Saturday, 3 January 2015

जानिए, पांच सवाल जो कोस्ट गार्ड के ऑपरेशन को करते हैं कठघरे में खड़ा

1. आतंकी नहीं स्मगलर थे नाव में?
केंद्र सरकार के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक, इस बात की पूरी संभावना है कि ऑपरेशन में मारे गए दो लोग आतंकवादी न होकर शराब और डीजल की तस्करी करने वाले छोटे-मोटे स्मगलर रहे हों, जो पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से शराब का कार्गो मछली पकड़ने वाली दूसरी नावों तक पहुंचाते थे।
 
2. जरूरत से ज्यादा ताकत लगाई 
यह भी बताया जा रहा है कि कोस्ट गार्ड ने मछली पकड़ने वाली नाव को घेरने में जरूरत से कहीं ज्यादा ताकत लगा दी। इंटेलिजेंस इनपुट में कहा गया था कि मछली पकड़ने वाली नाव भारत की तरफ आ रही है। ऐसे में, कोस्ट गार्ड का शिप ही नाव का पीछा करने के लिए काफी था। 
 
3. आतंकवाद से जुड़ी कोई सूचना नहीं थी 
रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, '31 दिसंबर को मिले इंटेलिजेंस इनपुट्स के मुताबिक, कराची के नजदीक केटी बंदर से एक मछली पकड़ने वाली नाव के जरिए कोई संदिग्ध डील किया जाना था।' सरकार से जुड़े शीर्ष सूत्रों के मुताबिक, इंटेलिजेंस इनपुट में आतंकवाद से जुड़ी कोई जानकारी नहीं थी। उसमें देश पर किसी बड़े खतरे की भी बात नहीं कही गई थी। इसके बजाय नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (एनटीआरओ) ने मोबाइल फोन पर कराची के नजदीक केटी बंदर से समुद्र में स्मगलिंग करने वाले गिरोह की बातचीत टेप की थी।
 
4. नेवी ने नहीं उठाया कोई कदम 
सूत्रों के मुताबिक, एनटीआरओ के मिड लेवल के अफसर ने कोस्ट गार्ड और नेवी को सीधे जानकारी दे दी, जबकि नियम यह है कि किसी भी संभावित हमले की जानकारी रॉ, इंटेलिजेंस एजेंसियों और बीएसएफ के साथ शेयर की जानी चाहिए। गुजरात पुलिस और महाराष्ट्र पुलिस को भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। नेवी ने इस इंटेलिजेंस इनपुट्स पर कोई कदम नहीं उठाया, क्योंकि मिली जानकारी से साफ था कि पूरे मामले से देश को किसी बड़े खतरे की आशंका नहीं थी।     

5. रक्षा मंत्रालय के बयान पर उठे सवाल 
कॉलमनिस्ट एम. भद्रकुमार ने रक्षा मंत्रालय के बयान पर सवाल उठाए हैं। कुमार के मुताबिक, 'रक्षा मंत्रालय का बयान बहुत ही सावधानी से लिखा गया है।' रक्षा मंत्रालय के बयान के मुताबिक इंटेलिजेंस इनपुट्स के मुताबिक, कराची से निकली मछली पकड़ने वाली नाव पर सवार लोग अरब सागर में किसी संदिग्ध डील को अंजाम देना चाहते थे। भद्रकुमार कहते हैं कि बयान में न तो पाकिस्तान का नाम लिया गया है और न ही यह बताया गया है कि नाव में विस्फोटक लदे हुए थे। उनके मुताबिक, 'सबसे अहम बात यह है कि बयान से साफ नहीं है कि घटना हुई कहां? भारतीय सीमा में, अंतरराष्ट्रीय सीमा में या पाकिस्तान की सीमा में? बयान में सिर्फ यह कहा गया है कि कोस्ट गार्ड के वहां पहुंचने पर नाव समुद्री सीमा में भारत से दूर भागने लगी। यह भी साफ नहीं है कि नाव को किसने डुबोया, कोस्ट गार्ड ने या नाव पर सवार लोगों ने?' अगर पूरे मामले में पाकिस्तान का हाथ है तो सरकार को यह खुलकर बताना चाहिए। यह भारत के फायदे की बात है, क्योंकि इस घटना पर दुनिया की नजर है। 
 
आसानी से पता लगाए जा सकते हैं तथ्य 
भद्रकुमार का कहना है कि इस पूरे मामले से जुड़े तथ्य आसानी से पता किए जा सकते हैं। उनका कहना है कि बराक ओबामा की भारत यात्रा महज तीन हफ्ते बाद है। ओबामा की सुरक्षा के मद्देनजर अब तक पूरे भारत में अमेरिकी सेना ने सैटेलाइट तैनात कर दिए गए होंगे। इन सैटेलाइट की मदद से जमीन पर और समुद्र में हुई हलचल का पता आसानी से लगाया जा सकता है।

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