कोलकाता. नेताजी सुभाष चंद्र बोस
से जुड़ी 64 फाइलें शुक्रवार को पश्चिम बंगाल सरकार ने सार्वजनिक कर दीं।
इन फाइलों से पता लगता है कि नेताजी के गायब होने के बाद भी उनकी पत्नी
एमिली शेंकल नेताजी के परिवार के संपर्क में थीं। लेटर्स के जरिए उनकी
बातचीत होती रहती थी। बातचीत में नेताजी की बेटी अनिता का भी जिक्र होता
था। एमिली को उम्मीद थी कि एक दिन नेताजी जरूर लौटेंगे। फाइलों में नेताजी
और एमिली से जुड़ी कुछ खास बातों पर एक नजर...
एमिली से मुलाकात और शादी
4 मई, 1946 को कोलकाता (तब कलकत्ता) पुलिस सिक्युरिटी कंट्रोल के
वीकली सर्वे में एमिली का जिक्र एक ऐसी महिला के तौर पर किया गया है, जो
खुद को नेताजी की पत्नी बताती है। इस डॉक्युमेंट के मुताबिक, नेताजी और
एमिली की मुलाकात बर्लिन में 1941 में हुई और वो 1942 तक वे साथ रहे। बोस
ने एमिली को प्रपोज किया। जनवरी 1942 में ही दोनों ने शादी कर ली। 29
नवंबर, 1942 को उनकी एक बेटी हुई। बेटी का नाम अनिता रखा गया। इसके बाद
एमिली वापस वियना चली गईं।
रजिस्टर्ड नहीं थी शादी
नेताजी और एमिली की शादी कानूनी नहीं थी, क्योंकि जर्मनी में किसी
विदेशी से शादी की कानूनी तौर पर इजाजत नहीं थी। इसलिए दोनों की शादी
रजिस्टर्ड नहीं हुई। एमिली ने दावा किया कि नेताजी से उनकी शादी हिंदू
रीति-रिवाज से हुई थी।
पत्नी से कहा था, भाई को भेज देना फोटोग्राफ्स
वियना छोड़ते वक्त नेताजी ने अपने भाई शरत चंद्र बोस के नाम एक लेटर
छोड़ा था। बोस ने एमिली से कहा था कि अगर उन्हें कुछ हो जाए, तो वह इन
फोटोग्राफ्स के साथ यह लेटर भाई के पास पहुंचा दें।
केवल चार हफ्ते की थी बेटी जब नेताजी आखिरी बार मिले
नेताजी ने बेटी अनिता को जब आखिरी बार देखा, तब उसकी उम्र महज चार
हफ्ते थी। बोस 1943 में एक बार फिर वियना जाना चाहते थे, लेकिन ऐसा कभी
नहीं हो सका। बोस गायब हो चुके थे।
नेताजी की मौत की खबर मिलने के बाद लिखा लेटर
एमिली को नेताजी की मौत की खबर साल 1945 में मिली। यह खबर मिलने के
बाद एमिली ने नेताजी की फैमिली को एक लेटर लिखा। यह लेटर भी कोलकाता पुलिस
की इंटेलिजेंस यूनिट ने अपने कब्जे में ले लिया। एमिली ने इस लेटर में लिखा
था कि उन्हें बोस के परिवार से पैसा नहीं चाहिए। खत के आखिर में एमिली ने
लिखा कि बोस की मौत की खबर सुनकर वह ‘शॉक्ड’ हैं।
1948 में शरत चंद्र से मिली थीं एमिली
1948 में नेताजी के भाई शरत चंद्र बोस वियना गए। यहां उनकी मुलाकात
एमिली और नेताजी की बेटी अनिता से हुई। इस मुलाकात में दोनों ने यह उम्मीद
जताई कि नेताजी एक दिन जरूर लौटेंगे।
खत में भी नेताजी के लौटने की उम्मीद जताई
11 मई, 1949 को एमिली ने शरत चंद्र को एक लेटर लिखा। इस लेटर में लिखा
था, “हम केवल यही उम्मीद कर सकते हैं कि हमारी उम्मीद सही साबित होगी और
आपके भाई एक दिन जरूर लौट कर आएंगे। केवल यही एक चीज है जिसके लिए मैं
प्रार्थना करती हूं। अनिता अंग्रेजी सीखना चाहती है। अगली बार जब वह आपसे
मिलेगी तो बातचीत कर पाएगी।” इस वक्त अनिता की उम्र सात साल थी।
शरत की फैमिली के दूसरे मेंबर्स के टच में भी थीं एमिली
एमिली शरत बोस की फैमिली के कुछ मेंबर्स के भी टच में भी थीं। इनमें
से एक चित्रा बोस थीं जो शरत बोस की बेटी थीं। 1949 में एमिली ने चित्रा को
लिखे एक लेटर में ईस्टर सेलिब्रेशन का जिक्र किया है। इसमें अनिता ने कहा,
“ईस्टर मेरे लिए बड़ा बोरिंग रहा। अनिता के साथ जंगल बुक मूवी देखी। उसे
शेर और सांपों से डर लगा, लेकिन हाथियों को देखकर तो वो खुश हो गई।”
आखिर क्यों होती रही नेताजी के परिवार की जासूसी
ममता सरकार द्वारा सार्वजनिक की गईं फाइलों की प्रॉसेसिंग से जुड़े एक
अफसर के मुताबिक, “भारत सरकार को लगता था कि नेताजी जिंदा हैं। और अगर वह
जिंदा हैं तो यह जानकारी एमिली और अनिता तक जरूर पहुंचेगी। इसलिए वियना से
आने या जाने वाले किसी भी खत पर पैनी नजर रखी जाती थी। लेकिन एमिली का खत
पढ़कर ऐसा लगता है कि वे नेताजी की फैमिली से संबंध बनाए रखना चाहती थीं।
वे पिता के बिना बड़ी हो रही अनिता के बारे में हर बात बोस फैमिली से शेयर
करना चाहती थीं।”
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