इस्लामाबाद. पाकिस्तान के एक सांसद (सीनेटर) ने प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी की गिरफ्तारी पर एक अरब रुपए का इनाम रखा है। पाकिस्तान के
कब्जे वाले कश्मीर के रावलकोट में जमात-ए-इस्लामी प्रमुख सिराज उल हक ने
अपनी पार्टी के समर्थकों को संबोधित करते हुए सोमवार को यह एलान किया। हक
पाकिस्तानी संसद के ऊपरी सदन का सदस्य है।
हक ने क्या कहा?
हक ने कहा, "मैं मोदी से कहना चाहता हूं कि वह सलाउद्दीन को गिरफ्तार
नहीं कर सकते। हम तुम्हारे दांत तोड़ देंगे। तुम कहते हो कि सलाउद्दीन को जो
गिरफ्तार करेगा, उसको 50 करोड़ दोगे। लेकिन मैं कहता हूं जो मोदी को
गिरफ्तार करेगा, हम उसे एक अरब रुपए देंगे।" सलाउद्दीन आतंकवादी संगठन
हिज्ब उल मुजाहिदीन का सरगना है।
मोदी के खिलाफ बयान की क्या बताई वजह?
हक ने रावलकोट में कहा कि मोदी ही कश्मीर और गुजरात में लोगों की
हत्या के जिम्मेदार हैं। पाकिस्तान सरकार ने भी कश्मीर में लोगों पर हो रही
ज्यादती से मुंह मोड़ लिया है। भारत के साथ दोस्ती तभी होगी, जब कश्मीर
आजाद होगा।
कहां है रावलकोट?
रावलकोट पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में है। यहां भारत विरोधी कई समूह सक्रिय हैं। जम्मू के पुंछ से रावलकोट की दूरी 200 किलोमीटर से ज्यादा नहीं है।
कहां है रावलकोट?
रावलकोट पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में है। यहां भारत विरोधी कई समूह सक्रिय हैं। जम्मू के पुंछ से रावलकोट की दूरी 200 किलोमीटर से ज्यादा नहीं है।
पाकिस्तान में ही शुरू हुआ विरोध
बता दें कि हक के इस विवादित बयान पर उनके ही देश में विरोध शुरू हो
गया है। पाक पत्रकार मेहर तरार ने ट्वीट कर उन्हें नसीहत दी है कि वह इन
पैसों का इस्तेमाल अपने हल्के में अस्पताल व बच्चों के लिए स्कूल खोलने के
लिए करें।
'भारत सबसे बड़ा रोड़ा'
हक ने कश्मीर के मुद्दे पर कहा है कि भारत सरकार कश्मीर के लोगों की
आजादी में सबसे बड़ा रोड़ा है। वह पाकिस्तान की कभी दोस्त नहीं हो सकती और जो
लोग दोस्ती की बात करते हैं, उन्हें भारत चले जाना चाहिए।
पाकिस्तानी नेताओं को भी अंधा बताया
हक ने पाकिस्तानी नेताओं को भी आड़े हाथों लेते हुए उन्हें अंधा, बहरा
और गूंगा करार दिया। हक ने कहा कि पाक नेता कश्मीरियों की शहादत भूल चुके
हैं। कश्मीर का मुद्दा ‘बस डिप्लोमेसी’ और ‘फनकार डिप्लोमेसी’ से हल नहीं
जा किया जाएगा।
कौन है सिराज उल हक?53 साल का हक पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा सूबे में वरिष्ठ मंत्री रहा है। वह मार्च 2014 में जमात ए इस्लामी का अमीर यानी अध्यक्ष बना था। पाकिस्तान में जब पिछले साल इमरान खान और ताहिर उल कादरी ने नवाज शरीफ सरकार के खिलाफ आंदोलन किया था तब हक ने मध्यस्थता कर गतिरोध तोड़ा। इसके बाद से हक का पाकिस्तान की राजनीति में दबदबा और बढ़ गया। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के समूह हक को अगला अंतरिम प्रधानमंत्री बनाना चाहते हैं। हक वहां शरीयत लागू करना चाहता है।
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