हिन्दू संस्कृति के अनुसार यह माना जाता है कि मौत के बाद मनुष्य को अपने कर्मों के अनुसार स्वर्ग और नर्क में भेजे जाने का विधान है। शुभ काम करने वाले को स्वर्ग मिलता है और बुराक काम करने वालों को नर्क में जाना पड़ता है। लेकिन किन लोगों को स्वर्ग में जाना पड़ता है और किन्हें नर्क में इस बात का सपष्ट उल्लेख हमारे धर्म ग्रंथों में मिलता है।
एक श्लोक के अनुसार
तेषां में वैष ब्रह्मलोको येषां, तपो ब्रह्मचर्य येषु सत्यं प्रतिष्ठितम् ।
जिनमें तप ब्रह्मचर्य है, सत्य प्रतिष्ठित है, उन्हें ब्रह्मलोक मिलता है । जिनमें न तो कुटिलता है और न मिथ्या आचरण है और न कपट है, उन्हीं को विशुद्ध ब्रह्मलोक मिलता है। गरुड़ पुराण के अनुसार
- सच, तपस्या, क्षमा, दान और वेदशास्त्रों के स्वाध्याय द्वारा धर्म का अनुष्ठान करते हैं। वे स्वर्ग में जाते हैं।
- कुआं, बावड़ी, तालाब, प्याऊ, आश्रम व देवमंदिर बनाने वाले।
- होम, जप, स्नान, और देवताओं के पूजप में सदैव लोग रहते हैं। ऐसे लोग स्वर्ग में जाते हैं।
- ऐसे लोग जो शत्रुओं के दोष भी कभी नहीं कहते है बल्कि उनके गुणों का ही वर्णन करते हैं।
- जो लोग मन और इन्द्रियों के नियमन में लगे रहते हैं। शोक भय व क्रोध से रहित।
- जो प्राणिमात्र पर दया करते हैं। जिन पर सब विश्वास करते हैं।
- एकांत स्थान पर किसी को देखकर जो कामवासना मन में नहीं लाता।
- गृह, अन्न, और रस आदि को जो स्वयं उत्पन्न कर दान करते हैं।
- ऐसे लोग जो सोने का, गाय का , अन्न व वस्त्र का दान देते हैं।
- जो परधन का लालच नहीं रखते हैं।
- धर्म से प्राप्त धन का उपयोग कर जीविका चलाते हैं। वे स्वर्ग को प्राप्त करते हैं।
एक श्लोक के अनुसार
तेषां में वैष ब्रह्मलोको येषां, तपो ब्रह्मचर्य येषु सत्यं प्रतिष्ठितम् ।
जिनमें तप ब्रह्मचर्य है, सत्य प्रतिष्ठित है, उन्हें ब्रह्मलोक मिलता है । जिनमें न तो कुटिलता है और न मिथ्या आचरण है और न कपट है, उन्हीं को विशुद्ध ब्रह्मलोक मिलता है। गरुड़ पुराण के अनुसार
- सच, तपस्या, क्षमा, दान और वेदशास्त्रों के स्वाध्याय द्वारा धर्म का अनुष्ठान करते हैं। वे स्वर्ग में जाते हैं।
- कुआं, बावड़ी, तालाब, प्याऊ, आश्रम व देवमंदिर बनाने वाले।
- होम, जप, स्नान, और देवताओं के पूजप में सदैव लोग रहते हैं। ऐसे लोग स्वर्ग में जाते हैं।
- ऐसे लोग जो शत्रुओं के दोष भी कभी नहीं कहते है बल्कि उनके गुणों का ही वर्णन करते हैं।
- जो लोग मन और इन्द्रियों के नियमन में लगे रहते हैं। शोक भय व क्रोध से रहित।
- जो प्राणिमात्र पर दया करते हैं। जिन पर सब विश्वास करते हैं।
- एकांत स्थान पर किसी को देखकर जो कामवासना मन में नहीं लाता।
- गृह, अन्न, और रस आदि को जो स्वयं उत्पन्न कर दान करते हैं।
- ऐसे लोग जो सोने का, गाय का , अन्न व वस्त्र का दान देते हैं।
- जो परधन का लालच नहीं रखते हैं।
- धर्म से प्राप्त धन का उपयोग कर जीविका चलाते हैं। वे स्वर्ग को प्राप्त करते हैं।

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