नई दिल्ली. टीम
इंडिया के तीन दिग्गज पूर्व क्रिकेटर अब बीसीसीआई की सलाहकार समिति में
होंगे। सचिन तेंडुलकर, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण को बीसीसीआई का
एडवाइजर बनाया गया है। बीसीसीआई के सचिव अनुराग ठाकुर ने ट्वीट कर यह
जानकारी दी है। उन्होंने लिखा, “वेलकम एंड थैंक्स सचिन तेंडुलकर, सौरव
गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण बीसीसीआई ज्वाइन करने के लिए। ये नई पारी की
शुरुआत है। हमें आपका मार्गदर्शन और सपोर्ट मिलेगा।” सूत्र बता रहे हैं कि
एडवाइजर के अलावा सचिन बैटिंग कोच की भी भूमिका अदा करेंगे।बीसीसीआई के
अध्यक्ष जगमोहन डालमिया ने कुछ समय पहले सौरव गांगुली को लेकर यह साफ किया
था कि वे जल्द ही बोर्ड के एडवाइजर बनेंगे। हालांकि, इससे पहले गांगुली के
टीम इंडिया का कोच बनने की अटकलें भी थीं।
तीनों दिग्गज क्या करेंगे?
बीसीसीआई के एडवाइजर बनने के बाद सचिन तेंडुलकर, सौरव गांगुली और
लक्ष्मण अब क्रिकेट से जुड़े मुद्दों पर बोर्ड को राय देंगे। तीनों
खिलाड़ियों की सलाहकार समिति ही तय करती है कि टीम का कोच और टीम चुनने
वाले सेलेक्टर कौन होगा।
डालमिया पहले से चाहते थे दिग्गज प्लेयरों का रोल
सचिन, गांगुली और लक्ष्मण ने लंबे समय तक देश के लिए बेहतरीन क्रिकेट
खेला है। इस संबंध में बीसीसीआई के चीफ जगमोहन डालमिया ने पहले भी कहा था
कि मेरा हमेशा से ये मानना रहा है कि क्रिकेट से जुड़े मुद्दे दिग्गज
खिलाड़ियों के हाथों में ही होने चाहिए।
दो महीने से हो रही कोच की तलाश
वर्ल्ड कप के बाद कोच डंकन फ्लेचर का कार्यकाल समाप्त हो गया था। तभी
से टीम इंडिया के कोच की तलाश की जा रही है। 10 जून से टीम इंडिया का
बांग्लादेश दौरा शुरू हो रहा है।
दिग्गजों को जोड़ने की किसने की कोशिशें?
डालमिया ही चाहते थे कि बोर्ड में तीन पूर्व खिलाड़ी बतौर सलाहकार
रहेंगे। इस संबंध में डालमिया ने हाल ही में बीसीसीआई सचिव अनुराग ठाकुर से
भी मुलाकात की थी।
और कौन था दौड़ में?
सचिन तेंडुलकर और सौरव गांगुली के अलावा राहुल द्रविड़ और रवि शास्त्री को भी सलाहकार बनाए जाने की चर्चा थी। बोर्ड गांगुली को कोच भी बनाना चाहता था। लेकिन अब वे सलाहकार बन गए हैं। वहीं, शास्त्री अब भी कोच बनने की दौड़ में बने रह सकते हैं।
द्रविड़ क्यों शामिल नहीं हुए और लक्ष्मण कैसे आए?
26 अप्रैल को बोर्ड की वर्किंग कमेटी की बैठक में सौरव, सचिन के अलावा राहुल द्रविड़ के नाम पर भी सहमति बनी थी। तब द्रविड़ ने कहा था कि आईपीएल उनके काफी व्यस्तता भरा रहा है। लिहाजा, वे बीसीसीआई के प्रस्ताव के बारे में आईपीएल के बाद ही विचार करेंगे। माना जा रहा है कि द्रविड़ ने प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। इसी वजह से वीवीएस लक्ष्मण के नाम पर सहमति बनी। द्रविड़ राजस्थान रॉयल्स के टीम मेंटर हैं।
तीनों को क्या जिम्मेदारियां मिल सकती हैं
और कौन था दौड़ में?
सचिन तेंडुलकर और सौरव गांगुली के अलावा राहुल द्रविड़ और रवि शास्त्री को भी सलाहकार बनाए जाने की चर्चा थी। बोर्ड गांगुली को कोच भी बनाना चाहता था। लेकिन अब वे सलाहकार बन गए हैं। वहीं, शास्त्री अब भी कोच बनने की दौड़ में बने रह सकते हैं।
द्रविड़ क्यों शामिल नहीं हुए और लक्ष्मण कैसे आए?
26 अप्रैल को बोर्ड की वर्किंग कमेटी की बैठक में सौरव, सचिन के अलावा राहुल द्रविड़ के नाम पर भी सहमति बनी थी। तब द्रविड़ ने कहा था कि आईपीएल उनके काफी व्यस्तता भरा रहा है। लिहाजा, वे बीसीसीआई के प्रस्ताव के बारे में आईपीएल के बाद ही विचार करेंगे। माना जा रहा है कि द्रविड़ ने प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। इसी वजह से वीवीएस लक्ष्मण के नाम पर सहमति बनी। द्रविड़ राजस्थान रॉयल्स के टीम मेंटर हैं।
तीनों को क्या जिम्मेदारियां मिल सकती हैं
सचिन के टीम इंडिया के बैटिंग कोच बनने के अलावा अभी यह पूरी तरह से
साफ नहीं हैं कि तीनों खिलाड़ियों की बोर्ड को सलाह देने, कोच-सेलेक्टर तय
करने के अलावा क्या जिम्मेदारियां होंगी।
मीडिया में अप्रैल से आ रही खबरों के मुताबिक बीसीसीआई के नए प्लान के तहत तीन सलाहकारों को ये जिम्मदारियां भी सौंपी जा सकती हैं-
1. हाई परफॉर्मेंस मैनेजमेंट : तीनों दिग्गजों से टीम इंडिया के परफॉर्मेंस पर फोकस करने को कहा जा सकता है। ये सुनिश्चित कराएंगे कि टीम का हर खिलाड़ी हर तरह के फाॅर्मेट में परफॉर्म करे।
इस रोल में कौन फिट : गांगुली सबसे फिट हैं। उनकी कप्तानी में टीम इंडिया ने 2000 से 2005 के बीच 49 टेस्ट खेले। 21 मैच टीम जीती थी। 13 में हार मिली थी और 14 ड्रॉ रहे थे। गांगुली ने वनडे में 147 मैचों में कप्तानी की थी। 76 में जीत दिलाई और 66 में हार मिली।
2. टैलेंट सिलेक्शन : इस पर नजर रखी जाएगी कि स्टेट टीमों में से कौन-से खिलाड़ी आने वाले वर्षों में टीम इंडिया में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
इस रोल में कौन फिट : वीवीएस लक्ष्मण को यह जिम्मेदारी मिल सकती है। लक्ष्मण कलात्मक बल्लेबाज रहे हैं। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में टीम को मजबूत डिफेंस दिया है। लंबे समय तक टिकने वाले तकनीकी रूप से मजबूत टैलेंट को चुनने की जिम्मेदारी उन्हें मिल सकती है। लक्ष्मण ने 134 टेस्ट में 46 के एवरेज से 8781 रन बनाए थे।
3. नेशनल क्रिकेट एकेडमी : यह एकेडमी उभरते हुए प्लेयर्स के लिए समय-समय पर कैम्प लगाती है।
इस रोल में कौन फिट : बैटिंग कोच के रूम में काम करने के अलावा सचिन तेंडुलकर को यह जिम्मेदारी मिल सकती है। वे खासकर बैट्समैन को हर तरह के पिच पर रन बनाने के लिए तैयार कर सकते हैं। सचिन ने 200 टेस्ट में 15921 और 463 वनडे में 18426 रन बनाए थे। उनके नाम दोनों फॉर्मेट में कुल 100 शतक हैं।
1. हाई परफॉर्मेंस मैनेजमेंट : तीनों दिग्गजों से टीम इंडिया के परफॉर्मेंस पर फोकस करने को कहा जा सकता है। ये सुनिश्चित कराएंगे कि टीम का हर खिलाड़ी हर तरह के फाॅर्मेट में परफॉर्म करे।
इस रोल में कौन फिट : गांगुली सबसे फिट हैं। उनकी कप्तानी में टीम इंडिया ने 2000 से 2005 के बीच 49 टेस्ट खेले। 21 मैच टीम जीती थी। 13 में हार मिली थी और 14 ड्रॉ रहे थे। गांगुली ने वनडे में 147 मैचों में कप्तानी की थी। 76 में जीत दिलाई और 66 में हार मिली।
2. टैलेंट सिलेक्शन : इस पर नजर रखी जाएगी कि स्टेट टीमों में से कौन-से खिलाड़ी आने वाले वर्षों में टीम इंडिया में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
इस रोल में कौन फिट : वीवीएस लक्ष्मण को यह जिम्मेदारी मिल सकती है। लक्ष्मण कलात्मक बल्लेबाज रहे हैं। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में टीम को मजबूत डिफेंस दिया है। लंबे समय तक टिकने वाले तकनीकी रूप से मजबूत टैलेंट को चुनने की जिम्मेदारी उन्हें मिल सकती है। लक्ष्मण ने 134 टेस्ट में 46 के एवरेज से 8781 रन बनाए थे।
3. नेशनल क्रिकेट एकेडमी : यह एकेडमी उभरते हुए प्लेयर्स के लिए समय-समय पर कैम्प लगाती है।
इस रोल में कौन फिट : बैटिंग कोच के रूम में काम करने के अलावा सचिन तेंडुलकर को यह जिम्मेदारी मिल सकती है। वे खासकर बैट्समैन को हर तरह के पिच पर रन बनाने के लिए तैयार कर सकते हैं। सचिन ने 200 टेस्ट में 15921 और 463 वनडे में 18426 रन बनाए थे। उनके नाम दोनों फॉर्मेट में कुल 100 शतक हैं।
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