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नई दिल्ली. व्यापमं (व्यावसायिक शिक्षा मंडल) घोटाले में
घिरे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आखिरकार सीबीआई
जांच के लिए हामी भर दी। उन्होंने मंगलवार दोपहर करीब डेढ़ बजे प्रेस
कॉन्फ्रेंस में इसका एलान किया। ढाई घंटे के अंदर ही, करीब चार बजे
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट को लेटर भी लिख दिया। बताया जा रहा है कि लेटर स्पेशल
प्लेन से जबलपुर स्थित हाईकोर्ट भिजवाने की व्यवस्था की गई।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीएम ने कहा- ‘मैं हाईकोर्ट से इस मामले की जांच
सीबीआई से कराने की गुजारिश करूंगा। पिछले कुछ दिनों से जो कुछ हो रहा है,
उससे सवाल खड़े हो रहे हैं। सोमवार को मैं पूरी रात सो नहीं सका। मुझे लगा
कि सभी संदेहों को दूर किया जाना चाहिए।’
सीएम ने कहा, “एसटीएफ जांच कर रही है। कांग्रेस के शासन काल में भर्ती
की कोई प्रक्रिया ही नहीं थी। घोटाला सामने आया तो हमने जांच एसटीएफ को
सौंप दी थी। हाईकोर्ट ने भी कहा था कि सीबीआई जांच की जरूरत नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी जांच को ठीक माना था। पिछले दिनों जो माहौल बना, उसमें
पूछा जा रहा है कि सीबीआई जांच क्यों नहीं? मैं मानता हूं कि जनता के मन
में काफी सवाल हैं। हाल ही में जो मौतें हुई हैं उनकी भी जांच होनी चाहिए।”
इस बीच, मंगलवार को एक और आरोपी की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
सीबीआई जांच की मांग पर अब तक क्या हुआ?
1. सरकार अब तक इनकार ही कर रही थी
मध्यप्रदेश सरकार अब तक यही कहती रही है कि हाईकोर्ट की ओर से बनाई गई
एसआईटी इस जांच को मॉनिटर कर रही है। वह समय-समय पर कोर्ट को स्टेटस
रिपोर्ट सौंपती रही है। ऐसे में हाईकोर्ट के फैसले से आगे जाकर सीबीआई जांच
के आदेश नहीं दिए जा सकते।
2. सुप्रीम कोर्ट ने भी ठुकरा दी थी अर्जियां
नवंबर 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने उन चार अर्जियों को नामंजूर कर दिया
जिनमें व्यापमं घोटाले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई थी। सीबीआई
जांच की मांग करने वालों में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह भी शामिल थे।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एसटीएफ हाईकोर्ट की बनाई एसआईटी की मॉनिटरिंग
में इस केस की जांच कर रही है। एसटीएफ में कई पेशेवर इन्वेस्टिगेटर हैं।
ऐसे में किसी और एजेंसी से जांच कराने की जरूरत नहीं है।
3. लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट भी करेगी 9 जुलाई को इसी मुद्दे पर सुनवाई
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने व्यापमं केस की सीबीआई जांच की मांग करने
वाली अर्जियां विचार के लिए मंजूर कर लीं। चीफ जस्टिस एच.एल. दत्तू की
अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि 9 जुलाई को इस मामले की सुनवाई होगी। कांग्रेस
नेता दिग्विजय सिंह और तीन व्हिसलब्लोअर आशीष चतुर्वेदी, डॉ. आनंद राय और
प्रशांत पांडे ने ये अर्जियां दायर की हैं।
उमा मेरी बहन की तरह है: शिवराज
शिवराज सिंह चौहान ने उमा भारती से जुड़े सवाल का भी जवाब दिया।
उन्होंने कहा, ‘उमा भारती मेरी बहन की तरह हैं। उन्होंने अपने अंतर-मन की
बात कही है। इसलिए मुझे नहीं लगता कि उन्होंने जो कुछ भी कहा है वह किसी के
खिलाफ है। मैं उनका आदर करता हूं। जब वे पार्टी में नहीं थीं, तब भी मैंने
एक शब्द भी उनके खिलाफ नहीं कहा था। इंदौर क्राइम ब्रांच ने सबूतों के साथ
छेड़छाड़ की है। मैं खुद भी चाहता हूं कि व्यापमं मामले में उठ रहे सवालों
के निष्पक्ष जवाब मिले।’
उमा ने क्या कहा था : बता दें कि उमा भारती ने सोमवार को
व्यापमं केस पर टिप्पणी की थी। उन्होंने दावा किया था- ‘एसटीएफ को मामले की
जांच सौंपने से पहले ही इस केस के साथ बड़ा खिलवाड़ हो चुका है। मैंने
पहले ही इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी।’
कानून मंत्री ने कहा- हर फिजूल मुद्दे पर पीएम क्यों दें जवाब?
व्यापमं केस में मंत्रियों की बेतुकी बयानबाजी जारी है। एमपी के
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पत्रकार अक्षय सिंह की मौत से जुड़े सवाल पर
कहा था- ‘पत्रकार-वत्रकार छोड़ो, हमसे बड़ा पत्रकार है क्या?’ अब केंद्रीय
कानून मंत्री सदानंद गौड़ा ने भी अजीब टिप्पणी की है। उनसे मंगलवार को
व्यापमं मामले में पीएम की चुप्पी पर सवाल पूछा गया था। इस पर उन्होंने
कहा, “हर फिजूल मुद्दे पर पीएम का जवाब देना जरूरी नहीं है। गृहमंत्री और
पार्टी के तमाम नेता इस मामले में जवाब दे तो रहे हैं। फिर पीएम से इस
मामले में जवाब क्यों मांगा जा रहा है?”
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