कुंडली अध्ययन की कड़ी में अब जानिए मेष लग्न की जन्मपत्रिका में गुरु यदि सप्तम और अष्टम भाव में हो तो व्यक्ति को क्या-क्या फल प्राप्त होते हैं-
मेष लग्न की कुंडली में सप्तम भाव में गुरु हो तो...
यदि किसी व्यक्ति की कुंडली मेष लग्न की है और उसमें गुरु सप्तम भाव में हो तो व्यक्ति का विवाहित जीवन कष्टों में व्यतीत होता है। सप्तम भाव तुला राशि का स्वामी ग्रह शुक्र है। इस स्थान पर गुरु होने से व्यक्ति को स्त्री के पक्ष के संबंध में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा धन प्राप्त करने में भी कई कठिनाइयां आती हैं। इसके बाद ये लोग कड़ी मेहनत से भी सीमित धन ही प्राप्त कर पाते हैं। इनके खर्चों की अधिकता रहती है। गुरु के प्रभाव से इनका चेहरा सुंदर और आकर्षक रहता है। इसी वजह से ये लोग घर और समाज में प्रभावशाली रहते हैं। भाई-बहनों के संबंध में सुख की प्राप्ति होती है।
मेष लग्न की कुंडली में अष्टम भाव में गुरु हो तो...
मेष लग्न की कुंडली में आठवां घर मृत्यु और पुरातत्व स्थान का कारक भाव है। अष्टम भाव वृश्चिक राशि का स्वामी ग्रह मंगल है। मंगल की राशि में गुरु हो तो व्यक्ति को भाग्य का साथ प्राप्त नहीं हो पाता है। कड़ी मेहनत के बाद भी सकारात्मक परिणाम प्राप्त नहीं हो पाते। इन लोगों खर्चें काफी अधिक रहते हैं। परिवार में हमेशा ही कुछ न कुछ कार्य ऐसे होते रहते हैं जिनसे पैसों की तंगी बनी रहती है। आयु भाव में गुरु होने पर व्यक्ति की आयु अच्छी रहती है। इन लोगों का जीवन सामान्य ही रहता है। इसके अलावा इन्हें माता से भरपूर सुख प्राप्त होता है। भूमि-भवन संबंधी कार्य लाभदायक रहते हैं।
आगे जानिए मेष लग्न की कुंडली में नवम एवं दशम भाव में गुरु हो तो व्यक्ति के जीवन पर क्या-क्या प्रभाव पड़ते हैं?
मेष लग्न की कुंडली में सप्तम भाव में गुरु हो तो...
यदि किसी व्यक्ति की कुंडली मेष लग्न की है और उसमें गुरु सप्तम भाव में हो तो व्यक्ति का विवाहित जीवन कष्टों में व्यतीत होता है। सप्तम भाव तुला राशि का स्वामी ग्रह शुक्र है। इस स्थान पर गुरु होने से व्यक्ति को स्त्री के पक्ष के संबंध में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा धन प्राप्त करने में भी कई कठिनाइयां आती हैं। इसके बाद ये लोग कड़ी मेहनत से भी सीमित धन ही प्राप्त कर पाते हैं। इनके खर्चों की अधिकता रहती है। गुरु के प्रभाव से इनका चेहरा सुंदर और आकर्षक रहता है। इसी वजह से ये लोग घर और समाज में प्रभावशाली रहते हैं। भाई-बहनों के संबंध में सुख की प्राप्ति होती है।
मेष लग्न की कुंडली में अष्टम भाव में गुरु हो तो...
मेष लग्न की कुंडली में आठवां घर मृत्यु और पुरातत्व स्थान का कारक भाव है। अष्टम भाव वृश्चिक राशि का स्वामी ग्रह मंगल है। मंगल की राशि में गुरु हो तो व्यक्ति को भाग्य का साथ प्राप्त नहीं हो पाता है। कड़ी मेहनत के बाद भी सकारात्मक परिणाम प्राप्त नहीं हो पाते। इन लोगों खर्चें काफी अधिक रहते हैं। परिवार में हमेशा ही कुछ न कुछ कार्य ऐसे होते रहते हैं जिनसे पैसों की तंगी बनी रहती है। आयु भाव में गुरु होने पर व्यक्ति की आयु अच्छी रहती है। इन लोगों का जीवन सामान्य ही रहता है। इसके अलावा इन्हें माता से भरपूर सुख प्राप्त होता है। भूमि-भवन संबंधी कार्य लाभदायक रहते हैं।
आगे जानिए मेष लग्न की कुंडली में नवम एवं दशम भाव में गुरु हो तो व्यक्ति के जीवन पर क्या-क्या प्रभाव पड़ते हैं?

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