Wednesday, 28 September 2011

पांच रंगों की विश्व की इस सबसे खूबसूरत नदी के बारे में जानकर हैरान रह जाएंगे आप

प्रकृति अपने अलौकिक और अद्भुत रूप से जब परिचय कराती है तो उसकी खूबसूरती को व्यक्त करने के लिए हर शब्द के अर्थ बौने नजर आने लगते हैं। अद्भुत और नैसर्गिक खूबसूरती को समेटे प्रकृति का अभिन्न अंग करिस्टेल्स नदी ऐसी ही है। दक्षिण अमेरिका के कोलंबिया शहर में स्थित इस नदी को अद्भुत रूप से रंगीन होने के कारण 'पांच रंगों की नदी' कहा जाता है।

दुनिया के सबसे खूबसूरत नदियों में शुमार करिस्टेल्स में वर्षा ऋतु में पानी का बहाव तेज और गहरा होता है। जबकि गर्मी की ऋतु में इतना पानी नहीं होता कि ये चमकदार खूबसूरत नजारे दिख सकें। लेकिन इन ऋतुओं के बीच जब पानी का लेवल सही होता है तो पानी में मौजूद विभिन्न शैवाल और काईयां खिलकर नदी की खूबसूरती में चार चांद लगा देती हैं। और नदी खूबसूरत रंगीन दिखने लगती है।

नदी का वह हिस्सा जहां ये रंगीन खूबसूरत नजारे खिलते हैं, सड़क के जरिए नहीं पहुंचा जा सकता है। साहसी टूरिस्ट ला मैकरिना तक फ्लाइट के जरिए आते हैं उसके आगे का सफर पैदल तय करते हैं। नदी का दर्शनीय स्थल टूरिस्टों के लिए गुरिल्ला गतिविधियों के चलते बंद कर दिया गया था। हलांकि 2009 में इसको फिर खोल दिया गया।

इंसान के रूप में भगवान ने लिया जन्म? आज भी पूजते हैं लोग

बात तीन साल पुरानी है। नोयडा के सैनी गांव में एक बच्ची ने जन्म लिया। पर इस बच्ची के पैदा होते ही पूरे गांव में हड़कम्प मचगई। दूर दूर से लोग इकठ्ठे होने लगे। दरअसल यह बच्ची कोई सामान्य शिशु नहीं है। इसके एक नहीं तीन मुंह है। इस तरह का विचित्र शिशु हजारों, लाखों में नहीं करोड़ों में एक होता है।


हिन्दु धर्म की मान्यता के अनुसार, अधिकांश देवता कई मुख वाले होते हैं। जैसे पंचमुखी गणेश, पंचमुखी शिव और त्रिमुखी विष्णु। गांव वालों की मान्यता है कि यह लड़की इंसान नहीं भगवान है। इस लड़की को गांव में ही नहीं पूरे देश में पूजा जाने लगा। आज भी लड़की मां बाप ने इसक ऐसे ही रखा है। लड़की बड़ी हो रही है, लेकिन इसको पूरे गांव में लक्ष्मी मानकर पूजा की जाती है।


स्थानीय डॉक्टर के मुताबिक, यह वैज्ञानिक कारण है। स्त्री पुरूष के गुण सूत्रों में कुछ भेद होने की वजह से ऐसा होता है। वैसे ऐसे केस करोड़ों में एक होते हैं। ड़ॉक्टरों ने लड़की के ऑपरेशन की सलाह दी थी, लेकिन मां-बाप ने मना कर दिया।

Tuesday, 27 September 2011

वैशाली का विशाल कारनामा सुन कोई भी दंग रह जाएगा!


जयपुर.आर्किटेक्ट के प्रोफेशन में कई बार पुरुषों ने यह महसूस करवाया कि अकेली महिला कुछ नहीं कर सकती। यह अहसास सेक्टर 6 की वैशाली मास्टर के लिए प्रेरणा बन गया।

उन्होंने अकेले बाइक पर सफर करते हुए महिलाओं को स्वावलंबी बनाने का संदेश देने का निश्चय किया। किंग्स रोड स्थित पद्मावती कॉलोनी-प्रथम में रहने वाली 41 वर्षीय वैशाली प्रोफेशन से आर्किटेक्ट हैं। 16 सितंबर को पहली बार वे मोटरसाइकिल से जयपुर से गुजरात के लिए सुबह 6.15 बजे रवाना हुईं।

जयपुर से भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, अहमदाबाद, वडोदरा फिर सूरत पहुंची। सूरत से वापस वड़ोदरा, अहमदाबाद, राजकोट, वीरपुर, मेहसाणा, सामलाजी, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा होते हुए वे 21 सितंबर को जयपुर पहुंचीं।

उन्होंने बताया कि 6 दिन में लगभग 2,600 किलोमीटर की यात्रा तय की। 2011 महिला सशक्तीकरण वर्ष होने के कारण उन्होंने यह संकल्प लिया था।

इस संकल्प को पूरा करते हुए इन्होंने गांव-गांव, छोटे कस्बों से होते हुए महिलाओं में जाग्रति, स्वावलंबी, आत्मनिर्भर और स्त्रियों को शिक्षित करने का संदेश देते हुए यह यात्रा तय की।

यह सीन देख तड़प जाएंगे आप, लेकिन इन्हें नहीं आई शर्म - What kind of Police: 12-year-old boy hijacked a se - www.bhaskar.com

यह सीन देख तड़प जाएंगे आप, लेकिन इन्हें नहीं आई शर्म -

इंदौर।दृश्य एक:दोपहर 12.25 बजे मालवा एक्सप्रेस ट्रेन प्लेटफार्म नंबर 5 से रवाना होने वाली थी।
दृश्य दो:दोपहर 12.30 बजे ट्रेन प्लेटफार्म से छूटने लगी। तभी ट्रेन की दूसरी ओर पानी के पाइप पर बैठे लगभग 40 साल के एक व्यक्ति ने मौत की छलांग लगा दी। उसका सिर धड़ से अलग हो गया। धड़ पटरी पर था तो सिर पटरी किनारे नाली में पड़ा था।
दृश्य तीन:लाश को देख वहां खड़े लोगों की रुह कांप उठी। एक घंटे बाद तक लाश वहीं पड़ी रही।
दृश्य चार :सूचना के करीब डेढ़ बजे जीआरपी थाने के हेडकांस्टेबल अशोक यादव प्लेटफार्म पर पहुंचे। उन्होंने स्वीपर को तलाश किया लेकिन कोई नहीं मिला। प्लेटफार्म पर 12 साल के एक बच्चे फिरोज पिता शेख रईस पर उनकी नजर पड़ी। उसे बुलाकर उन्होंने कहा कि 100 रुपए दूंगा उसकी जेब टटोल दे।
दृश्य पांच:फिरोज गुमसुम सा कुछ सोचता रहा. फिर रुपए की बात पर मान गया। बेमन से लहूलुहान लाश के कपड़ों की जेब टटोलने लगा। उसकी जेब से रुमाल और पर्स मिला जिसे बच्चे ने हेड साब यादव को दे दिया। लेकिन उसकी शिनाख्त नहीं हो सकी। बात आई लाश उठाने की।
दृश्य छह:हेडसाब यादव तीन लड़कों को लेकर आए। लेकिन उनमें से किसी की हिम्मत कटा सिर उठाने की नहीं हुई। हेड साहब ने फिर रईस की तरफ देखा और कहा - जा, तू सिर उठाकर बॉडी के पास रख दे। वह घबरा गया.. कुछ कहना चाह रहा था लेकिन हेड साहब की घुड़की और शायद 100 रुपए की जरूरत ने उसे पटरी पर कूदने को मजबूर कर दिया।
दृश्य सात:फिरोज ने कांपते हाथों से कागज उठाया और सिर के पास हाथ ले जाते ही अचानक वह रुक गया। फिर आंखें भींचते हुए उसने कटा सिर हाथ में उठा लिया। ये देख प्लेटफार्म और आसपास खड़े लोग सन्न रह गए।
दृश्य आठ :वह धीरे-धीरे लाश की ओर कदम बढ़ाता गया। कटे सिर का खून उसके पैरों पर टपक रहा था। आखिर उसने सिर धड़ से मिला दिया और भागकर प्लेटफार्म पर चढ़ गया।
दृश्य नौ :हेड साहब यादव लाश को पीएम के लिए ले जाने लगे तो अचानक पीछे से छोटे-छोटे हाथ यादव की कमर पर लगे। वह यादव को रोकने के लिए इशारा कर रहे थे। फिरोज ने उनसे रुपए मांगे। लेकिन उन्होंने अनसुना कर दिया। फिर फिरोज ने कहा साहब 100 रुपए दे दो..तुमने ही ने तो कहा था कि सिर उठाकर रख दे। मैंने रख दिया। अब मुझे पैसे तो दे दो।
दृश्य दस:हेड साब के पीछे-पीछे फिरोज थाने पहुंच गया। थाने में कहा कि मुझे 100 रुपए देने का कहा था ,नहीं मिले। मुझे रुपए कौन देगा। वहां तैनात सिपाहियों ने उसे भगा दिया।
सुनकर दु:ख हुआ
घटना सुनकर मुझे दु:ख हुआ है। मुझे इस बारे में जानकारी नहीं थी। यादव दोषी है तो उसको सजा देने का अधिकार मेरे पास नहीं है। बड़े अधिकारी इस मामले में विचार करेंगे। वैसे बाडी उठाना और उसे पीएम के लिए अस्पताल पहुंचाना आरपीएफ का काम है लेकिन रेलवे पुलिस मानवता के नाते यह काम भी करती है।
- टीआई बलविंदरसिंह संधू,जीआरपी थाना
सस्पेंड करने के निर्देश
हेड कांस्टेबल यादव के इस घिनौने कृत्य के लिए उसे सस्पेंड करने के निर्देश निकाल दिए गए हैं।
- आर.के. गुप्ता, आईजी रेलवे पुलिस

Saturday, 24 September 2011

फिर भीग गई आंखें मेरी….

ये पंक्तियां देश के हर उस दुश्मन
के नाम हैं जो सोच रहा है हम कमज़ोर
हैं..हम
बेबस हैं ..जो नापाक कोशिशें करता
जा रहा है..!..अब समय है किसी पर
विश्वास न
करने का..अब समय है खुद इन्साफ
करने का…!
लाहौर से आए
कुछ बादलों की बूंदों ने
आज भिगोया है.
मेरे वतन के साए में आ कर
उन्होंने अंगडाई ली है.
कुछ दूर की कहानियों ने
फिर विश्वास किया है.
रफ्तार तेज़ है तो क्या?
सुकूं का हक उन्हें भी है.
बुलंदियां दूर हैं तो क्या?
ज़मीं का हक उन्हें भी है.
ईमान अब बिक गया तो क्या?
सर उठाने का हक़ उन्हें भी है.
मर मर के जी लिए तो क्या?
दर्द में छलकना उन्हें भी है.
अफ़सोस है मुझे-औ-ताज्जुब भी
आज बादल बरसे फ़िर भी-
पतझड़ की खामोशी है.
रिम झिम बूंदों में नमीं नहीं,
बस बेरुखी की सरगोशी है.
रोक सकता तो रोक लेता उनको,
बांहों से अपनी पोंछ देता उनको,
कोहरे की धुंध जब उड़ने लगती-
सूरज की लौ दिखा देता उनको.
पर मासूम है मेरा हर एक ख्याल,
जो अमन के अवशेष है,
नज़रों में नई सेहर लिए,
नई रौशनी का संदेश ढूढता है.

ल्ड कोस्ट- धूप नहाए पुरसुकून बीच


यह सचमुच आस्ट्रेलिया का सुनहरा तट है, एक और बहुत सुन्दर शहर। कोई 70 किमी. का विशाल समुद्री तट और साल में लगभग 300 दिन धूप से नहाए पुरसुकून बीच। दूर-दूर तक प्रशान्त महासागर का विस्तार। आसमान छूती अट्टालिकाएँ, जिनमें 77वीं मंजिल तक रिहायश वाले क्यू-1 टावर की 78वीं मंजिल से जो विराट और दिव्य दर्शन होते हैं तो पता चलता है कि इस शहर का नाम ‘गोल्ड कोस्ट’ क्यों पड़ा। 78वीं मंजिल की जिस खिड़की पर हम खड़े हैं उस पर लिखा है- ‘नजर की सीध में 16,083 किमी. दूर न्यूयार्क है’। वाह, क्या बात है!
एक तरफ गगनचुम्बी इमारतें और दूसरी तरफ अथाह जलराशि। धूप में नहाया समुद्र तट, सुनहरी रेत और ‘बीच-गार्डस’की सतर्क निगाहों की सुरक्षा में लहरों से खेलते सैलानी। हर साल एक करोड़ से ज्यादा पर्यटक गोल्ड कोस्ट आते हैं और उनमें भारतीयों की भी अच्छी खासी संख्या है। गोल्ड कोस्ट की सड़कों पर घूमते हुए हमें ‘शेर-ए-पंजब’, ‘इण्डियन फैमिली रेस्त्रां’, ‘ऊँ-इण्डिया हाउस’, ‘तन्दूरी हट’, ‘तन्दूरी प्लेस’ जैसे नाम-पट दिखाई देते हैं। ‘राज पैलेस’ में व्यास (पंजाब) से आई सिमी हमें खाना परोसती हैं तो उसकी लहराती लम्बी चोटी गोल्ड-कोस्ट में भारतीय ध्वज जैसी लहराती है। होटल के बाहर दीवार पर पोस्टर लगे हैं- ‘फॉर सेल’, निजी क्रूज की बिक्री की सूचना। सबसे सस्ता क्रूज चार मिलियन आस्ट्रेलियन डालर (करीब 20 करोड़ रु.) का है। हमारे स्थानीय साथी ग्रेग हमारे चौंकने पर हँसते हैं- ‘यहाँ आस्ट्रेलिया के सबसे अमीर लोग बसते हैं। शायद यह इसलिए भी गोल्ड-कोस्ट है!’
गोल्ड कोस्ट आने से पहले हम एक दिन ब्रिसबेन रुके थे, क्वींस लैण्ड प्रान्त की राजधानी, एक और खूबसूरत शहर, जहाँ इसी नाम की नदी शहर के बीच में बहती है जिस पर सिडनी हार्बर ब्रिज जैसी ऐतिहासिकता वाला स्टोन ब्रिज तो है ही, नदी के भीतर से गुजरने वाली टनल-रोड भी है। ब्रिसबन के इर्द-गिर्द बहुत से पर्यटक स्थल हैं लेकिन हमें करीब एक सौ किमी. दूर गोल्ड कोस्ट जाते हुए सिर्फ दो जगह रुकना था।
पहले आस्ट्रेलिया जू जिसके स्वस्थ्य पशु-पक्षियों, चुस्त कर्मचारियों और सनसनीखेज प्रदर्शनों को देखकर बरबस ही अपने अव्यवस्थित चिड़ियाघरों के मरियल जनवरों और बेहाल कर्मचारियों की याद हो आती है। लेकिन आस्ट्रेलिया जू का जिक्र होते ही सबसे पहले स्टीव इरविन याद आते हैं। सन् 2008 में ग्रेट बैरियर रीफ में शूटिंग के दौरान स्टिंग-रे के जहरीले दंश से स्टीव इरविंग की दर्दनाक मृत्यु नहीं हुई होती तो मार्च 2011 में आस्ट्रेलिया जू में हम उनसे मिलकर निश्चय ही गदगद होते। डिस्कवरी चैनल के जरिए अपने दुस्साहसिक कारनामों से विश्वविख्यात हुए स्टीव की मौत भारत में भी सुर्खियां बनी थी। आस्ट्रेलिया जू में हमें मगरमच्छों के साथ खेलते-हँसते स्टीव के पोस्टर ही पोस्टर दिखाई देते हैं। स्टीव की देखरेख में ही आस्ट्रेलिया जू को विश्वख्याति मिली, जहाँ आज भी उनके सहयोगी मगरमच्छों के साथ सनसनीखेज प्रदर्शन करते-कराते हैं।
गोल्ड कोस्ट के रास्ते का दूसरा पड़ाव था -ड्रीम लैण्ड, स्वप्न लोक जैसा ही। रहस्य-रोमांच और सनसनी से भरे मनोरंजन के एक से एक साधन। हम तो सिर्फ एक ‘टॉवर ऑफ टेरर’ का आनन्द लेकर ही आतंकित हो बैठे। जानते हैं क्या? खुली कारनुमा एक डिब्बा हमें ‘एल’ आकार की पटरी पर 160 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से 115 मीटर (38 मंजिल जितना ऊँचे) ऊपर ले गया, सिर्फ सात सेकण्ड में और उतनी ही तेजी से नीचे ले आया! हमारे मुँह से तो चीख भी न निकली थी। अब तक सोचकर सिहरन हो रही है, लेकिन वहाँ ऐसी कई सनसनियां थीं और उनका लुत्फ उठाते युवाओं की लम्बी कतारें लगीं हुई थीं।
बहरहाल, गोल्ड कोस्ट से हमारी वतन वापसी होती है।

समस्त पितरों को नमन

सर्वपितृ अमावस्या पितरों को विदा करने की अंतिम तिथि होती है। 15 दिन पितृ घर में विराजते हैं और हम उनकी सेवा करते हैं। सर्वपितृ अमावस्या के दिन सभी भूले-बिसरे पितरों का श्राद्ध कर उनसे आशीर्वाद की कामना की जाती है। सर्वपितृ अमावस्या के साथ ही 15 दिन का श्राद्ध पक्ष खत्म हो जाता है। आश्विन कृष्ण पक्ष की समाप्ति के बाद अगले दिन से नवरात्र प्रारंभ होते हैं। सर्वपितृ अमावस्या पर हम अपने उन सभी प्रियजनों का श्राद्घ कर सकते हैं, जिनकी मृत्यु की तिथि का ज्ञान हमें नहीं है।

भारतीय पंचांग के अनुसार तिथि महत्त्वपूर्ण होती है। यही वजह है कि श्राद्ध दिनांक के बजाय तिथि पर किया जाता है। जैसे किसी व्यक्ति की मृत्यु जिस दिनांक को हुई है उस दिन क्या तिथि थी, यह ध्यान रखा जाता है। 15 दिन में यह सभी तिथियां आती हैं, तब पंचमी, षष्ठी, सप्तमी आदि जो भी तिथि प्रियजन की होती है उस दिन, उस व्यक्ति का श्राद्ध कर्म किया जाता है। किसी कारणवश अगर प्रियजन का श्राद्ध उस तिथि पर नहीं कर सके, तो सर्वपितृ अमावस्या के दिन उनका श्राद्घ कार्य किया जा सकता है।

27 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या है। भारतीय ज्योतिष के अनुसार कन्या राशि में विराजमान सूर्य, शुक्र, बुध, शनि और चंद्रमा के साथ मौजूद है। इन ग्रहों के एक साथ बैठने से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि अमावस्या को हमारे देवता और पितृ एक साथ बैठते हैं और पृथ्वी पर किए गए श्राद्घ में जो कुछ भी दान-पुण्य होता है, उसे तुरन्त स्वीकार करते हैं। वैसे भी हर महीने आने वाली अमावस्या हमारे ऋषियों ने पितृ के लिए दान-पुण्य करने के लिए ही तय कर रखी है।

किस प्रकार के ब्राह्मण श्राद्घ स्वीकार करने के योग्य हैं-
वेदों के ज्ञाता, श्रोत्रिय, मंत्र आदि का विशिष्ट ज्ञान रखने वाले ब्राह्मण श्राद्घ ग्रहण करने के योग्य माने जाते हैं। इन्हें ही भोजन कराने या दान देने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। भान्जे को भी भोजन कराया या दान दिया जा सकता है। मान्यता है कि एक भान्जा सौ बामन के बराबर होता है। रोगी, विकलांग, मांसाहारी, शराबी, चरित्रहीन, कुत्सित कर्म में जुटे तथा अवैष्णव को श्रद्घ में बुलाना अनुचित है। पितृ इनको श्राद्घ फल ग्रहण करते देख कष्ट पाते हैं।

पितृकार्य में तिलों का प्रयोग ही उचित माना गया है। श्राद्घ कार्य में निमंत्रित ब्राह्मणों को मौन होकर भोजन करना चाहिए। भोजन लोहे के बर्तनों में नहीं खिलाना चाहिए। श्राद्घ करने वाले को सफेद वस्त्र ही पहनना चाहिए। साथ ही बैंगन की सब्जी भोजन में नहीं होनी चाहिए। सर्वपितृ श्राद्घ अपराह्न् में ही किया जाता है। साथ ही श्राद्घ करने वाले परिवार को प्रसन्नता एवं विनम्रता के साथ भोजन परोसना चाहिए। संभव हो तो जब तक ब्राह्मण भोजन ग्रहण करें, तब तक पुरुष सूक्त तथा पवमान सूक्त आदि का जप होते रहना चाहिए। भोजन कर चुके ब्राह्मणों के उठने के पश्चात श्राद्घ करने वाले को अपने पितृ से इस प्रकार प्रार्थना करनी चाहिए-

दातारो नोअभिवर्धन्तां वेदा: संततिरेव च॥
श्रद्घा च नो मा व्यगमद् बहु देयं च नोअस्तिवति।

अर्थात पितृगण! हमारे परिवार में दाताओं, वेदों और संतानों की वृद्घि हो, हमारी आप में कभी भी श्रद्घा न घटे, दान देने के लिए हमारे पास बहुत संपत्ति हो।
इसी के साथ उपस्थित ब्राह्मणों की प्रदक्षिणा के साथ उन्हें दक्षिणा आदि प्रदान कर विदा करें। श्राद्घ करने वाले व्यक्ति को बचे हुए अन्न को ही भोजन के रूप में ग्रहण कर उस रात्रि ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना चाहिए। श्राद्घ प्राप्त होने पर पितृ, श्राद्घ कार्य करने वाले परिवार में धन, संतान, भूमि, शिक्षा, आरोग्य आदि में वृद्घि प्रदान करते हैं।

मनुस्मृति, याज्ञवलक्य स्मृति जैसे धर्म ग्रंथों में ही नहीं, वरन् पुराणों आदि में भी श्राद्घ को महत्त्वपूर्ण कर्म बताते हुए उसे करने के लिए प्रेरित किया गया है। गरुड़ पुराण के अनुसार कृतिका नक्षत्र में किया गया श्राद्घ समस्त कामनाओं को पूर्ण करता है। रोहिणी में श्राद्घ होने पर संतानसुख, मृगशिरा में गुणों में वृद्घि, आद्र्रा में ऐश्वर्य, पुनर्वसु में सुंदरता, पुष्य में अतुलनीय वैभव, अश्लेषा में दीर्घायु, मघा में अच्छी सेहत, पूर्वाफाल्गुनी में अच्छा सौभाग्य, हस्त में विद्या की प्राप्ति, चित्र में प्रसिद्घ संतान, स्वाति में व्यापार में लाभ, विशाखा में वंश वृद्घि, अनुराधा में उच्च पद प्रतिष्ठा, ज्येष्ठा में उच्च अधिकार भरा दायित्व व मूल में मनुष्य आरोग्य प्राप्त करता है।

श्राद्घ कर्म आखिर पुत्र द्वारा ही क्यों?
मनुस्मृति में कहा गया है-पुं नामक नरक से त्र (त्रप) करने वाला ही पुत्र कहा जाता है। मनुष्य इसी कारण नरक से मुक्ति दिलाने वाले पुत्र की कामना करता है और पिंडदान, श्राद्घ करने का अधिकार पुत्र को ही दिया जाता है।

यही बात वशिष्ठ स्मृति में भी है-पुत्र होने पर पिता लोकों को जीत लेता है, पौत्र होने पर आनंत्य को प्राप्त करता है और प्रपौत्र होने पर सूर्य लोक में निवास करने का उसे स्वयं सूर्य देव आशीर्वाद देते हैं। लेकिन जिनके पुत्र नहीं है, उन्हें धर्मराज के अनुसार उनकी पत्नी के द्वारा श्राद्घ कर्म होने पर श्राद्ध फल मिलेगा। पत्नी न होने पर सहोदर भाई, सहोदर भाई के ना होने पर जामाता व नाती श्राद्घ करने के अधिकारी होते हैं।

इन 3 अक्षरों का करिश्मा.. टाल देता है मृत्यु

जीवन में सुखों की चाहत कभी-कभी मन-मस्तिष्क पर इतनी हावी होती है कि स्वार्थ, हित और जरूरतों की खातिर इंसान अच्छे-बुरे कर्म का फर्क याद नहीं करना चाहता। किंतु अंतत: बुरे कर्म से पैदा दोष, कमियां या कमजोरी उसे मृत्यु या मृत्यु के समान दु:ख देती है। यही कारण है कि शास्त्र कहते हैं कि अच्छाई ही जीवन ही नहीं मृत्यु के बाद भी अमर बनाने वाली होती है।

बहरहाल, कर्म गति से जीवन पर आए संकट या मृत्यु तुल्य दु:खों से छुटकारे के धार्मिक उपायों की बात करें तो धर्मग्रंथों में काल के अधिपति भगवान शिव की उपासना अटल मृत्यु को भी टालने वाली मानी गई है। विशेष रूप से शिव का महामृत्युंञ्जय स्वरूप पापमुक्ति और मृत्युरहित या मृत्यु के समान दु:खों को दूर करने वाला माना गया है।

शिव के इस अद्भुत स्वरूप की शक्ति उपासना के लिए मृत्युञ्जय मंत्र अचूक माना गया है। विशेष रूप से तीन अक्षरी मृत्युञ्जय मंत्र का स्मरण मृत्यु और दरिद्रता से छुटकारा देने वाला माना गया है। इसलिए इसे अमृतेश भी पुकारा जाता है।

यही कारण है कि जीवन में संकट, रोग या दु:खों के दौर में भगवान शिव के यहां बताए जा रहे मंत्र का ध्यान यथासंभव नियमित रूप से शिव पूजा के साथ जरूर करें -

- सुबह स्नान के बाद घर पर शिव की महामृत्युञ्जय स्वरूप की प्रतिमा या शिवमंदिर में शिवलिंग को गंगाजल या दूध से स्नान के बाद गंध, अक्षत, बिल्वपत्र, धतुरा अर्पित कर पूजा व शिव आरती करें। कुश के आसन पर पूर्व दिशा में मुख कर बैठ नीचे लिखे तीन अक्षरी महामृत्युञ्जय मंत्र का रुद्राक्ष की माला से 108 बार स्मरण करें -

ऊँ जुं स:

- किस कारणवश मंत्र जप न कर पाएं तो मन ही मन इस मंत्र का स्मरण भी रोग, भय व मृत्यु योग को टालने में असरदार माना गया है।

Thursday, 22 September 2011

ये लोग सुंदर होते हैं लेकिन रहते हैं परेशान

कुंडली अध्ययन की कड़ी में अब जानिए मेष लग्न की जन्मपत्रिका में गुरु यदि सप्तम और अष्टम भाव में हो तो व्यक्ति को क्या-क्या फल प्राप्त होते हैं-

मेष लग्न की कुंडली में सप्तम भाव में गुरु हो तो...


यदि किसी व्यक्ति की कुंडली मेष लग्न की है और उसमें गुरु सप्तम भाव में हो तो व्यक्ति का विवाहित जीवन कष्टों में व्यतीत होता है। सप्तम भाव तुला राशि का स्वामी ग्रह शुक्र है। इस स्थान पर गुरु होने से व्यक्ति को स्त्री के पक्ष के संबंध में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा धन प्राप्त करने में भी कई कठिनाइयां आती हैं। इसके बाद ये लोग कड़ी मेहनत से भी सीमित धन ही प्राप्त कर पाते हैं। इनके खर्चों की अधिकता रहती है। गुरु के प्रभाव से इनका चेहरा सुंदर और आकर्षक रहता है। इसी वजह से ये लोग घर और समाज में प्रभावशाली रहते हैं। भाई-बहनों के संबंध में सुख की प्राप्ति होती है।

मेष लग्न की कुंडली में अष्टम भाव में गुरु हो तो...

मेष लग्न की कुंडली में आठवां घर मृत्यु और पुरातत्व स्थान का कारक भाव है। अष्टम भाव वृश्चिक राशि का स्वामी ग्रह मंगल है। मंगल की राशि में गुरु हो तो व्यक्ति को भाग्य का साथ प्राप्त नहीं हो पाता है। कड़ी मेहनत के बाद भी सकारात्मक परिणाम प्राप्त नहीं हो पाते। इन लोगों खर्चें काफी अधिक रहते हैं। परिवार में हमेशा ही कुछ न कुछ कार्य ऐसे होते रहते हैं जिनसे पैसों की तंगी बनी रहती है। आयु भाव में गुरु होने पर व्यक्ति की आयु अच्छी रहती है। इन लोगों का जीवन सामान्य ही रहता है। इसके अलावा इन्हें माता से भरपूर सुख प्राप्त होता है। भूमि-भवन संबंधी कार्य लाभदायक रहते हैं।

आगे जानिए मेष लग्न की कुंडली में नवम एवं दशम भाव में गुरु हो तो व्यक्ति के जीवन पर क्या-क्या प्रभाव पड़ते हैं?

Wednesday, 21 September 2011

धरती फटी,निकला शिवलिंग और उमड़ आया जनसैलाब.. - Miracle in bihar,Shivling occured in land - www.bhaskar.com


बिहार के बांका जिले के बौंसी प्रखंड स्थित देभलुआर गांव में अचानक जमीन फटी और भगवान शंकर का शिवलिंग बाहर निकल आया। यह खबर जंगल में आग की तरह फैली और आसपास के दर्जनों गांवों के श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंच गए। भक्तों का आना जारी है। भीड़ छंटने का नाम नहीं ले रही। हालांकि, बाद में पता लगा कि यह अंधविश्वास है। शिवलिंग को अबतक देखा नहीं गया है। फिर भी पूजा जारी है।
कैसे फैला यह अंधविश्वास ?
ग्रामीणों की मानें तो कुरावा गांव के गोपाल यादव को पहले कुष्ठ रोग था। झारखंड के बासुकीनाथ के शिव मंदिर में धरना देने से ठीक हो गया। मंदिर छोड़ने से पहले भगवान शिव ने उसे स्वप्न में बताया कि नाग के रूप में तुम्हे दर्शन दूंगा और जहां प्रकट होउंगा वहीं पर एक शिव मंदिर का निर्माण कराना।
गोपाल ने यह बात अपनी चाची को बताते हुए कहा कि यदि उसे सांप काट लेगा तो कहीं मत ले जाना। उसी जगह पर तीन दिनों तक रखे रहना और बासुकीनाथ मंदिर से भगवान का नीर लाकर पिला देना, मैं ठीक हो जाउंगा।
सांप ने काटा तो किया भगवान के निर्देशों का पालन
गोपाल को दो सप्ताह पहले सांप ने काट लिया था। भगवान के निर्देशों के अनुसार गोपाल की चाची ने वही किया जैसा उसे कहा गया था और वह जीवित हो उठा। ग्रामीणों की बातों पर यकीन करें तो उसके उठते ही धरती फटी और एक छोटा सा शिवलिंग निकल आया।
यह खबर समूचे प्रखंड में जंगल की आग की तरह फैल गई और देखते ही देखते दर्जनों गांव के लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई और भीड़ की शक्ल में हजारों लोग जिनमें खासकर महिलाऐं पहुंच कर पूजा-अर्चना में भाग ले रही हैं।
लोग भजन-कीर्तन कर रात-दिन शिवलिंग की पूजा कर रहे हैं। भीड़ इस कदर बढ़ते ही जा रही है मानों भलुआर गांव में किसी बड़े यज्ञ का आयोजन किया गया हो। पास के गांव गोकुला के रामनारायण शर्मा, अवधेश राय, दिनेश यादव आदि ने बताया कि मध्य रात्रि में जमीन फट कर अचानक शिवलिंग निकल आया। जिस कारण भक्तों की भीड़ रात्रि से ही वहां जुटनी शुरु हो गयी।
क्या कहते हैं जानकार
इस घटना को पूरी तरह से अंधविश्वास करार देते हुए बताया कि जिस जमीन पर यह शिवलिंग निकला है उस पर पावर प्लांट का निर्माण किया जा रहा है। खुदाई के कारण हो सकता है कि शिवलिंग जैसा कोई पत्थर बाहर निकल आया है और लोग उसे भगवान का अवतार मानकर पूजा-अर्चना करने लगे हैं। दूसरे एक स्थानीय लोग इसे जानबूझ कर धर्मिक रूप देने की मनगढ़ंत बात बताते हुए कहा कि पावर प्लांट की विवादित जमीन पर कब्जा करने की साजिश का एक हिस्सा हो सकता है।

Tuesday, 20 September 2011

गलवार को बोलें यह हनुमान मंत्र..मिलेगी यादगार सफलता

सफलता की औषधी निराश मन में प्राण फूंक देती है। यह असफलता से आहत मन के लिए संजीवनी के समान होती है। इसका साथ मिलते ही विचार शक्ति के साथ कर्म की गति भी बढ़ जाती है। ऐसे में जागा आत्मविश्वास इंसान को अपनी शक्तियों की पहचान कराता है। ऐसा तभी संभव है जब इंसान बुरे वक्त में कर्म और खुद पर से विश्वास न छोड़े।

सफल जीवन की ऐसी ही शक्ति पाने के धार्मिक उपायों में बलवीर हनुमान का स्मरण अचूक उपाय माना जाता है। क्योंकि श्री हनुमान की भक्ति तन, मन, विचार व बुद्धि से संपन्न बनाने वाली मानी गई है। श्री हनुमान चरित्र ही जीवन में पावनता, संयम और एकाग्रता के अद्भुत सूत्र सिखाता है, जो बेजोड़ सफलता के लिये जरूरी है।

शास्त्रों में किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिये खासतौर पर श्री हनुमान का एक मंत्र बहुत ही प्रसिद्ध है। जिसको लेकर मान्यता है कि हनुमान की इस मंत्र शक्ति को भगवान कृष्ण से पाकर ही अर्जुन ने कुरुक्षेत्र में सफलता का इतिहास रचा।

इस मंत्र को मंगलवार, शनिवार या सफलता की कामना से हर रोज सुबह श्री हनुमान को सिंदूर, लाल चंदन या गंध, अक्षत, फूल, गुड़ से बने पकवान या गुड़-चने का नैवेद्य अर्पित कर धूप, चमेली के तेल या गाय के घी का दीप जलाकर  यथाशक्ति लाल आसन पर बैठ 11, 21, 51 या रुद्राक्ष की माला या चंदन के दानों की माला से 108 बार पवित्र व एकाग्र मन से जप करें-

हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् 

- इस छोटे किंतु शक्तिशाली मंत्र जप के बाद श्री हनुमान की आरती कर सफलता की अड़चनों को दूर करने की कामना करें। प्रसाद ग्रहण करें, बांटे व सिंदूर मस्तक पर लगाएं।

Monday, 19 September 2011

What Is Your Cast........


सच कहूँ तो आप अपने आप को जाट, ब्राह्मण, नाई, धोबी, चामर, पांचाल (लोहार), सैनी (छिप्पि), बाल्मिकी आदि ही कहेंगें .............. आप अपने आप को इंसान कभी नही कहेंगे  (शायद कोई कहे भी),  क्योंकि हम में से कोई भी जब से होस सम्भलता तभी से उसको जाति से बाँध दिया जाता है और मृत्यु ही हो जाती है ये जाति हमारा पीछा नही छोड़ती .........
जीव का जब दुनिया मे आगमन होता है तो उसकी जाति क्या होती है, मेरे विचार से उसकी जाति और धरम सिर्फ़ मानव धरम ही होता है, चाहे वो किसी के घर में जनम ले अमीर, ग़रीब, हिंदू, मुस्लिम या किसी देश में|
हम धरम, जाति आदि में कब बँट जाते है हमें भी नही पता लगता| यहाँ मैं प्रत्यन कर रहा हूँ (अपनी समझ के अनुसार) शायद आप सहमत हो या ना भी हों ये मुझे पता नही, मेरा काम प्रत्यन करना है जोकि मैं करने की कोशिश कर रहा हूँ| इसके लिए मैने कोई शोध नही किया है ये मेरे साथ घटित एक घटना है .............. और आप के साथ भी कभी घटित हुई होगी या भविष्य में ज़रूर घटित होगी ..........
दोस्तो मैं अपने विचारों का एक अलग ही नमूना हूँ, मैं दिल से किसी धरम या जाति को नही मानता हूँ| सभी जातियों में, धरमों में मेरे दोस्त हैं| सबके यहाँ आना जाना, उठना बैठना, खाना पीना (दारू नहीं) हैं, किंतु मेरे विचारों से उनके विचार कभी मेल नही खाते इसलिए गहरी दोस्ती आज तक किसी से नही हो पाई| अपनी सोच विचारों के कारण ही जल्दी ही किसी से भी घुलमिल जाता हूँ और धोखा भी खा लेता हूँ यहाँ आप लोग मुझे मूर्ख भी समझ सकते हो| जीवन में बहुत सी मुस्किलों से दो चार होना पड़ता है, लेकिन जीवन ऐसे ही चलता है| खैर जिस विषय पर आज लिखने का मन हुआ है उस पर आते हैं|

कब हम जाति में बँट जाते हैं .........
एक दिन स्कूल से आते मेरी बेटी ने मुझ से एक सवाल किया कि पापा जी मेरी जाति क्या है? ये सवाल एसा था कि किसी ने मुझ पर मिसाइल दाग दी हो| मैने जवाब ना देकर बच्ची से ही सवाल किया कि बिटिया ये आप से किसने पूछा है बिटिया का जवाब था मेरी एक फरेन्ड ने| बिटिया का जवाब सुन कर मैं हैरान था की इतनी छोटी बच्ची खुद तो ये सवाल नही पूछ सकती, क्योंकि पाँच साल का बालक क्या जाने जाति - धरम| मैने अपनी बिटिया को बड़े प्यार से समझाते हुए कहा की बिटिया हमारी जाति है मानव धरम| बेटी को उसके सवाल का जवाब मिल गया था| दोस्तों उस रात मैं ठीक से सो नही सका| क्योंकि जो परम्परा चली आ रही थी वो एक पायदान और आगे कदम रखती दिख रही थी| बच्चे नई नई बातों को जानने के इच्छुक होते हैं| तीसरे दिन बिटिया ने स्कूल से आकर मुझे झूठा साबित कर दिया, उसने कहा कि पापा आप झूठ बोल रहे थे| मैने पूछा बेटा जी मैने कब झूठ बोला| बेटी ने तुरंत कहा आप ने मेरी जाति ठीक से नही बताई, मेरी फरेन्ड के पापा ने कहा जाट, चामर, धोबी, नाई, लुहार, सुनार ऐसी जातियाँ होती हैं|और आप ने तो अपनी जाति मानव धरम बताई थी| किसी तरह मैने बिटिया को समझाया और वो किसी हद तक मान गयी|अभी कुछ समय ही बिता था कि एक दिन बिटिया और बेटा स्कूल से एक फार्म लेकर आए और कहा की मेरे टीचर ने इसे ��ील करने को कहा है| मैने फार्म फील कर दे दिया| अगले दिन बच्चे फार्म वापिस लेकर आए और कह������������� की पापा टीचर ने कहा है की अपनी सही जाति लिख कर लाना|

कैसे हो सकता है मानव धरम ......... ?
दोस्तो सच आज की दुनिया में कही भी तो मानव धरम नाम की कोई जाति नही है,हम सब जाट, चामर, धोबी, तेलि, नाई, लुहार आदि आदि में बँट चुके हैं| सोने पे सुहागा राज नेताओं ने रच डाला जनगणना जाति के आधार पर करवा कर|जिस क्षेत्र में जिस जाति का बाहुल्य होता है वहाँ उसी जाति कॅंडिडेट को टिकिट मिलता है चाहे वो काबिल हो या ना हो| दूसरी जाति का उससे काबिल कॅंडिटेट देखता ही रह जाता है| जनता भी अपनी ही जाति वाले को वोट देती है चाहे मन मारकर ही दे क्योंकि पार्टियाँ जनता के सामने विकल्प ही नही छोड़ती| जिस दिन हम सब अपनी जाति धरम से उचें उठ कर एक हो जाएँ तो देश आतंक, मुफ़लिसी आदि से मुक्त हो जाएगा|

संविधान ने ही हमें जातियों में बाँट रखा है ........ !
हमारे सविधान निर्माताओं ने हमें खाक अच्छा संविधान दिया है, हमें आरक्षण के चक्कर में डाल कर बाँट दिया, किसी को सवर्ण तो किसी को अनुसूचित और किसी को पिछड़ा बना दिया| उन्होने ये संविधान भारत की जनता के लिए नही बनाया बल्कि अँग्रेज़ों की नीतियों को ध्यान में रख कर राजनेताओं की खातिर बनाया लगता है| कैसे ये नेता ग़रीब और अनपढ़ जनता पर राज कर सके ये रास्ता उन्होंने दिखाया है| उन्होने आरक्षण की पट्टी जनता की आँखों पर बाँध दी| जो लोग आरक्षण का लाभ नही उठा रहे उनको लगता है की आरक्षण में ना जाने कितने सुविधा छुपी है वो नही जानते की आरक्षण का डॅंक उनको नपुंसक बना देगा| आरक्षण के चक्कर में वो मेहनत करना छोड़ देंगे| जबकिआगे बढ़ने के लिए आरक्षण की नही सच्ची शिक्षा की अवशकता है ना की डिग्रियों की क्योंकि डिग्री तो धनवान लोग खरीद ही लेते हैं (3 ईडियट में दिखाया भी है) लेकिन शिक्षा को तो शिक्षा की तरह ही प्राप्त किए जा सकता है| यदि संविधान निर्माता भारत जी आम जनता का भला चाहते तो कभी भी आरक्षण का प्रावधान नही डालते वो एक ऐसा प्रावधान (सस्ती और ज़रूरी शिक्षा) करते जिससेजो अभाव ग्रस्त है चाहे किसी भी जाति में हो किसी भी धरम में हो उनको शिक्षा मिल सके और जो शिक्षित होगा वो अपने लिए रोटी, कपड़ा और मकान का जुगाड़ कर ही लेगा| आज 64 सालों के बाद भी वोटिंग प्रतिशत 60 से आस पास रहता है, यदि सभी शिक्षित हो जाते (जबकि ये संभव है) तो यही वोटिंग प्रतिशत 80-90 होता और काफ़ी हद तक जागरूक जनता अपने अधिकार को जानकर अपने भले के लिए आवाज़ बुलंद करती| आज जो नेता संसद की आड़ में अपना गंदा खेल खेल रहे हैं उनको भी ये मोका नही मिलता| ना ही आतंक फैलता, ना ही ग़रीबी होती, ना ही अंधविश्वास बचता| जब सब का पेट भरा हो वो क्यों यहाँ वहाँ भटकेगा|
अच्छी शिक्षा, अच्छा रहन सहन, अच्छा पहनावा और सुख सुविधाए हो तो किस को पड़ी है ग़लत रास्ते अपनाने की......... और ये सब संभव है सिर्फ़ सच्ची शिक्षा से ना की अँग्रेज़ों की थोपी हुई वर्तमान शिक्षा प्रणाली से .......|

जेल में बंद पति को सूटकेस में बंद कर बाहर लाई महिला

 एक महिला ने पति को जेल से बाहर निकालने के लिए अनूठी तरकीब लड़ाई। इस महिला अपने पति को सूटकेस में बंद किया और उसे जेल से बाहर लाने लगी। लेकिन उसकी कोशिश कामयाब नहीं हो पाई और पुलिस ने उसे पकड़ लिया।

पुलिस के मुताबिक 19 साल की मारिया कैदी जुआन रामिरेस से मिलने आई थीं। वह चेतमल रिहैबिलिटेशन सेंटर से बाहर आते वक्त पहियों वाला बड़s सूटकेस लेकर निकलीं। मारिया ने बताया कि सूटकेस में जुआन के गंदे कपड़े हैं।

मारिया बहुत नर्वस दिख रही थीं और सूटकेस भी बहुत भारी लग रहा था, इसलिए वहां के स्टाफ को शक हो गया। गार्ड्स ने जब सूटकेस चेक किया, तो उसके भीतर जुआन को बैठे पाया।

जुआन को अवैध हथियार रखने के जुर्म में 2007 में 20 साल की सजा सुनाई गई थी। उसका संबंध ड्रग्स स्मगलिंग, वेश्यावृति और उगाही करने वाले संगठन से था। जुआन को बहुत खतरनाक मुजरिम माना गया था। मारिया को गिरफ्तार कर लिया गया है।

इस पेड़ पर पैसे उगते हैं!

कौन कहता है कि पैसे पेड़ पर नहीं उगते? इस पेड़ को देख कर तो शायद इस बात का कोई मुगालता शायद किसी को न हो! ब्रिटेन के इस पेड़ के तने पर रहस्यमय तरीके से दिखाई देने वाले ये सिक्के दिखाई दे रहे हैं। तने पर चांदी और तांबे के सिक्के आधे अंदर धंसे हुए हैं।

नॉर्थ यार्कशर के निकट स्कॉटिश हाईपैंड के पीक जिले में इस पेड़ पर कई सालों से राहगीरों ने गुड लक और अन्य विश के लिए सिक्के गाड़ दिए हैं। समय बीतते बीतते इन पर छाल गहरी हो गई और सिक्के धीरे धीरे पेड़ का हिस्सा बन गए।

पेड़ पर इच्छा पूरी करने के मकसद से लगाए गए ये सिक्के शायद सदियों पुराने हैं, क्योंकि इन पर तारीख सदियों पुरानी है। यह पेड़ देखने में खजाने के ढेर की तरह लगता है। पेड़ पर सिक्के लगाने की परम्परा यहां क्रिसमस के मौके पर ही की जाती है। माना जाता है कि आत्माएं पेड़ों में निवास करती हैं, राहगीर यहां अक्सर मिठाइयां और तोहफे भी रख जाते हैं।

एक अधिकारी ने बताया कि जब हमने पहली बार इस पेड़ को देखा तो अजीब लगा। जब इस बारे में जानकारी हासिल की तो पता चला कि पेड़ को कभी-कभी इच्छा पेड़ के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। मान्यता है कि बीमार व्यक्ति अगर पेड़ पर एक सिक्का गाड़ देता है, तो वह जल्द अच्छा हो जाता है।

Sunday, 18 September 2011

Amitabh Bachan Ballywood History

11 अक्टूबर 1942
सहस्राब्दिक के महानायक कहे जाने वाले लीजेंड अभिनेता अमिताभ। 1970 के दशक में बॉलीवुड सिनेमा के 'एंग्री यंग मैन' कहलाए। और भारतीय फिल्म इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण शख्सियत बन गए। अपने फिल्मी कैरियर में बिग बी के नाम से मशहूर अमिताभ ने अनेकों सम्मान जीते जिसमें उन्हें 4 बार नेशनल फिल्म अवार्ड्स से नवाजा गया। खास बात ये कि उनमें से तीन बार बेस्ट एक्टर की श्रेणी में मिला। 14 बार फिल्म फेयर अवार्ड्स फिल्म फेयर अवार्ड्स में सबसे ज्यादा बार बेस्ट एक्टर और बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के लिए नामांकित होने का रिकॉर्ड बरकरार रखा। एक्टिंग के साथ प्लेबैक सिंगर, फिल्म निर्माता, टेलीविजन प्रस्तोता के रूप में भी शानदार छाप। भारतीय संसद के सदस्य रहे 1984-1987
मूल नाम: अमिताभ हरिवंश बच्चन जन्मतिथि: 11 अक्टूबर 1942 राशि: तुला कद: 6 फुट 3 इंच बाल का रंग- काला आंख का रंग- काला जन्म स्थान- इलाहाबाद( उत्तर प्रदेश) धर्म- हिंदू शिक्षा- शेरवुड कॉलेज नैनीताल, और किरोड़ीमल कॉलेज दिल्ली युनिवर्सिटी नई दिल्ली वैवाहिक स्थित: विवाहित भाषा: हिंदी अंग्रेजी, पंजाबी
पसंददी अभिनेत्री: जया भादुड़ी, ऐश्वर्या राय पसंदीदा फिल्म: गंगा जमुना और प्यासा भोजन- भारतीय शाकाहारी भोजन
11 अक्टूबर 1942 को इलाहाबाद(उ.प्र.) में हिंदू कायस्थ परिवार में जन्म।इनके पिता डॉ. हरिवंश राय बच्चन हिंदी के मशहूर कवि मां तेजी बच्चन फैसलाबाद के सिख-पंजाबी परिवार से थी। गौरतलब है कि फैसलाबपाद अब पाकिस्तान में है। अमिताभ बच्चन का प्रारंभिक नाम भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारे से प्रेरित होकर 'इंकलाब' रखा। बाद में मशहूर कवि सुमित्रानंदन पंत के सुझाव पर हरिवंश राय ने नाम बदलकर अमिताभ रख दिया। जिसका अर्थ होता है 'प्रकाश जो कभी बुझता नहीं'. हलांकि इनका सरनेम श्रीवास्तव था लेकिन अमिताभ के पिता ने बच्चन उपनाम अपना लिया। इसी उपनाम से उनके सारे कार्य प्रकाशित होते थे। अमिताभ ने इसी उपनाम के साथ फिल्मों में प्रवेशकिया। और यह उपनाम सभी सार्वजनिक कार्यों में इस्तेमाल होने लगा। अमिताभ ने इलाहाबाद के जनाना प्रोबधिनी एंड ब्वायज हाईस्कूल से स्कूलिंग।दिल्ली यूनिवर्सिटी के किरोड़ीमल कॉलेज से बीएससी। अमिताभ ने फिल्मों में प्रवेश से पहले कलकत्ता में शिपंग फर्म बर्ड एंड कंपनी के लिए बतौर फ्रेट ब्रोकर काम किया। अमिताभ ने फिल्म अभिनेत्री जया भादुड़ी से शादी की। इनकी दो संतानें हैं- श्वेता नंदा और अभिषेक बच्चनअभिषेक भी एक अभिनेता हैं जिन्होंने मशहूर अभिनेत्री ऐश्वर्या राय से शादी की।
1969 - सात हिंदुस्तानी, भुवन सोम 1971 - परवाना, आनंद, बॉम्बे टॉकीज, गुड्डी प्यार की कहानी 1972 - संजोग, बंसी बिरजू, पिया का घर, एक नजर, बावर्ची, रास्ते का पत्थर, बॉम्बे टू गोवा 1973 - बड़ा कबूतर, बंधे हाथ, जंजीर, गहरी चाल, अभिमान सौदागर, नमक हराम 1974 - कुंवारा बाप, दोस्त, कसौटी, बेनाम, रोटी कपड़ा और मकान, मजबूर 1975 - चुपके-चुपके, फरार, मिली, दीवार, जमीर, शोले, 1976 - दो अंजाने, छोटी सी बात, कभी-कभी, हेरा-फेरी 1977 - अलाप, चरणदास, अमर,अकबर,एंथॉनी, शतरंज के खिला़ड़ी, अदालत, इमान धरम, खून पसीना, परवरिश 1978 - बेशर्म, गंगा की सौगंध, कसमे वादे, त्रिशूल, डॉन, मुकद्दर का सिकंदर 1979 - द ग्रेट गैंबलर, गोलमाल, जुर्माना, मंजिल, मि. नटवरलाल, काला पत्थर, सुहाग 1980 - दो और दो पांच, दोस्ताना, राम बलराम, शान 1981 - चश्मे बद्दूर, कमांडर, नसीब, बरसात की एक रात, विलायती बाबू, लावारिस, सिलसिला, याराना, कालिया 1982 - सत्ते पे सत्ता, बेमिसाल, देशप्रेमी, नमक हलाल, खुद्दार, शक्ति 1983 - नास्तिक, अंधा कानून, महान, पुकार, कुली 1984 - इंकलाब, शराबी 1985 - गिरफ्तार, मर्द 1986 - आखिरी रास्ता 1987 - जलवा, कौन जीता कौन हारा 1988 - शूरमा भोपाली, शहंशाह, हीरो हीरालाल, गंगा जमुना सरस्वती 1989 - बंटवारा, तूफान, जादूगर, मैं आजाद हूं 1990 - अग्निपथ, आज का अर्जुन 1991 - हम, अजूबा, इंद्रजीत, अकेला 1992 - खुदा गवाह 1994 - इंसानियत 1996 - तेरे मेरे सपने 1997 - मृत्युदाता 1998 - मेजर साब, बड़े मिया छोटे मियां 1999 - लाल बादशाह, सूर्यवंशम, हिंदुस्तान की कसम, कोहराम ? हेलो ब्रदर, बीवी नं-1 ? 2000 - मोहब्बतें 2001 - एक रिश्ता, लगान, अक्स, कभी खुशी कभी गम 2002 - आंखें, हम किसी से कम नहीं, अग्निवर्षा, कांटे 2003 - खुशी, अरमान, मुंबई से आया मेरा दोस्त, बूम, बागबान, फंटूश 2004 - खाकी, ऐतबार, रुद्राक्ष, इंसाफ, देव, लक्ष्य, दीवार, क्यों हो गया ना, हम कौन हैं, वीर-जारा, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों 2005 - ब्लैक, वक्त : दे रेस अंगेस्ट टाइम, बंटी और बबली, परिणीता, पहेली, सरकार, विरुद्ध, रामजी लंदनवाले, दिल जो भी कहे, एक अजनबी, अमृतधारा 2006 - फैमिली, डरना जरूरी है, कभी अलविदा न कहना, बाबूल 2007 - एकलव्य: द रायल गार्ड, निशब्द, चीनी कम, शूटआउट एट लोखंडवाला, झूम बराबर झूम, राम गोपाल वर्मा की आग, ओम शांति ओम 2008 - जोधा अकबर, भूतनाथ, सरकार, सरकार राज, द लास्ट लीयर, गॉड तुस्सी ग्रेट हो 2009 - जॉनी मस्ताना, दिल्ली- 6, अलादीन, एक्सक्लूजन, तलिस्मान, जमानत, शांताराम, पा 2010 - रण, तीन पत्ती, कंधार
1970 बेस्ट न्यूकमर सात हिंदुस्तानी के लिए 1970 - सरस्वती अवार्ड आनंद के लिए 1971 - फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर अवार्ड आनंद के लिए 1971 - बेस्ट एक्टर इन सपोर्टिंग रोल, आनंद के लिए 1973 - फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर अवार्ड नमक हराम के लिए 1975 - बेस्ट एक्टर फॉर मिली 1977 - फिल्म फेयर बेस्ट एक्टर अवार्ड अमर अकबर एंथॉनी के लिए 1978 - फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर अवार्ड डॉन के लिए 1980 - उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अवध सम्मान 1984 - पदमश्री, भारत सरकार का चौथा बड़ा नागरिक सम्मान 1989 - रोटरी क्लब ऑफ बॉम्बे (मुंबई) द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड 1990 - फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड,पहले प्राप्तकर्ता 1991 - फिल्म हम के लिए फिल्म फेयर बेस्ट एक्टर अवार्ड 1991 - अग्निपथ के लिए नेशनल फिल्म अवार्ड फॉर बेस्ट एक्टर 1995 - उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश का श्रेष्ट नागरिक सम्मान 'यश भारती सम्मान' 1997 - 'प्रतिष्ठति पूर्व छात्र अवार्ड' राजधानी के सबसे बड़े केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्लेटिनम जुबली उद्घाटन समारोह के मौके पर 2000 - फिल्मफेयर सुपर स्टार ऑफ द मिलेनियम फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर अवार्ड फिल्म मोहब्बतें के लिए आईआईएफए स्पेशल ऑनररी अवार्ड बेस्ट आर्टिस्ट ऑफ मिलेनियम, हीरो हंडा एंड फाइल स्टारडस्ट मैग्जीन द्वारा बॉलीवुड पीपुल्स च्वाइस अवार्ड्स: बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर फॉर मोहब्बतें आल इंडिया क्रिटिक्स एसोसिएशन (aica): बेस्ट एक्टर अवार्ड सूर्यवंशम के लिए सैंसुई व्यूवर्स च्वाइस अवार्ड्स: बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर मोहब्बते के लिए स्क्रीन वीडियोकॉन अवार्डस: बेस्ट एक्टर अवार्ड कौन बनेगा करोड़पति के लिए 2001 - इंडियन टैली अवार्ड: टीवी पर्सनैलिटी ऑफ द इयर कौन बनेगा करोड़पति के लिए हीरो-हंडा इंडियन टेलीविजन अकाडमी अवार्ड: बेस्ट हॉस्ट फॉर कौन बनेगा करोड़पति जी गोल्ड अवार्डस: क्रिटिक्स अवार्डस फॉर बेस्ट मेल फार मोहब्बतें आईआईएफए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर अवार्ड फॉर मोहब्ब्तें बॉलीवुड मूवी अवार्ड: क्रिटिक्स अवार्ड मेल फार मोहब्बतें फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवार्ड फार बेस्ट परफार्मेंस फार अक्स पद्मभूषण, भारत सरकार द्वारा, इंडिया का तीसरा बड़ा नागरिक सम्मान 2002 दयावती मोदी अवार्ड, भारत में कला संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र से जुडा़ बड़ा सम्मान राष्ट्रीय किशोर कुमार अवार्ड, मध्य प्रदेश सरकार द्वारा, बेहतरीन अभिनय और फिल्म इंडस्ट्री में योगदान के लिए आईआईएफए पर्सनाल्टी आफ द ईयर आईकान ऑफ द मिलेनियम अवार्ड 32वें रूपा एआईएफए अवार्ड बांद्रा में लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड सैंसुई व्यूवर्स च्वाइस मूवी अवार्डस द्वारा इंडियन टेलीविजन: बेस्ट टेलीविजन एंकर अवार्ड कौन बनेगा करोड़पति के लिए इंडियन टेली अवार्ड्स: टीवी एंकर आफ द ईयर फार कौन बनेगा करोड़पति के लिए 2003 एमटीवी लाइक्रा अवार्ड्स: महा स्टाइल आईकान ऑफ द इयर (पहले प्राप्तकर्ता) बॉलीवुड का लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्डस: लंदन बेस्ड एशियन गिल्ड द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड: संगीत सेरेमनी अवार्ड में फिल्मफेयर पावर अवार्ड स्टार स्क्रीन अवार्ड जोड़ी नं-1 हेमामालिनी के साथ, बागबां के लिए डिस्टिंक्शन इन एक्टिंग अवार्ड फार बागबां स्टारडस्ट अवार्ड फार लाइफटाइम अचीवमेंट सत्यजीत रे लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड जी सिने अवार्ड फार लाइफटाइम अचीवमेंट बॉलीवुड मूवी अवार्ड: मोस्ट सेंसेनल एक्टर फार कांटे एफपीएफएसी अचीवर अवार्डस: अचीवर ऑफ द ईयर अवार्ड 2004 गोल्डन ग्रेड अवार्ड स्पेशल अवार्ड फार द फिल्म बागबां मोस्ट आउटस्टैंडिंग परसनैलिटी रेडियो वाइस ऑफ द ईयर अवार्ड सैंसुई व्यूवर्स च्वाइस मूवी अवार्डस: पर्सनैल्टी ऑफ द ईयर स्पोर्ट्स वर्ल्डस जोड़ी ऑफ द ईयर हेमामालिनी के साथ बागबां के लिए आनररी डॉक्टरेट झांसी विश्वविद्यालय द्वारा लिविंग लीजेंड अवार्ड फिक्की द्वारा 2005 दीनानाथ मंगेशकर अवार्ड फिल्म और संगीत में योगदान के लिए स्टार स्क्रीन अवार्ड बेस्ट एक्टर फार ब्लैक फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवार्ड फार बेस्ट परफार्मेंस फार ब्लैक फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर अवार्ड फार ब्लैक स्पेशल अवार्ड फार द फिल्म ब्लैक बेस्ट एक्टर फार ब्लैक 'मोस्ट पापुलर स्टार इन इंडिया' हंसा रिसर्च के नये सिंडिकेटेड स्टडी सेलेब्रटी ट्रैक में आंके गए द इंटरनेशनल जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट द्वारा डायमंड ऑफ इंडिया अवार्ड इंडियन टेली अवार्डस: बेस्ट एंकर अवार्ड फार कौन बनेगा करोड़पति-2 2006 स्टारडस्ट स्टार ऑफ द इयर अवार्ड- मेल फॉर ब्लैक नेशनल फिल्म अवार्ड फार बेस्ट एक्टर फार ब्लैक आईआईएफए वाल ऑफ फेम आइफा बेस्ट एक्टर अवार्ड फार ब्लैक बॉलीवुड मूवी अवार्ड- बेस्ट एक्टर फार ब्लैक अप्सरा अवार्ड: बेस्ट एक्टर फार ब्लैक जी सिने अवार्ड बेस्ट एक्टर: मेल फार ब्लैक बॉलीविस्टा फिल्म अवार्ड्स: बेस्ट एक्टर फार ब्लैक बॉलीवुड पीपुल्स च्वाइस अवार्ड्स: बेस्ट एक्टर फार ब्लैक रेडिफ मूवी अवार्ड्स: बेस्ट एक्टर फार ब्लैक लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड: एएक्सएन एक्शन अवार्डस पर आनररी डॉक्टरेट डिग्री अपने अल्मा मटर दिल्ली यूनिवर्सिटी द्वारा 2007 भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए स्पेशल अवार्ड नौवें एमएएमआई के मौके पर चीनी कम के लिए स्टार स्क्रीन अवार्ड्स फार बेस्ट एक्टर (क्रिटिक्स) इंडियन टेलीविजन अकाडमी अवार्ड फार अचीविंग द अल्टीमेट एमीनेंस इन द वर्ल्ड ऑफ इंटरटेनमेंट 2009 स्टारडस्ट बेस्ट एक्टर अवार्ड फार द लास्ट लीयर इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में 40 साल पूरे करने पर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड 11 वें एमएएमआई के मौके पर मोस्ट पावरफुल एंटरटेनर ऑफ द डिकेड अवार्ड भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए, आईफा-फिक्की द्वारा दशक के 5 सबसे प्रभावशाली भारतीयों में शुमार 2010 लाइंस गोल्ड अवार्ड: बेस्ट एक्टर फार पा फिक्की फ्रेम्स 2010 एक्सीलेंस अवार्डस: बेस्ट एक्टर फार पा टाइमलेस आईकान अवार्ड एट द हेलो हाल ऑफ फेम लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड मसाला अवार्ड के मौके पर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड एशियानेट फिल्म अवार्डस द्वारा स्टारडस्ट स्टार ऑफ द इयर अवार्ड- मेल फार पा नेशनल फिल्म अवार्ड फार बेस्ट एक्टर फार पा आइफा बेस्ट एक्टर अवार्ड फार पा स्टार स्क्रीन अवार्ड बेस्ट एक्टर फार पा स्टार स्क्रीन अवार्ड जोड़ी नं-1 अभिषेक बच्चन के साथ पा के लिए अप्सरा अवार्डस: लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड्स 2011 अप्सरा अवार्ड्स: बेस्ट एक्टर फार पा फिल्मफेयर स्पेशल अवार्ड भारतीय फिल्म उद्योग में 40 साल पूरा करने पर स्टारडस्ट प्राइड ऑफ इंडस्ट्री अवा

Amitabh Bachchan-अमिताभ बच्चन- - bollywood.bhaskar.com

Amitabh Bachchan-अमिताभ बच्चन- - bollywood.bhaskar.com:

'via Blog this'

सालों तक चलता रहा पियर्सिग का सिलसिला!


डॉर्टमंड, जर्मनी। रोल्फ बुशहोल्ज (52) के बारे में जानना खास होगा। उनका शरीर जगह-जगह से बिंधा हुआ है। कुल 453 पिनों और रिंग्स से सुसçज्जत रोल्फ को हाल ही गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉड्र्स की ओर से दुनिया का सबसे ज्यादा बिंधा हुआ पुरूष घोषित किया गया है। 

पेशे से कंप्यूटर एक्सपर्ट रोल्फ ने करीब 11 साल पहले पियर्सिग की तरफ रूख किया था। उन्हें यह इतना पसंद आया कि वे तब से लेकर अपने शरीर के विभिन्न हिस्सों पर इतने छेद करवा चुके हैं कि सबसे ज्यादा बिंधा हुआ पुरूष होने का कीर्तिमान स्थापित कर दिया। रोल्फ के 453 छेदों में से 94 उनके होठों के आसपास हैं, 25 उनकी बरौनियों की शोभा बढ़ा रहे हैं, 8 छेद उनकी नाक पर हैं और आश्चर्यजनक रूप से 278 छेद उन्होंने जननांगों के आसपास करवा रखे हैं। 

पियर्सिग के अलावा रोल्फ को टैटू बनवाने का भी शौक है। हालांकि रोल्फ दुनिया के सबसे ज्यादा बिंधे हुए पुरूष हैं, बहरहाल वे दुनिया की सबसे ज्यादा बिंधी हुई महिला इलेन डेविडसन (करीब 7000 छेद) से 

इस पेड़ का चमत्कार देख आंखे फटी की फटी रह जाएंगी!


यूपी के पीलीभीत में एक ऐसा पेड़ हैं, जिस पर लिखे नाम के मिटते ही उस शख्स की मौत हो जाती है। यहां हर शख्स तब तक महफूज रहता है, जब तक की उसका नाम इस पेड़ पर लिखा होता है। पेड़ की सबसे खास बात यह है कि इस पेड़ पर किसी मृतक का नाम नहीं है।

इस गांव के रहने वाले लोगों के मुताबिक, यहां पैदा होने वाले हर बच्चे का नाम इस पेड़ पर दर्ज कर दिया जाता है। प्रदेश ही नहीं देश-विदेश से लोग यहां आकर अपना अंकित करते हैं। यदि कोई व्यक्ति इस पेड़ पर अपना नाम लिखता है तो उसकी मौत के साथ ही पेड़ पर लिखा हुआ नाम भी गायब हो जाता है।

लगभग 400 साल पुराने इस पेड़ पर कुछ लोग अंधविश्वास में, कुछ परखने के लिए और कुछ लोगों ने जिज्ञास में पूरे पेड़ को खोद डाला है। क्या बड़े-बूढ़े, महिला-पुरुष, पढ़-लिखे सभी इस पर नाम लिखकर आजमाना चाहते हैं। यहां हर रोज लोगों का तांता लगा रहता है। इसे जिसने भी आजमाया, उसने चमत्कारी माना।

वहीं कुछ विद्वानों का कहना है कि यह स्वाभाविक प्रक्रिया है। इस वजह से नाम मिट जाते हैं। वे इसे महज संयोग मानते हैं। पर विश्वास और आस्था की मजबूती को देखते हुए लोगों की बातों से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।
ब्रिटिश डॉक्टरों ने सिर से जुड़े दो जुड़वा बच्चों को ऑपरेशन द्वारा अलग करके मेडिकल क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है।



जुड़वा बच्चियां रीतल और रीतज सिर से एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं, जिनकी उम्र 11 महीने है। इन बच्चियों को लंदन के ग्रेट ऑर्मोंड स्ट्रीट अस्पताल फोर चिल्ड्रन के डॉक्टरों ने चार चरणों में की गई सर्जरी के द्वारा सफलतापूर्वक अलग किया गया।



डॉक्टरों के अनुसार सिर से जुड़े होने के इस तरह के मामले दस मिलियन में से एक में होता है। इन बच्चियों की खोपड़ी जुड़ी हुई थी और सिर की नसें भी जुड़ी हुई थी।



गौरतलब है कि ये बच्चियां अक्टूबर 2010 में सूडान के खारटोम में पैदा हुई थीषॉ। इनके पिता 31 वर्षीय अब्दलमज़ीद गैबुओरा स्वयं गायनेकोलॉजी स्पेशलिस्ट हैं।

Friday, 16 September 2011

हिन्दू संस्कृति के अनुसार यह माना जाता है कि मौत के बाद मनुष्य को अपने कर्मों के अनुसार स्वर्ग और नर्क में भेजे जाने का विधान है। शुभ काम करने वाले को स्वर्ग मिलता है और बुराक काम करने वालों को नर्क में जाना पड़ता है। लेकिन किन लोगों को स्वर्ग में जाना पड़ता है और किन्हें नर्क में इस बात का सपष्ट उल्लेख हमारे धर्म ग्रंथों में मिलता है।

एक श्लोक के अनुसार

तेषां में वैष ब्रह्मलोको येषां, तपो ब्रह्मचर्य येषु सत्यं प्रतिष्ठितम् ।

जिनमें तप ब्रह्मचर्य है, सत्य प्रतिष्ठित है, उन्हें ब्रह्मलोक मिलता है । जिनमें न तो कुटिलता है और न मिथ्या आचरण है और न कपट है, उन्हीं को विशुद्ध ब्रह्मलोक मिलता है। गरुड़ पुराण के अनुसार

- सच, तपस्या, क्षमा, दान और वेदशास्त्रों के स्वाध्याय द्वारा धर्म का अनुष्ठान करते हैं। वे स्वर्ग में जाते हैं।

- कुआं, बावड़ी, तालाब, प्याऊ, आश्रम व देवमंदिर बनाने वाले।

- होम, जप, स्नान, और देवताओं के पूजप में सदैव लोग रहते हैं। ऐसे लोग स्वर्ग में जाते हैं।

- ऐसे लोग जो शत्रुओं के दोष भी कभी नहीं कहते है बल्कि उनके गुणों का ही वर्णन करते हैं।

- जो लोग मन और इन्द्रियों के नियमन में लगे रहते हैं। शोक भय व क्रोध से रहित।

- जो प्राणिमात्र पर दया करते हैं। जिन पर सब विश्वास करते हैं।

- एकांत स्थान पर किसी को देखकर जो कामवासना मन में नहीं लाता।

- गृह, अन्न, और रस आदि को जो स्वयं उत्पन्न कर दान करते हैं।

- ऐसे लोग जो सोने का, गाय का , अन्न व वस्त्र का दान देते हैं।

- जो परधन का लालच नहीं रखते हैं।

- धर्म से प्राप्त धन का उपयोग कर जीविका चलाते हैं। वे स्वर्ग को प्राप्त करते हैं।

बहू के बेडरूम में पति की जगह कोई और, जिंदगी में आया तूफान

 .रानीला में बेगाने घर में घुसा एक युवक परिवार के लोगों के हत्थे चढ़ गया। गांव वालों ने उसकी अच्छी धुनाई की और बाद में चेन से बांध दिया।



काफी देर हंगामे के बाद पंचायत में मामला सुलझाने पर सहमति बनी। पंचायत में पीड़ित परिवार के अलावा घर की पुत्रवधु और आरोपी पक्ष के लोगों को भी बुलाया गया। दिन भर चली पंचायत में मौजिज लोगों ने विवाद खत्म करने का प्रयास किया, परंतु बात नहीं बन पाई।


बुधवार को युवक को परिवार वालों ने देखा। वह एक कमरे में बेड के नीचे छिपा हुआ था। परिवार वालों ने उसे पकड़ा और बाहर ले आए। देखते ही देखते घर के बाहर लोगों का हुजूम लग गया।


गांव वालों ने युवक की जमकर धुनाई की और चेन में जकड़ दिया। ग्रामीणों ने इसकी सूचना आरोपी युवक के परिजनों को दी और विवाहिता के पीहर वालों को भी बुलवा लिया। पीड़ित परिवार ने कहा कि वे अब किसी सूरत में अपनी बहू को अपने घर पर नहीं रखेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि बहू की शह पर ही युवक रात को उनके घर में घुसा था। 


मामला बिगड़ता देख विवाहिता के परिवार वालों ने अपनी बेटी की जिंदगी की दुहाई दी और एक मौका और देने की बात कही। करीब एक बजे तक पंचायत में विचार विमर्श चलता रहा लेकिन कोई फैसला नहीं हो सका। पंचायत के बाद युवक को छोड़ दिया गया।

Thursday, 15 September 2011

जब निकलते हैं प्राण तो तन में होता है ऐसा हाहाकार..!

जीवन में रूप, रस, गंध, स्पर्श और शब्द के रूप में इंसान अनेक सुखों व आनंद को भोगता है। हालांकि इस दौरान वह दु:ख, संकट यहां तक कि ऐसे कष्टों को सामना करता या दूसरों के जीवन में देखता है जो मृत्यु के समान कहे जाते हैं। लेकिन स्वाभाविक मृत्यु के समय या यूं कहें कि जब शरीर प्राण छोड़ता है तब कैसा अनुभव होता है? यह प्राणी व शरीर विशेष ही जान सकता है। जिससे हर प्राणी गुजरता है।

यही कारण है कि शास्त्रों में सुखी जीवन के लिए अहं का त्याग और अहं से दूर होने के लिए मृत्यु को याद रखना एक बेहतर उपाय बताया गया है। खासतौर पर मृत्यु के वक्त होने वाली पीड़ा हर शरीर भोगता है। जिसे हिन्दू धर्मग्रंथ गरूड़ पुराण में बताया गया है। जानते है जब तन से प्राण निकलते हैं तो क्या-क्या होता है?

मृत्यु काल का ही रूप है। मृत्यु के वक्त शरीर और प्राण अलग हो जाते हैं और यह नियत समय पर ही आती है। मृत्यु पीड़ा से प्राणी सभी कर्म भूल जाता है।  सूर्य, चन्द्र, शिव, पंच तत्व, इन्द्र देवादि, प्रकृति, रज, तम, सत्व गुण सभी काल के वश में होकर प्राणी के जीवन पर अपना प्रभाव छोड़ते हैं, किंतु मृत्यु के समय यह प्रभावहीन हो जाते हैं।

यही कारण है कि मृत्यु का समय करीब आने पर शरीर में कोई रोग पैदा होता है। इन्द्रियां कमजोर या निष्क्रिय हो जाती हैं। शरीर शक्ति व तेजहीन हो जाता है। यहीं नहीं शरीर में अनेक बिच्छुओं के डंक लगने की पीड़ा जैसा अनुभव होता है। मुंह लार से भर जाता है। इसके बाद ही शरीर जड़ और विकृत रूप ले लेता है। 

काल प्राणों को अपनी ओर खींचता है। जिससे प्राण कण्ठ में आते हैं और अंत में अंगुठे के आकार का माना गया प्राण पुरुष बेचैन होकर अपने निवास को देखता हुआ यमदूतों द्वारा यमलोक ले जाया जाता है।

मर गई थी 'वो', सज चुकी थी चिता, लेकिन हो गई जिंदा

दरभंगा. जिले के सिंहवाडा प्रखंड में कल हुई एक घटना को जहां कुछ लोग चमत्कार मान रहे हैं वहीँ कुछ इसे ऊपर वाले की कृपा मान रहा है। हुआ यूं कि सिंहवाडा प्रखंड के भरवाडा पुरानी बाजार निवासी शत्रुघ्न साह की पुत्री रागिनी देवी प्रेगनेंट थीं।



बीती रात रागिनी ने एक बच्ची को जन्म दिया। बच्ची के जन्म के बाद उसकी हालत बिगड़ गई। वह बेहोश हो गई। फिर उसकी सांसें थम सी गई। घर में रोना-धोना शुरू हो गया। शरीर को हिलाया-डुलाया। लेकिन, कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई।



परिजनों ने उसे मृत मान लिया। उसके अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी गई। सभी उसे अर्थी पर लेकर श्मशान घाट पहुंच गए। चिता सजाई ही जा रही थी कि तभी लोगों ने देखा कि उसके शरीर में कंपन हो रही है। इसके बाद अचानक से वह जिंदा हो उठी। आसपास के लोग हैरत में पड़ गए।



कई डर कर वहां से भाग गए तो कुछ ने जाकर फ़ौरन डॉक्टर को बुलाया। डॉक्टर ने नब्ज़ टटोली तो उसकी नब्ज चलती मिली। इसके बाद उसे अर्थी पर ही अस्पताल ले जाया गया। वहां फिलहाल उसका इलाज चल रहा 

News – Hindi News – India News - News in Hindi – News Headlines – Breaking News - Daily News - Hindi News Papers - Local News.

Wednesday, 14 September 2011

बिना पेट्रोल-डीजल के चलेगी देसी नैनो, दाम सुन चौंक जाएंगे आप

महुवा (गुजरात). यह है देसी नैनो कार। लागत महज 7650 रुपए। इसे चलाने के लिए न पेट्रोल चाहिए न डीजल। सौर ऊर्जा से चलने वाली यह कार 28 किलोमीटर की रफ्तार से दौड़ सकती है।

इसे दक्षिण गुजरात के ओंडच गांव के प्राथमिक शिक्षक छोटूभाई पटेल ने बनाया है। उन्होंने इसे नैनो-3 नाम दिया है। इसमें दो लोग बैठ सकते हैं। सूर्यास्त के बाद भी इससे 85 किलोमीटर का सफर तय किया जा सकता है।


क्या है खास बात : कार के सौलर पैनल से जुड़ी बैटरी एक बार चार्ज होने पर तीन घंटे तक कार्य करती है। कार 150 किलोग्राम तक का भार ढो सकती है। इससे न तो ध्व

ऐसी अंगुली होती है कुछ खास, इसमें छिपा हैं पैसों का राज

छोटी होने के कारण वैसे तो हाथ में इस अंगुली को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता है। लेकिन कनिष्ठिका अंगुली के नीचे आर्थिक लाभ देना वाला बुध ग्रह होता है। इस ग्रह के प्रभाव से व्यक्ति को अच्छा धन लाभ मिलता है। पैसों से संबंधित बड़ा लाभ भी इन लोगों को मिलता है।



ये खास बात होती है अंगुली में-

- अगर हाथ की छोटी अंगुली यानी कनिष्ठा अँगुली का नाखुन अनामिका अँगुली(रिंग फिंगर) के दूसरे हिस्से से आगे निकलकर तीसरे हिस्से तक जाये तो ऐसा व्यक्ति के जीवन में कभी भी पैसों की कमी नहीं होती।

- अगर किसी के हाथ में कनिष्ठिका यानी लिटील फिंगर का तीसरा हिस्सा लम्बा हो तो जातक के धनोपार्जन में सफलता के योग होते हैं। ऐसा इंसान पैसों के मामलों में कभी असफल नहीं होता ह।

- यदि कनिष्ठा (लिटील फिंगर) अनामिका (रिंग फिंगर) के प्रथम पर्व को छू लेती है। हो तो जातक यात्रा द्वारा धन की प्राप्ति करता है।

- यदि अंगुलियों के पर्व लम्बे हो तो जातक धनी होने के साथ-साथ दीर्घायु भी प्राप्त करता है।

- अगर किसी के हाथ में सूर्य रेखा से कोई छोटी रेखा निकलकर बुधक्षेत्र यानी छोटी अंगुली तक जाए तथा कनिष्ठिका का प्रथम हिस्सा लम्बा हो तो लेखन, प्रकाशन द्वारा अपनी आजीविका अर्जित करता है।

-  यदि कनिष्ठिका (लिटील फिंगर) का दूसरा भाग लम्बा हो एवं बुध पर्वत पर कोई खड़ी रेखाएं हो तो ऐसा जातक चिकित्सा के क्षेत्र से धनार्जन करता है।

- यदि कनिष्ठा एवं अनामिका अँगुली के आपस में सटाने के उपरान्त मध्य छिद्र रहे तो वृद्धावस्था में आर्थिक कष्ट का सामना करना पड़ सकता है।

किसान का कमाल, बनाया 'चमत्कारी' मशीन


रायपुर।सारंगढ़ के किसान विजय यादव ने पुरानी मोटर साइकिल से धान काटने की मशीन बनाई है। मिट्टी तेल से चलने वाली यह मशीन एक घंटे में एक एकड़ धान काट लेती है। यह पानी खींचने और उड़ावनी पंखे का भी काम करती है।
 
विजय की इस कोशिश को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की संस्था डायरेक्टोरेट आफ राइस रिसर्च हैदराबाद ने पुरस्कृत किया है। श्री यादव सीमांत किसान हैं जिनसे पास पांच एकड़ से कम खेत है। वे इसमें 20 साल से धान और गेहूं की पैदावार ले रहे हैं।
 
केवल खेती के भरोसे घर नहीं चला पाने के कारण श्री यादव मोटरसाइकिल मैकेनिक का भी काम करते हैं। उन्होंने 12वीं तक पढ़ाई की है। उन्होंने दैनिक भास्कर को बताया कि धान पकने के बाद अक्सर कटाई के लिए मजदूरों की समस्या रहती है। छोटे किसान होने के कारण बाजार में उपलब्ध महंगा रीपर (धान काटने की मशीन) खरीदना उनके लिए संभव नहीं था।
 
एक बार पुरानी राजदूत मोटरसाइकिल बनाते समय उन्हें आइडिया सूझा। इसके बाद वे कबाड़ में बिकने वाली एक मोटरसाइकिल को मल्टीपरपज रीपर बनाने में जुट गए। दो साल की मेहनत के बाद उनकी मशीन तैयार हो गयी। वे अपने खेत में इसी से धान कटाई करते हैं। दूसरे किसान भी उनके रीपर को किराए पर ले जाते हैं। इसे स्टार्ट करने के लिए पेट्रोल की जरूरत पड़ती है, इसके बाद यह मिट्टी तेल से चलता है।
 
एक एकड़ धान को मजदूर काटते हैं तो आठ सौ रुपए खर्च आता है लेकिन श्री यादव का रीपर केवल एक लीटर से कम मिट्टी तेल में एक एकड़ फसल घंटेभर में काट लेता है। टाप गियर (3) में यह पानी खींचने और उड़ावनी पंखे का काम करता है। धान व गेहूं काटने के लिए फस्र्ट गियर पर चलाना पड़ता है। इसे बनाने में लगभग 35 हजार रुपए खर्च आया जबकि बाजार में रीपर की कीमत एक लाख रुपए के आसपास है।
 
चार किसानों को मिला सम्मान
 
हैदराबाद स्थित डायरेक्टोरेट आफ राइस रिसर्च ने नई सूझ वाला काम करने वाले देशभर के 25 किसानों को सम्मानित किया है। इनमें छत्तीसगढ़ के चार किसान शामिल हैं। सारंगढ़ के विजय यादव के अलावा मुंगेली के श्रीकांत गोवर्धन, धरमजयगढ़ के मोहन गभेल और दुर्ग के हेमाशंकर चौधरी को भी राइस इनोवेशन 2011 अवार्ड दिया गया है।
 
श्री गोवर्धन ने बैलगाड़ी से उन्नत बियासी विधि तैयार की है। श्री गभेल ने खेती में पानी की बचत करने वाली तकनीक विकसित की है तो श्री चौधरी ने ट्रैक्टर के बैक गियर में रीपर लगाकर धान कटाई का यंत्र तैयार किया है। इन सभी किसानों को आज राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष श्याम बैस ने शॉल व श्रीफल देकर सम्मानित किया।

किसान का कमाल, बनाया 'चमत्कारी' मशीन


रायपुर।सारंगढ़ के किसान विजय यादव ने पुरानी मोटर साइकिल से धान काटने की मशीन बनाई है। मिट्टी तेल से चलने वाली यह मशीन एक घंटे में एक एकड़ धान काट लेती है। यह पानी खींचने और उड़ावनी पंखे का भी काम करती है।
 
विजय की इस कोशिश को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की संस्था डायरेक्टोरेट आफ राइस रिसर्च हैदराबाद ने पुरस्कृत किया है। श्री यादव सीमांत किसान हैं जिनसे पास पांच एकड़ से कम खेत है। वे इसमें 20 साल से धान और गेहूं की पैदावार ले रहे हैं।
 
केवल खेती के भरोसे घर नहीं चला पाने के कारण श्री यादव मोटरसाइकिल मैकेनिक का भी काम करते हैं। उन्होंने 12वीं तक पढ़ाई की है। उन्होंने दैनिक भास्कर को बताया कि धान पकने के बाद अक्सर कटाई के लिए मजदूरों की समस्या रहती है। छोटे किसान होने के कारण बाजार में उपलब्ध महंगा रीपर (धान काटने की मशीन) खरीदना उनके लिए संभव नहीं था।
 
एक बार पुरानी राजदूत मोटरसाइकिल बनाते समय उन्हें आइडिया सूझा। इसके बाद वे कबाड़ में बिकने वाली एक मोटरसाइकिल को मल्टीपरपज रीपर बनाने में जुट गए। दो साल की मेहनत के बाद उनकी मशीन तैयार हो गयी। वे अपने खेत में इसी से धान कटाई करते हैं। दूसरे किसान भी उनके रीपर को किराए पर ले जाते हैं। इसे स्टार्ट करने के लिए पेट्रोल की जरूरत पड़ती है, इसके बाद यह मिट्टी तेल से चलता है।
 
एक एकड़ धान को मजदूर काटते हैं तो आठ सौ रुपए खर्च आता है लेकिन श्री यादव का रीपर केवल एक लीटर से कम मिट्टी तेल में एक एकड़ फसल घंटेभर में काट लेता है। टाप गियर (3) में यह पानी खींचने और उड़ावनी पंखे का काम करता है। धान व गेहूं काटने के लिए फस्र्ट गियर पर चलाना पड़ता है। इसे बनाने में लगभग 35 हजार रुपए खर्च आया जबकि बाजार में रीपर की कीमत एक लाख रुपए के आसपास है।
 
चार किसानों को मिला सम्मान
 
हैदराबाद स्थित डायरेक्टोरेट आफ राइस रिसर्च ने नई सूझ वाला काम करने वाले देशभर के 25 किसानों को सम्मानित किया है। इनमें छत्तीसगढ़ के चार किसान शामिल हैं। सारंगढ़ के विजय यादव के अलावा मुंगेली के श्रीकांत गोवर्धन, धरमजयगढ़ के मोहन गभेल और दुर्ग के हेमाशंकर चौधरी को भी राइस इनोवेशन 2011 अवार्ड दिया गया है।
 
श्री गोवर्धन ने बैलगाड़ी से उन्नत बियासी विधि तैयार की है। श्री गभेल ने खेती में पानी की बचत करने वाली तकनीक विकसित की है तो श्री चौधरी ने ट्रैक्टर के बैक गियर में रीपर लगाकर धान कटाई का यंत्र तैयार किया है। इन सभी किसानों को आज राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष श्याम बैस ने शॉल व श्रीफल देकर सम्मानित किया।