Saturday, 1 October 2016

दस दिनों तक होगी घरों में नौ देवियों की पूजा-अर्चना

 शनिवार से पावन शारदीय नवरात्र के साथ अधिकांश हिंदू घरों में मां दुर्गा का वास होगा। मां इन घरों में साख (खेत्री)के रूप में वास करेंगी। नौ दिनों तक भक्त मां के विभिन्न स्वरूपों का ध्यान कर उनकी पूजा-अर्चना करेंगे।
शारदीय नवरात्र के नौ दिनों का ¨हदू समुदाय के लिए विशेष महत्व है। इस बार एक अक्टूबर शनिवार से पावन शारदीय नवरात्र प्रारंभ हो रहा है। शनिवार को हिंदू परिवारों में लोग विधिवत रूप से अपने घरों में मां का आह्वान कर साख लगाएंगे। नौ नवरात्र विभिन्न नौ देवियों को समर्पित होते हैं और प्रत्येक नवरात्र पर लोग उस दिन की देवी स्वरूप का ध्यान कर पूजा-अर्चना व उपासना करते हैं। नवरात्र पूजन के साथ उपवास का भी विशेष महत्व होता है, जिसके चलते लोग अपनी शारीरिक क्षमता के मुताबिक पूरे नवरात्र में उपवास करते हैं, या फिर शुरू और अंत में एक से दो नवरात्र रखते हैं।
साख लगाने के लिए पूरा दिन शुभ
ज्योतिष वाचस्पति के मुताबिक शनिवार से शारदीय नवरात्र प्रारंभ हो रहा है। इस बार प्रतिपदा यानि पहला नवरात्र दो दिन पहली व दो अक्तूबर को है। पहली अक्टूबर को सूर्योदय से लेकर पूरा दिन व दो अक्तूबर को सुबह 7:40 तक प्रतिपदा है। उन्होंने कहा कि पहली अक्टूबर को साख लगाने के लिए पूरा दिन शुभ है। मगर अभिजित मुहुर्त सुबह 11:15 से लेकर 12 बजे तक साख लगाने का अति शुभ मुहूर्त है।
अष्टमी रविवार और नौवीं सोमवार को
ज्योतिष वाचस्पति के मुताबिक नवरात्र में तिथि वृद्धि शुभ होती है। इस बार एक नवरात्र की वृद्धिअष्टमी नौ अक्टूबर रविवार को है। इस दिन सुबह 9:45 बजे तक भद्राकाल है। उसके बाद पूरा दिन अष्टमी पूजन व साख विसर्जन के लिए शुभ है। हालांकि साख विसर्जन में वार का विचार नहीं करते हैं, लेकिन यदि कोई विचार करता है तो वह नवमीं के दिन साख विसर्जन कर सकता है। नवमी दस अक्टूबर सोमवार को है। सूर्योदय के बाद से सारा दिन नवमी पूजन व साख विसर्जन के लिए शुभ है।
कलश स्थापित करने व साख लगाने की विधि
धार्मिक कार्यो में कलश (घट) स्थापना का विशेष महत्व है। नवरात्र पूजन के लिए साख व कलश ईश्वर के स्थान माने जाने वाली उत्तर-पूर्व दिशा, जिसे ईशान कोण कहा जाता है, में स्थापित किया जाना चाहिए। कलश को साख वाले पात्र के मध्य में या उसके बाहर दोनों विधि से स्थापित किया जा सकता है। साख वाले पात्र में कलश स्थापना को अधिक शुभ माना जाता है। मां नवदुर्गा का ध्यान कर मिंट्टी के बर्तन या तांबा, पीतल, चांदी या अन्य किसी धातु के पात्र में साख लगाएं। कलश रखें व मौली बांध कर तिलक लगाएं। फिर कलश में जल, गंगाजल, तिलक, दुर्वा, सुपारी, पंचरत्नी, चुटकी भर तुलसी की मिंट्टी, कुशा का टुकड़ा, धातु का कोई सिक्का डालें। समस्त देवी-देवताओं का आह्वान कर उसमें आम के नौ पत्ते डालें। इन पत्तों पर चावल से भरा डूना रखें। नारियल को मौली बांध कर और तिलक लगा कर डूने पर रखें। साख वाले बर्तन में कलश स्थापना न करने वाले साख के पात्र व जोत जलाने वाले स्थान के बीच दुर्वा और फूलों का आसन बना कर कलश को उक्त विधि से स्थापित करें।
नारियल का मुख रखें सामने
ज्योतिष वाचस्पति ने बताया कि नारियल को कलश पर सही तरह से स्थापित करना चाहिए। अक्सर लोग नारियल का नुकीला भाग ऊपर रख कर उसे कलश पर स्थापित करते हैं। पूजन में नारियल की सही स्थापना न होने से वह अशुभ फल कारक होता है। ज्योतिष शास्त्रों में वर्णित है कि नारियल का मुख पूर्व की ओर रखने से धन की हानि होती है। ऊपर की ओर रखने से रोग लगते हैं, नीचे की तरफ करने से शत्रु बढ़ते हैं। इसलिए नारियल का मुख सदैव अपनी तरफ रख कर उसे कलश पर स्थापित करना चाहिए। जिस तरफ से नारियल पेड़ से जुड़ा होता है, वह नारियल का मुख होता है।
किस दिन है कौन सा नवरात्र
नवरात्र तारीख वार
प्रतिपदा 1 व 2 अक्टूबर (शनिवार व रविवार)
द्वितीया 3 अक्टूबर (सोमवार)
तृतीया 4 अक्टूबर (मंगलवार)
चतुर्थी 5 अक्टूबर (बुधवार)
पंचमी 6 अक्टूबर (वीरवार)
षष्ठी 7 अक्टूबर (शुक्रवार)
सप्तमी 8 अक्टूबर (शनिवार)
अष्टमी 9 अक्टूबर (रविवार)
नवमी 10 अक्टूबर (सोमवार)

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