राष्ट्रपति नई दिल्ली में हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित एक समारोह को
संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि हिन्दी ने आजादी के बाद कई महत्वपूर्ण
पड़ाव हासिल किए हैं और हिंदी को भारतीय चिंतन और संस्कृति का वाहक माना
गया है.
इस समारोह में राष्ट्रपति ने हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए उल्लेखनीय योगदान करने वाले सरकारी संगठनों एवं व्यक्तियों को राजभाषा पुरस्कार प्रदान किए. उन्होंने कहा, ‘‘यह भाषा हमारे पारंपरिक ज्ञान, प्राचीन सभ्यता तथा आधुनिक प्रगति के बीच एक कड़ी भी है. हमारा यह प्रयास होना चाहिए कि हिंदी का प्रयोग विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में बढ़े ताकि ग्रामीण जनता सहित सभी की सहभागिता देश की प्रगति में सुनिश्चित की जा सके.
राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि कार्यालयों में सूचना प्रौद्योगिकी में हिंदी का प्रयोग बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते वैश्विक आर्थिक परिवेश पर हिंदी की अपनी एक छाप है. दुनिया भर में बसे हुए लाखों प्रवासी भारतीय हिंदी को संपर्क भाषा के रूप में प्रयोग कर रहे हैं. इससे हिंदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिली है.
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे यकीन है कि हमारे संयुक्त प्रयास से हिन्दी को जल्द ही संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता मिलेगी.’’
राष्ट्रपति ने कहा कि यह जरूरी है कि तकनीकी ज्ञान से संबंधित साहित्य का सरल अनुवाद हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में उपलब्ध हो. मुखर्जी ने कहा कि उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि कार्यालयों में सूचना प्रौद्योगिकी में हिंदी का प्रयोग बढ़ रहा है.
राष्ट्रपति ने पुरस्कार विजेताओं को हिन्दी के क्षेत्र में उनके प्रशंसनीय कार्यों के लिए बधाई दी. उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए एकजुट हों.
इस मौके पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर चिंता जताई कि जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में हिन्दी को जिस तरह से सम्मान मिलना चाहिए था नहीं मिला है. उन्होंने इस तर्क को गलत बताया कि दक्षिण भारत में लोग हिन्दी की बजाय अंग्रेजी भाषा को अधिक महत्व देते हैं.
सिंह ने कहा कि देश में 75 प्रतिशत से अधिक लोग या तो हिन्दी बोलते हैं या हिन्दी समझते हैं. देश के प्रत्येक गांव में लोग या तो अपनी मातृभाषा बोलते हैं या हिन्दी बोलते हैं. लेकिन वे अंग्रेजी नहीं जानते. मराठी भाषी बाल गंगाधर तिलक जैसे गैर-हिन्दी भाषी नेता हिन्दी भाषा को सरकारी भाषा बनाने की मांग को लेकर सबसे पहले आगे आये थे.
गृह मंत्री ने कहा कि बड़ी प्रोद्योगिकी कंपनियां हिन्दी के प्रयोग को बढ़ावा देने पर बड़े पैमाने पर जोर दे रही हैं और एक सर्वेक्षण के मुताबिक सभी भाषाओं के बीच अधिकतम 94 प्रतिशत सामग्री हिन्दी में तैयार होती हैं.
इस समारोह में राष्ट्रपति ने हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए उल्लेखनीय योगदान करने वाले सरकारी संगठनों एवं व्यक्तियों को राजभाषा पुरस्कार प्रदान किए. उन्होंने कहा, ‘‘यह भाषा हमारे पारंपरिक ज्ञान, प्राचीन सभ्यता तथा आधुनिक प्रगति के बीच एक कड़ी भी है. हमारा यह प्रयास होना चाहिए कि हिंदी का प्रयोग विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में बढ़े ताकि ग्रामीण जनता सहित सभी की सहभागिता देश की प्रगति में सुनिश्चित की जा सके.
राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि कार्यालयों में सूचना प्रौद्योगिकी में हिंदी का प्रयोग बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते वैश्विक आर्थिक परिवेश पर हिंदी की अपनी एक छाप है. दुनिया भर में बसे हुए लाखों प्रवासी भारतीय हिंदी को संपर्क भाषा के रूप में प्रयोग कर रहे हैं. इससे हिंदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिली है.
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे यकीन है कि हमारे संयुक्त प्रयास से हिन्दी को जल्द ही संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता मिलेगी.’’
राष्ट्रपति ने कहा कि यह जरूरी है कि तकनीकी ज्ञान से संबंधित साहित्य का सरल अनुवाद हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में उपलब्ध हो. मुखर्जी ने कहा कि उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि कार्यालयों में सूचना प्रौद्योगिकी में हिंदी का प्रयोग बढ़ रहा है.
राष्ट्रपति ने पुरस्कार विजेताओं को हिन्दी के क्षेत्र में उनके प्रशंसनीय कार्यों के लिए बधाई दी. उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए एकजुट हों.
इस मौके पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर चिंता जताई कि जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में हिन्दी को जिस तरह से सम्मान मिलना चाहिए था नहीं मिला है. उन्होंने इस तर्क को गलत बताया कि दक्षिण भारत में लोग हिन्दी की बजाय अंग्रेजी भाषा को अधिक महत्व देते हैं.
सिंह ने कहा कि देश में 75 प्रतिशत से अधिक लोग या तो हिन्दी बोलते हैं या हिन्दी समझते हैं. देश के प्रत्येक गांव में लोग या तो अपनी मातृभाषा बोलते हैं या हिन्दी बोलते हैं. लेकिन वे अंग्रेजी नहीं जानते. मराठी भाषी बाल गंगाधर तिलक जैसे गैर-हिन्दी भाषी नेता हिन्दी भाषा को सरकारी भाषा बनाने की मांग को लेकर सबसे पहले आगे आये थे.
गृह मंत्री ने कहा कि बड़ी प्रोद्योगिकी कंपनियां हिन्दी के प्रयोग को बढ़ावा देने पर बड़े पैमाने पर जोर दे रही हैं और एक सर्वेक्षण के मुताबिक सभी भाषाओं के बीच अधिकतम 94 प्रतिशत सामग्री हिन्दी में तैयार होती हैं.
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