रमेश की मौत हो चुकी है, पर उनके अंग आज भी जीवित हैं। उनके जीने की गवाही दे रहे हैं। उनकी मौत ने दूसरों को जिंदगी दे दी है। आज उनके दिए अंग की बदौलत कई लोग खुशहाल जीवन जी रहे हैं।
आगरा में कई लोगों ने अपने लीवर और आंख आदि को दान में दे दिया था। उनकी मौत के बाद जब अंगदान की बारी आई तो परिवार ने विरोध किया। लेकिन उनकी अंतिम इच्छा के आगे किसी की नहीं चली। आखिरकार उनके अंग अन्य लोगों में प्रत्यारोपित किए गए।
आंकड़ों के मुताबिक, पिछले दो साल में आगरा में 36 लोगों ने किडनी की दान की है। यह किडनी उन्होंने अपने रिश्तेदारों या फिर सगे संबंधियों को दी है।
गौरतलब है कि अंग प्रत्यारोपण कमिश्नर और डॉक्टरों की अनुमति अनिवार्य है। ऐसे में मृतक व्यक्ति के अंग इनकी अनुमती के बाद ही प्रत्यारोपित किए जाते हैं। इसमें करीब 15 से 18 लाख रुपये का खर्चा आता है।
आगरा में कई लोगों ने अपने लीवर और आंख आदि को दान में दे दिया था। उनकी मौत के बाद जब अंगदान की बारी आई तो परिवार ने विरोध किया। लेकिन उनकी अंतिम इच्छा के आगे किसी की नहीं चली। आखिरकार उनके अंग अन्य लोगों में प्रत्यारोपित किए गए।
आंकड़ों के मुताबिक, पिछले दो साल में आगरा में 36 लोगों ने किडनी की दान की है। यह किडनी उन्होंने अपने रिश्तेदारों या फिर सगे संबंधियों को दी है।
गौरतलब है कि अंग प्रत्यारोपण कमिश्नर और डॉक्टरों की अनुमति अनिवार्य है। ऐसे में मृतक व्यक्ति के अंग इनकी अनुमती के बाद ही प्रत्यारोपित किए जाते हैं। इसमें करीब 15 से 18 लाख रुपये का खर्चा आता है।
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