हैं। यज्ञ, कन्यादान, विवाह यह सभी काम पारलौकिक माने जाते हैं और इन्हें पुरुष प्रधान माना गया है। इसलिए इन कर्मों में पत्नी के दायीं ओर बैठने के नियम हैं।

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