पंजाब में कई सरकारी योजनाएं फंड की कमी के कारण दम तोड़ती रही हैं। जिन
योजनाओं का जनता को लाभ मिल रहा है उन्हें तो जारी रखा ही जाना चाहिए।
मौजूदा समय में इन्हीं में से एक है माता कौशल्या योजना। इस योजना के लागू
होने के बाद सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी करवाने वाली महिलाओं की संख्या
में काफी बढ़ोतरी हुई है। योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी
करवाने वाली महिलाओं को एक हजार रुपये दिए जाते हैं। वर्ष 2011 में इस
योजना के शुरू होने के बाद काफी महिलाओं ने इसका लाभ उठाया। लुधियाना जिले
में ही सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी का आंकड़ा बढ़कर दो हजार के करीब पहुंच
गया। शहर के सिविल अस्पताल में तो प्रति माह डिलीवरी की संख्या 550 तक
पहुंच गई। प्रदेश के अन्य जिलों में भी इस योजना का काफी अच्छा परिणाम
देखने को मिला है। आमतौर पर देखा गया है कि सरकारी अस्पतालों में वही
महिलाएं जाती हैं जो प्राइवेट अस्पतालों का खर्च वहन नहीं कर सकतीं।
प्राइवेट अस्पतालों में लोगों की यह भी शिकायत रहती है कि कई बार ऑपरेशन की
जरूरत न होते हुए भी बिल बढ़ाने के उद्देश्य से ऑपरेशन करके डिलीवरी करवाई
जाती है। सरकारी अस्पतालों में ऐसी शिकायत आमतौर पर नहीं आती है। हालांकि
अभी तक सरकार की तरफ से ऐसी कोई घोषणा नहीं हुई है कि माता कौशल्या योजना
को बंद किया जा रहा है, लेकिन बीते अक्टूबर से इस योजना के तहत अस्पतालों
को फंड नहीं जारी किया गया है। एक हजार रुपये प्राप्त करने के लिए महिलाएं
चार माह से अस्पतालों का चक्कर लगा रही हैं। सेहत विभाग के निदेशक का कहना
है कि आगामी मार्च तक तो यह योजना बंद नहीं होगी, उसके बाद अगले बजट से
इसके भविष्य का पता चलेगा। जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत जारी होने वाले फंड
का सरकार को विशेष ध्यान रखना चाहिए। खासकर सेहत से जुड़ी अच्छी योजनाएं तो
किसी भी हालत में फंड की कमी के कारण बंद नहीं होनी चाहिए। फंड के अभाव
में ऐसी योजनाओं का बंद होना न तो प्रदेश सरकार के हित में है और न ही आम
जनता के। फंड की व्यवस्था करना सरकार का काम है और इच्छाशक्ति रहने पर
सरकार के लिए कुछ भी असंभव नहीं है। उम्मीद की जानी चाहिए सरकार इस बात को
समडोगी और शीघ्र ही इस योजना के लिए फंड जारी करेगी।
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