Sunday, 19 July 2015

चार गांव का फैसला, घर में शौचालय नहीं तो बेटा नहीं चढ़ पाएगा घोड़ी

जालौर। आप सोच रहे होंगे कि घर में शौचालय होने और बेटे की शादी होने से क्या लेना-देना है, लेकिन इस बात में सच्चाई है। जालौर के आंवलोज, वासन, रटूजा एवं थलुंडा गांव में यदि लड़के के घर में टायलेट नहीं है तो उसकी शादी नहीं हो सकेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत की कल्पना को साकार करने के लिए जिले के चार गांवों के ग्रामीणों ने मिलकर कुछ ऐसे अहम फैसले लिए हैं, जिन्हें लागू करने के बाद इन गांवों की रूप-रेखा बदल जाएगी। इन गांवों ने इस परिकल्पना को साकार करने के लिए ग्रामीणों के साथ मिलकर यह अनूठी पहल करते हुए गांव के सभी घरों में शौचालय बनाने का सामूहिक रूप से बीड़ा उठाया है।

पंचायत की एनओसी लेंगे तब ही छप सकेंगे शादी कार्ड :
चारों गांव की पंचायतों ने मिलकर फैसला किया है कि यदि किसी के घर में शौचालय नहीं होगा तो उस परिवार के किसी भी तरह के पारिवारिक या शादी जैसे समारोह का बहिष्कार किया जाएगा। इसके अलावा इन चारों गांवों में शादी समारोह के दौरान कार्ड छपवाने के लिए पंचायत की एनओसी लेनी होगी। जिसमें यह प्रमाणित किया जाएगा कि घर में शौचालय निर्माण हो चुका है या नहीं। इसकी पुष्टि के बाद ही संबंधित ग्रामीण के घर में शादी समारोह का आयोजन किया जा सकेगा।

गरीबों के लिए विशेष व्यवस्था :
कमेटी ने आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए सहायता एजेंसी का निर्माण किया है। जिसमें ऐसे परिवारों को साख पर पहले टॉयलेट निर्माण के लिए राशि मुहैया कराई जा रही है। बाद में उस व्यक्ति को वह राशि एजेंसी को पुन: लौटाना होता है। देता है।

15 अगस्त तक हर घर में होगा टायलेट :
करीब पांच हजार आबादी वाले इन चार गांवों में करीब 600 टायलेट का निर्माण हो चुका है। फिलहाल एक हजार टायलेट निर्माण का लक्ष्य रखा गया था। बाकी के 400 टायलेट के लिए 20 जुलाई तक का समय दिया गया है। कमेटी के अध्यक्ष नरपत सिंह बालावत ने बताया कि 15 अगस्त तक चारों गावों में लगभग सभी टायलेट बन जाएंगे।

खुद ही कर रहे गटर की खुदाई :
चूंकि स्वच्छ भारत अभियान के तहत टॉयलेट निर्माण और गटर खुदाई के लिए राशि मिल रही है, फिर भी गटर की खुदाई खुद ही कर रहें हैं। इससे राशि बच रही है जो गरीबों को टायलेट बनाने के काम आएगी।

10 जून को हुआ था कमेटी का गठन :
टायलेट बनाने को लेकर ग्रामीणों ने 10 जून कमेटी का गठन किया था। इसमें प्रत्येक गांव से पुरुष व महिलाओं ने भाग लिया था। प्रत्येक गांव में कमेटी के दो दो सदस्यों की नियुक्ति की गई। ये लोग ग्रामीणों को स्वच्छता का महत्व समझाते हैं। इसके अलावा टॉयलेट निर्माण के लिए प्रेरित भी करते हैं।

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