Tuesday, 29 September 2015

950 करोड़ का फ्रॉड : FIFA के पूर्व वाइस प्रेसिडेंट पर लगा लाइफटाइम बैन

ज्यूरिख. फीफा (फेडरेशन आफ इंटरनेशनल फुटबॉल एसोसिएशन) के पूर्व वाइस प्रेसिडेंट जैक वार्नर पर लाइफटाइम बैन लगा दिया गया है। अब वे फुटबॉल से जुड़ी किसी भी नेशनल या इंटरनेशनल एक्टिविटी में शामिल नहीं हो सकेंगे। 72 साल के वार्नर पर लगा यह बैन 25 सितंबर से प्रभावी होगा।
क्यों हुई कार्रवाई
>फीफा के मुताबिक, कैरेबियाई फुटबॉल प्रेसिडेंट रह चुके वार्नर को ‘फीफा और नॉर्थ अमेरिकी फुटबॉल फेडरेशन कोनकाकाफ में विभिन्न पदों पर रहते हुए अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल करने का दोषी पाया गया है।
>वार्नर अमेरिका में मौजूदा फीफा भ्रष्टाचार मामले से संबंधित 12 आरोपों का सामना कर रहे हैं। इसमें धोखाधड़ी, रैकेट चलाना और फंड्स की हेराफेरी के आरोप शामिल हैं। पूरा मामला 950 करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले के मामले से जुड़ा है। वार्नर पर ये आरोप 2013 में फीफा की इंटरनल कमेटी ने लगाए थे। वॉर्नर को अपने देश त्रिनिदाद एंड टोबैगो में अमेरिका प्रत्यर्पित (extradition) किए जाने के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ रही है। सुनवाई दिसंबर में होनी है।
ब्लैटर पर भी लटकी तलवार
फीफा प्रेसिडेंट सेप ब्लैटर और पूर्व प्रेसिडेंट प्लाटिनी के खिलाफ भी आपराधिक जांच चल रही है। ब्लैटर पर फीफा में फाइनेंशियल हेरफेर करने और 2011 में पूर्व प्रेसिडेंट प्लाटिनी को 13.2 करोड़ रुपए का गैरकानूनी ढंग से पेमेंट करने के आरोप हैं। हाल ही में स्विट्जरलैंड के अटॉर्नी जनरल के लोगों ने ब्लैटर से पूछताछ की थी और उनके दफ्तर की तलाशी भी ली थी।
फीफा अध्यक्ष पद के लिए आपात बैठक
फीफा प्रेसिडेंट का चुनाव अगले साल होना है। इस पद के कैंडिडेट चुंग मोंग जू ने ब्लेटर पर लगे आरोपों के बाद मंगलवार को एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई। फीफा के पूर्व वाइस प्रेसिडेंट दक्षिण कोरिया के मोंग जू ने कहा कि फीफा के नेतृत्व के लिए वर्किंग कमेटी बनाया जाना चाहिए ताकि फीफा बिना किसी समस्या के अपना कामकाज कर सके।
क्या है पूरा मामला
इस साल मई में स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में फीफा के सात अधिकारियों को भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इन पर 950 करोड़ रुपए से ज्यादा की घूस लेने और फाइनेंशियल गड़बड़ी करने का आरोप था। गिरफ्तार अधिकारियों पर आरोप था कि वे अमेरिका में फुटबॉल टूर्नामेंट्स के आयोजन में धांधली कर रहे थे।
क्यों हुई थी गिरफ्तारी?
ट्रैफिक ग्रुप नाम की ब्राजील की स्‍पोर्ट्स मार्केटिंग फर्म और इसके फाउंडर जोस हविला फीफा में भ्रष्‍टाचार से जुड़ी अहम कड़ी हैं। अमेरिकी एजेंसियों के मुताबिक, फीफा को घूस देने वाले कारोबारियों में हविला सबसे अहम हैं। वह फुटबॉल प्रतियोगिताओं का आयोजन कराने वाली संस्‍थाओं और इन आयोजनों से जुड़ने वाली कंपनियों के बीच की अहम कड़ी के तौर पर काम करता रहा है। इन कंपनियों को मैच की स्‍पॉन्‍सरशिप या ब्रॉडकास्‍ट राइट्स आदि के लिए हविला और उसकी फर्म से करार करना पड़ता है। वह फुटबॉल फेडरेशन्स के अफसरों को घूस देकर कंपनियों से उनकी डील करवाता है।
फीफा स्कैंडल का टाइम लाइन

* 2 दिसंबर, 2010 : वर्ल्ड कप-2018 की मेजबानी रूस और 2022 की कतर को दिया।

* 1 जून, 2011 : शेप ब्लैटर चौथी बार प्रेसिडेंट चुने गए। फीफा ने इलेक्शन से एक महीने पहले हुए पेमेंट की जांच शुरू की।

* 30 अप्रैल, 2013 : फीफा जांच कमेटी ने कहा, "जाओ हवेलेंज और पूर्व एक्सक्यूटिव मेंबर रिचर्डो टेलेक्सिरा और निकोलस लेज ने स्पोर्ट्स मोर्केटिंग कंपनी ISL के साथ गैरकानूनी पेमेंट की बात स्वीकर की।" ब्लैटर को क्लीन चिट।

* 17 दिसंबर, 2014 : यूएस के पूर्व एटॉर्नी जनरल मिचेल गार्सिया ने जांच कमेटी के अध्यक्ष पद से इस्तीफ दिया। जांच कमेटी पर सवाल उठाए।

* 27 मई, 2015 : पुलिस ने जुरिख होटल में फुटबॉल अधिकारियों के यहां छापा। दो वाइस प्रेसिडेंट गिरफ्तार।

* 29 मई, 2015 : सेप ब्लैटर 5वीं बार फीफा प्रेसिडेंट बने।

* 17 सितंबर, 2015 : फीफ के सेक्रेटरी जनरल को सस्पेंड किया गया।

* 25 सितंबर, 2015 : फीफा प्रेसिडेंट से जुड़े आपराधिक मामले की जांच शुरू। उन्हें वित्तीय अनियमितताओं के मामले में आरोपी बनाया गया।

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