Saturday, 24 September 2011

इन 3 अक्षरों का करिश्मा.. टाल देता है मृत्यु

जीवन में सुखों की चाहत कभी-कभी मन-मस्तिष्क पर इतनी हावी होती है कि स्वार्थ, हित और जरूरतों की खातिर इंसान अच्छे-बुरे कर्म का फर्क याद नहीं करना चाहता। किंतु अंतत: बुरे कर्म से पैदा दोष, कमियां या कमजोरी उसे मृत्यु या मृत्यु के समान दु:ख देती है। यही कारण है कि शास्त्र कहते हैं कि अच्छाई ही जीवन ही नहीं मृत्यु के बाद भी अमर बनाने वाली होती है।

बहरहाल, कर्म गति से जीवन पर आए संकट या मृत्यु तुल्य दु:खों से छुटकारे के धार्मिक उपायों की बात करें तो धर्मग्रंथों में काल के अधिपति भगवान शिव की उपासना अटल मृत्यु को भी टालने वाली मानी गई है। विशेष रूप से शिव का महामृत्युंञ्जय स्वरूप पापमुक्ति और मृत्युरहित या मृत्यु के समान दु:खों को दूर करने वाला माना गया है।

शिव के इस अद्भुत स्वरूप की शक्ति उपासना के लिए मृत्युञ्जय मंत्र अचूक माना गया है। विशेष रूप से तीन अक्षरी मृत्युञ्जय मंत्र का स्मरण मृत्यु और दरिद्रता से छुटकारा देने वाला माना गया है। इसलिए इसे अमृतेश भी पुकारा जाता है।

यही कारण है कि जीवन में संकट, रोग या दु:खों के दौर में भगवान शिव के यहां बताए जा रहे मंत्र का ध्यान यथासंभव नियमित रूप से शिव पूजा के साथ जरूर करें -

- सुबह स्नान के बाद घर पर शिव की महामृत्युञ्जय स्वरूप की प्रतिमा या शिवमंदिर में शिवलिंग को गंगाजल या दूध से स्नान के बाद गंध, अक्षत, बिल्वपत्र, धतुरा अर्पित कर पूजा व शिव आरती करें। कुश के आसन पर पूर्व दिशा में मुख कर बैठ नीचे लिखे तीन अक्षरी महामृत्युञ्जय मंत्र का रुद्राक्ष की माला से 108 बार स्मरण करें -

ऊँ जुं स:

- किस कारणवश मंत्र जप न कर पाएं तो मन ही मन इस मंत्र का स्मरण भी रोग, भय व मृत्यु योग को टालने में असरदार माना गया है।

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