सोशल वर्कर तीस्ता सीतलवाड़ और उनके पति के दो गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ)
को कथित रूप से विदेशी चंदा नियमन कानून (एफसीआरए) का उल्लंघन करने के
मामले में गृह मंत्रालय ने नोटिस भेजा है।
इसका जवाब देने के लिए उन्हें 15 दिन का समय दिया गया है। तीस्ता और उनके पति जावेद आनंद द्वारा चलाए जाने वाले एनजीओ सबरंग ट्रस्ट और सिटिजंस फॉर जस्टिस ऐंड पीस (सीजेपी) को दो दिन पहले नोटिस जारी किए गए।
मंत्रालय के अधिकारियों ने इस साल अप्रैल में इन दोनों संगठनों के दफ्तरों में जाकर उनके रिकॉर्ड और खातों की जांच की थी। इसके बाद ये नोटिस जारी किए गए हैं। सूत्रों ने बताया कि जांच में पाया गया कि दोनों एक मैगजीन 'कम्युनलिज्म कॉम्बैट' चलाते हैं और इसके सह-संपादक हैं। वे अपनी कंपनी सबरंग कम्युनिकेशंस ऐंड पब्लिशिंग प्राइवेट लिमिटेड के मुद्रक और प्रकाशक भी हैं।
उन्हें कथित रूप से विदेशी चंदा मिला है। विदेशी चंदा नियमन कानून के तहत किसी भी रजिस्टर्ड अखबार का कोई भी संवाददाता, कॉलम लिखने वाला, कार्टूनिस्ट, संपादक, मालिक, मुद्रक अथवा प्रकाशक विदेशी योगदान को स्वीकार नहीं कर सकता है।
दोनों का दूसरा एनजीओ सीजेपी है। यह गुजरात में 2002 में हुए दंगों के शिकार लोगों के मामलों को लड़ने में उनकी मदद करता रहा है। संगठन को 2008-09 से लेकर 2013-14 के बीच 1.18 करोड रुपये की विदेशी सहायता मिली है।
नोटिस के मुताबिक इसमें से 80 प्रतिशत से अधिक राशि यानी करीब 95 लाख रुपये कानूनी सहायता पर खर्च किए गए। एनजीओ का पंजीकरण जहां एक तरफ 'शैक्षणिक और आर्थिक कार्यों' के लिए किया गया था, वहीं इसे कानूनी सहायता जैसी गतिविधियों के लिए विदेशी सहायता प्राप्त हुई है, जो कि 'सामाजिक' कार्यों के तहत आती है। इस लिहाज से एनजीओ ने एफसीआरए नियमों का उल्लंघन किया है।
संगठन के बिल-चालान की जांच परख में पाया गया कि सबरंग ट्रस्ट ने विदेशी चंदों के लिए खोले गए खातों से सिटी बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को 12 लाख रुपये का भुगतान किया जो सीतलवाड़ और आनंद के क्रेडिट कार्ड की सुविधा के एवज में किया गया। गृह मंत्रालय के नोटिस में कहा गया है, 'एफसीआरए 2010 के प्रावधानों के तहत विदेशी सहायता का इस्तेमाल ऐसे काम के लिए किया गया जिसकी अनुमति नहीं है। इस लिहाज से इस असोसिएशन ने एफसीआरए कानून की धारा 8 (1) ए का उल्लंघन है।'
गृह मंत्रालय की जांच में यह भी पाया गया कि आनंद ने लाहौर की यात्रा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा पॉलिसी ली और इसके लिए धन सबरंग ट्रस्ट के खाते से चुकाया गया। यहां तक कि पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टी (पीयूसीएल) की बैठकों में भाग लेने के लिए किताबों और यात्रा पर जो खर्च किया गया उसे भी सबरंग ट्रस्ट के खातों में डाल दिया गया। यह भी कानून का उल्लंघन है।
मंत्रालय की जांच में यह भी पाया गया कि सबरंग ट्रस्ट ने कथित तौर पर 50 लाख रुपये की राशि को एससीपीपीएल को ट्रांसफर किया, जो कि एफसीआरए के तहत पंजीकृत नहीं है। एफसीआरए कानून के नियमों के तहत विदेशी चंदे से मिली राशि को गैर-एफसीआरए खातों में हस्तांतरित नहीं किया जा सकता। जांच के दौरान और भी कई तरह की विसंगतियां पाई गई हैं।
इसका जवाब देने के लिए उन्हें 15 दिन का समय दिया गया है। तीस्ता और उनके पति जावेद आनंद द्वारा चलाए जाने वाले एनजीओ सबरंग ट्रस्ट और सिटिजंस फॉर जस्टिस ऐंड पीस (सीजेपी) को दो दिन पहले नोटिस जारी किए गए।
मंत्रालय के अधिकारियों ने इस साल अप्रैल में इन दोनों संगठनों के दफ्तरों में जाकर उनके रिकॉर्ड और खातों की जांच की थी। इसके बाद ये नोटिस जारी किए गए हैं। सूत्रों ने बताया कि जांच में पाया गया कि दोनों एक मैगजीन 'कम्युनलिज्म कॉम्बैट' चलाते हैं और इसके सह-संपादक हैं। वे अपनी कंपनी सबरंग कम्युनिकेशंस ऐंड पब्लिशिंग प्राइवेट लिमिटेड के मुद्रक और प्रकाशक भी हैं।
उन्हें कथित रूप से विदेशी चंदा मिला है। विदेशी चंदा नियमन कानून के तहत किसी भी रजिस्टर्ड अखबार का कोई भी संवाददाता, कॉलम लिखने वाला, कार्टूनिस्ट, संपादक, मालिक, मुद्रक अथवा प्रकाशक विदेशी योगदान को स्वीकार नहीं कर सकता है।
दोनों का दूसरा एनजीओ सीजेपी है। यह गुजरात में 2002 में हुए दंगों के शिकार लोगों के मामलों को लड़ने में उनकी मदद करता रहा है। संगठन को 2008-09 से लेकर 2013-14 के बीच 1.18 करोड रुपये की विदेशी सहायता मिली है।
नोटिस के मुताबिक इसमें से 80 प्रतिशत से अधिक राशि यानी करीब 95 लाख रुपये कानूनी सहायता पर खर्च किए गए। एनजीओ का पंजीकरण जहां एक तरफ 'शैक्षणिक और आर्थिक कार्यों' के लिए किया गया था, वहीं इसे कानूनी सहायता जैसी गतिविधियों के लिए विदेशी सहायता प्राप्त हुई है, जो कि 'सामाजिक' कार्यों के तहत आती है। इस लिहाज से एनजीओ ने एफसीआरए नियमों का उल्लंघन किया है।
संगठन के बिल-चालान की जांच परख में पाया गया कि सबरंग ट्रस्ट ने विदेशी चंदों के लिए खोले गए खातों से सिटी बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को 12 लाख रुपये का भुगतान किया जो सीतलवाड़ और आनंद के क्रेडिट कार्ड की सुविधा के एवज में किया गया। गृह मंत्रालय के नोटिस में कहा गया है, 'एफसीआरए 2010 के प्रावधानों के तहत विदेशी सहायता का इस्तेमाल ऐसे काम के लिए किया गया जिसकी अनुमति नहीं है। इस लिहाज से इस असोसिएशन ने एफसीआरए कानून की धारा 8 (1) ए का उल्लंघन है।'
गृह मंत्रालय की जांच में यह भी पाया गया कि आनंद ने लाहौर की यात्रा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा पॉलिसी ली और इसके लिए धन सबरंग ट्रस्ट के खाते से चुकाया गया। यहां तक कि पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टी (पीयूसीएल) की बैठकों में भाग लेने के लिए किताबों और यात्रा पर जो खर्च किया गया उसे भी सबरंग ट्रस्ट के खातों में डाल दिया गया। यह भी कानून का उल्लंघन है।
मंत्रालय की जांच में यह भी पाया गया कि सबरंग ट्रस्ट ने कथित तौर पर 50 लाख रुपये की राशि को एससीपीपीएल को ट्रांसफर किया, जो कि एफसीआरए के तहत पंजीकृत नहीं है। एफसीआरए कानून के नियमों के तहत विदेशी चंदे से मिली राशि को गैर-एफसीआरए खातों में हस्तांतरित नहीं किया जा सकता। जांच के दौरान और भी कई तरह की विसंगतियां पाई गई हैं।
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