बाहरी दिल्ली [शिप्रा सुमन]। महिलाओं को सशक्त करने का सबसे बेहतर
माध्यम उन्हें मानसिक और आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। इस दिशा में
मंगोलपुरी निवासी चंचल अग्रवाल ने अथक प्रयासों से न सिर्फ महिलाओं को
सशक्त बनाने का कार्य किया, बल्कि इसके लिए उन्होंने कई सम्मान भी प्राप्त
किए।
31 वर्षीय चंचल महिलाओं को रोजगार से संबंधित प्रशिक्षण देने के साथ ही उत्पीड़न की शिकार कामकाजी महिलाओं की काउंसलिंग कर उन्हें बेहतर मार्ग सुझाने का भी कार्य कर रही हैं। साथ ही उन्हें आत्मरक्षा के भी कई तरीकों से अवगत करा रही हैं। अब तक 2500 महिलाओं को आत्मरक्षा का गुर सिखा चुकी हैं। बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली चंचल आज अपने प्रयासों की वजह से दूसरों के लिए प्रेरणा की श्रोत बन गई हैं।
14 वर्षो से जुड़ी हैं सामाजिक कार्यो से
वर्ष 2000 में चंचल ने स्थानीय स्तर पर सामाजिक संस्था का निर्माण किया, जिसका नाम ‘फैमली ऑफ शिरडी साईं बाबा’ रखा। पति के सहयोग से उन्होंने झुग्गी और पिछड़े वर्ग की महिलाओं को संस्था से जोड़ा। संस्था महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई के अलावा ब्यूटीशियन, कंप्यूटर, टाइ¨पग और व्यक्तित्व विकास को लेकर कई तरह के कोर्स कराती है।
दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ चंचल ने जमीनी स्तर पर कार्य शुरू किया। धीरे-धीरे उसका विस्तार हुआ इस समय सुल्तानपुरी के विभिन्न ब्लॉकों के अलावा नांगलोई, जलेबी चौक व अमन विहार की भी महिलाएं संस्था से जुड़ने लगी हैं।
काउंसलिंग से राह दिखाने की कोशिश
समय-समय पर चंचल सहयोगियों के साथ मिलकर कैंप लगाती हैं। इसके तहत उत्पीड़न की शिकार महिलाओं की काउंसिंग भी की जाती है। घरेलू ¨हसा की शिकार महिलाओं को कानून और उनके अधिकारों की जानकारी दी जाती है।
चंचल को उनके कार्यो के लिए कई सम्मान भी मिल चुके हैं। 2010-11 में युवाओं के कल्याण व विकास के लिए उत्तम कार्य करने के लिए उन्हें केंद्रीय युवा व खेल मंत्रलय की ओर से राज्यस्तरीय पुरस्कार दिया गया। 2011-12 में राष्ट्रपति से नेशनल यूथ अवार्ड प्राप्त हुआ। नेहरू युवाकेंद्र की ओर से स्टेट यूथ अवार्ड का सम्मान भी मिला है।
दिल्ली पुलिस से लेती हैं मदद
आए दिन हो रही आपराधिक घटनाओं से महिलाओं को बचाने के लिए चंचल उन्हें आत्मरक्षा के गुर सिखा रही हैं। संस्था और दिल्ली पुलिस की मदद से महिलाओं, युवतियों व छात्रओं को सामूहिक रूप से कई चरणों में यह प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके लिए महिला कांस्टेबलों की भी मदद ली जाती है। जूडो, कराटे और कई अन्य तरीकों से महिलाओं को आत्मरक्षा के हुनर से अवगत कराया जाता है। इसके साथ ही उन्हें प्रतिदिन घटने वाली छेड़छाड़ की घटनाओं के बारे में भी जानकारी देकर उन्हें अपने बचाव के लिए जागरूक किया जाता है।
31 वर्षीय चंचल महिलाओं को रोजगार से संबंधित प्रशिक्षण देने के साथ ही उत्पीड़न की शिकार कामकाजी महिलाओं की काउंसलिंग कर उन्हें बेहतर मार्ग सुझाने का भी कार्य कर रही हैं। साथ ही उन्हें आत्मरक्षा के भी कई तरीकों से अवगत करा रही हैं। अब तक 2500 महिलाओं को आत्मरक्षा का गुर सिखा चुकी हैं। बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली चंचल आज अपने प्रयासों की वजह से दूसरों के लिए प्रेरणा की श्रोत बन गई हैं।
14 वर्षो से जुड़ी हैं सामाजिक कार्यो से
वर्ष 2000 में चंचल ने स्थानीय स्तर पर सामाजिक संस्था का निर्माण किया, जिसका नाम ‘फैमली ऑफ शिरडी साईं बाबा’ रखा। पति के सहयोग से उन्होंने झुग्गी और पिछड़े वर्ग की महिलाओं को संस्था से जोड़ा। संस्था महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई के अलावा ब्यूटीशियन, कंप्यूटर, टाइ¨पग और व्यक्तित्व विकास को लेकर कई तरह के कोर्स कराती है।
दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ चंचल ने जमीनी स्तर पर कार्य शुरू किया। धीरे-धीरे उसका विस्तार हुआ इस समय सुल्तानपुरी के विभिन्न ब्लॉकों के अलावा नांगलोई, जलेबी चौक व अमन विहार की भी महिलाएं संस्था से जुड़ने लगी हैं।
काउंसलिंग से राह दिखाने की कोशिश
समय-समय पर चंचल सहयोगियों के साथ मिलकर कैंप लगाती हैं। इसके तहत उत्पीड़न की शिकार महिलाओं की काउंसिंग भी की जाती है। घरेलू ¨हसा की शिकार महिलाओं को कानून और उनके अधिकारों की जानकारी दी जाती है।
चंचल को उनके कार्यो के लिए कई सम्मान भी मिल चुके हैं। 2010-11 में युवाओं के कल्याण व विकास के लिए उत्तम कार्य करने के लिए उन्हें केंद्रीय युवा व खेल मंत्रलय की ओर से राज्यस्तरीय पुरस्कार दिया गया। 2011-12 में राष्ट्रपति से नेशनल यूथ अवार्ड प्राप्त हुआ। नेहरू युवाकेंद्र की ओर से स्टेट यूथ अवार्ड का सम्मान भी मिला है।
दिल्ली पुलिस से लेती हैं मदद
आए दिन हो रही आपराधिक घटनाओं से महिलाओं को बचाने के लिए चंचल उन्हें आत्मरक्षा के गुर सिखा रही हैं। संस्था और दिल्ली पुलिस की मदद से महिलाओं, युवतियों व छात्रओं को सामूहिक रूप से कई चरणों में यह प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके लिए महिला कांस्टेबलों की भी मदद ली जाती है। जूडो, कराटे और कई अन्य तरीकों से महिलाओं को आत्मरक्षा के हुनर से अवगत कराया जाता है। इसके साथ ही उन्हें प्रतिदिन घटने वाली छेड़छाड़ की घटनाओं के बारे में भी जानकारी देकर उन्हें अपने बचाव के लिए जागरूक किया जाता है।
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