Saturday, 5 September 2015

OROP के कॉन्सेप्ट को सरकार की मंजूरी, रक्षा मंत्री थोड़ी देर में कर सकते हैं बड़ा एलान

नई दिल्ली. मोदी सरकार अब से कुछ देर बाद वन रैंक वन पेंशन योजना लागू करने का एलान कर सकती है। इसके लिए सरकार लगभग सारी तैयारियां कर चुकी हैं। रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने थोेड़ी देर बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। इससे पहले रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मिलने उनके घर पहुंचे। इस दौरान बीजेपी के प्रवक्ता भी शामिल हुए। शनिवार को ही रक्षा मंत्री पूर्व सैनिकों के डेलिगेशन से मिले। उनसे कहा कि सरकार ने ओआरओपी के कॉन्सेप्ट को मंजूरी दे दी है। मेजर जनरल (रियायर्ड) सतबीर सिंह ने जंतर मंतर पर वन रैंक वन पेंशन की मांग को लेकर धरना दे रहे पूर्व सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा, 'सरकार ने कॉन्सेप्ट के रूप में मोटे तौर पर हमारी मांग मान ली है।'
पीएम ने नहीं दिया वक्त?
मुलाकात के बाद पूर्व सैनिकों के प्रवक्ता ने कहा, ''रक्षा मंत्री ने ओआरओपी के कॉन्सेप्ट को मंजूरी दी है। हालांकि, इस मुद्दे पर उनका बयान आने के बाद ही हम अनशन खत्म करने को लेकर कोई फैसला लेंगे।'' रक्षामंत्री से मुलाकात के लिए जाने के पहले पूर्व सैनिकों ने कहा कि अगर इस मुद्दे पर फैसले से पहले सरकार ने उन्हें भरोसे में नहीं लिया तो वह OROP को नहीं मानेंगे। उधर, पूर्व सैनिकों ने दावा किया है कि उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी से पांच बार मिलने का समय मांगा, लेकिन उनकी तरफ से कोई रिस्पॉन्स नहीं आया। पूर्व सैनिकों के मुताबिक, उन्होंने पीएम के प्रिंसिपल सेक्रेट्री नृपेंद्र मिश्रा के साथ दो मीटिंग की, लेकिन इनका कोई नतीजा नहीं निकल सका। बता दें कि योजना लागू करने की मांग को लेकर कई पूर्व सैनिक जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
मसौदा तैयार, पूर्व सैनिकों का आंदोलन जारी
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार ने इसके लिए मसौदा तैयार कर लिया है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार के ड्राफ्ट में हर पांच साल में पेंशन की समीक्षा की बात है, लेकिन पूर्व सैनिकों का कहना है कि ये ड्राफ्ट एकतरफ़ा है और इसमें पूर्व सैनिकों की सहमति नहीं है। बता दें कि इस योजना को लागू करने के बाद सरकार पर दस हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च आएगा।

समीक्षा को लेकर फंसा पेंच
पूर्व सैनिकों का कहना है कि सरकार एक साल में पेंशन की समीक्षा को तैयार नहीं है, लेकिन अगर ऐसा नहीं होगा तो ये वन रैंक-वन पेंशन नहीं होगा। हालांकि, उन्होंने कहा कि वो दो साल में समीक्षा किए जाने के लिए तैयार हैं, लेकिन तीन साल या पांच साल पर मानने का कोई सवाल ही नहीं है। पूर्व सैनिकों ने कहा कि सरकार का कहना है कि थोड़े पैसे बचाने हैं। इसलिए अगर वो वन रैंक-वन पेंशन को एक जून 2014 से लागू करती है तो भी उन्हें एतराज़ नहीं होगा।

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