Saturday, 1 August 2015

जवानी में बुढ़ापे का शिकार बनाती ये 5 बीमारियां, सावधानी रखना है जरूरी

लाइफस्टाइल डेस्कः दिल से जुड़े रोग, पार्किंसन्स, डायबिटीज व मेमोरी लॉस तब होते थे, जब व्यक्ति रिटायरमेंट के करीब पहुंचता था। आज तो ये करियर की शुरुआत या बीच में ही लोगों को घेरने लगे हैं। रिसर्च से साबित हो चुका है कि युवा न तो खानपान पर ध्यान दे पा रहे हैं, न ही नींद पूरी ले रहे हैं। इससे बढ़ रहे तनाव का सेहत पर बहुत ही बुरा असर पड़ रहा है।
हार्ट, मेमोरी और शुगर से जुड़ी बीमारियां पहले उम्रदराज लोगों को ही होती थीं, लेकिन अब यह धारणा गलत साबित हो रही है। आज 40 से कम उम्र के लोग भी बुढ़ापे में होने वाली इन बीमारियों से जूझ रहे हैं।
हार्ट डिसीज
पहले हार्ट से जुड़ी बीमारियां आमतौर पर अधेड़ उम्र में ही होती थीं, लेकिन अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी की एक रिसर्च बताती है कि अब 30 से 35 साल के युवाओं में दिल संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, यंग एज में ही हार्ट डिसीज की समस्या पूरी दुनिया में बढ़ती जा रही है और इसके पीछे लाइफस्टाइल में आया चेंज है।
सबसे बड़ा कारण- हार्टकेयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के मुताबिक इसकी वजह तनाव, असंतुलित भोजन, कम सो पाना और शराब व तंबाकू का अधिक यूज करना है। करियर की महत्वाकांक्षा और प्रतिस्पर्धा के कारण युवा जबरदस्त तनाव से गुजर रहे हैं।
30 एमएमएचजी या इससे ऊपर ब्लड प्रेशर बना रहा तो वो हाई ब्लड प्रेशर की श्रेणी में आ जाता है।
Other diseases: डायबिटीज, पार्किंसन्स, याददाश्त कम होना, थायरॉइड

मुंबई में किसिंग वाले पोस्टरों की बाढ़, किसी को नहीं पता किसने लगाए

मुंबई: शहर के बांद्रा इलाके के लोग आजकल एक अजीबोगरीब समस्या से परेशान हैं। पूरे इलाके में किसी ने ऐसे पोस्टर्स लगा दिए हैं, जिनमें कुछ विदेशी कपल किस करते नजर आ रहे हैं। खबर के मुताबिक, ये पोस्टर तीन तरह के हैं। जिगजैग रोड, टर्नर रोड, पाली हिल और पाली मार्केट में ये पोस्टर नजर आ रहे हैं। किसी को नहीं पता कि इन्हें किसने लगाया।
लोगों ने जताया विरोध
एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक, मुश्ताक मोथा नाम के एक डॉक्टर ने कहा, ''यह हमारी संस्कृति नहीं है। यह क्या हो रहा है? मैं यह देखकर हैरान हूं। जिसने भी ऐसा किया है, उसे सजा मिलनी चाहिए। इस इलाके में कई शरारती लोग हैं। किसी असामाजिक तत्व का यह काम लगता है।'' एक अन्य स्थानीय महिला पार्वती ओमकारा ने कहा, ''ये पोस्टर बीते रविवार से दिख रहे हैं। लोग सिर्फ इन्हें घूर रहे हैं। कोई इन्हें हटा नहीं रहा। ये बेहद अश्लील हैं और स्कूल व कॉलेज जाने वाले बच्चों के लिए सही नहीं हैं।'' टीना डिसूजा ने कहा, ''बांद्रा कभी ऐसा नहीं था। पोस्टरों में विदेशी दिख रहे हैं, जो हमारी सड़कों पर किस कर रहे हैं। यह एक तरह से हमारा अपमान है।''
कुछ ने जताया समर्थन
कॉलेज स्टूडेंट मार्था फर्नांडीज ने बताया, ''लोग फिल्मों में और सार्वजनिक जगह पर किस करते ही हैं। यह कला का कोई बुरा रूप नहीं है। दुनिया भर में किस करना प्यार के इजहार का एक तरीका है। इसमें अश्लील कुछ भी नहीं है।'' एक एमबीए स्टूडेंट शान खान ने कहा कि यह एक आर्ट है और इसकी तारीफ होनी चाहिए।
क्या कहना है अफसरों का
इलाके के सुरक्षाकर्मियों के अलावा, नगर निगम के अफसरों को भी नहीं पता कि ये पोस्टर किसने लगवाए। इलाके के डिप्टी म्यूनिसिपल कमिश्नर रामदास ने कहा कि वे इस बारे में वार्ड अफसर को बताएंगे और उन्हें जल्द से जल्द उतार लिया जाएगा। पोस्टर लगवाना गैरकानूनी है और खास तौर अश्लील पोस्टर।
आर्ट ग्रुप का काम?
एक वेबसाइट का दावा है कि यह लिमिट्स विदिन नाम के आर्ट ग्रुप का काम है। इस ग्रुप का मकसद इस बात की चर्चा को हवा देना है कि पब्लिक में क्या करना सही है और क्या गलत? हालांकि, ग्रुप की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की गई है।

लैंड डील: कपल को होना पड़ा अलग, पति आया भारत, बांग्लादेश में रुक गई पत्नी

कूच बिहार (प. बंगाल). भारत और बांग्लादेश के बीच लैंड डील के तहत भले ही 51,549 लोगों को अपने मुल्क की पहचान मिल गई, लेकिन इसके कारण एक कपल को अलग भी होना पड़ा। पति भारत में रहना चाहता था, जबकि पत्नी ने बांग्लादेश की नागरिकता लेने का फैसला लिया। इसके कारण डासिआरछारा के रहने वाले सरवार आलम और मरीना बेगम की चार साल पुरानी शादी टूट गई।
डासिआरछारा बांग्लादेश में 51 भारतीय इनक्लेव में से एक है, जिसके लोगों ने 31 जुलाई की आधी रात को भारत-बांग्लादेश में से अपना देश चुना। डासिआरछारा अब बांग्लादेश में आ गया है। वहीं, 111 बांग्लादेशी इनक्लेव अब भारत का हिस्सा हैं और 16,000 बांग्लादेशी अब भारतीय बन गए हैं। 

आखिरी वक्त में बदला फैसला
सरवार और मरीना दोनों की उम्र 20 साल है। सभी लोगों की तरह इन्हें भी इस बात की छूट थी कि वे भारत-बांग्लादेश में से किसी एक का चुनाव करें। यह प्रॉसेस 6 से 16 जुलाई के भीतर पूरी हुई। जानकारी के मुताबिक, कपल ने 9 जुलाई को भारत की नागरिकता अपनाने का फैसला लिया था, लेकिन अंतिम समय में सरवार की पत्नी मरीना ने अपना विचार बदल दिया। उसने अधिकारियों को बताया कि वह बांग्लादेश में ही रहना चाहती है। साउथ ब्लॉक के एक अधिकारी ने कहा कि चूंकि हमें यह बात 16 जुलाई के पहले बताई गई थी, इसलिए हमने इसे माना। इस कपल के दो बच्चे भी हैं। मरीना ने बांग्लादेश में ही रहने का फैसला लिया, जबकि आलम भारत में रहना चाहते हैं। डील पूरी हो जाने के बाद अब आलम को भारत आना होगा। साउथ ब्लॉक के अफसरों के सामने एक नहीं, ऐसे कई केस आए जहां किसी फैमिली के कुछ मेंबर बांग्लादेश में ही रहना चाहते थे और कुछ भारत में।
भारत इनक्लेव से कोई नहीं गया बांग्लादेश
सूत्रों का कहना है कि बांग्लादेश में भारत के इनक्लेव से 222 फैमिली के 979 लोग भारत में आ गए और उन्होंने यहां की नागरिकता ली है। 222 फैमिली में 146 हिंदू हैं और 76 मुस्लिम। वहीं, भारत में बांग्लादेश के 111 इनक्लेव में कोई भी भारत से बांग्लादेश जाने को तैयार नहीं हुआ।
दुर्गापूजा तक पूरी हो जाएगी प्रॉसेस
सूत्रों का कहना है कि बांग्लादेश से भारत जाने की यह प्रॉसेस मानसून के बाद ही पूरी हो सकेगी। एक अफसर ने बताया, ''लोकल अथॉरिटी का कहना है कि अक्टूबर में पड़ने वाले दुर्गापूजा के वक्त बांग्लादेश से भारत आने का बेस्ट टाइम होगा। डील पूरी हो जाने के बाद सभी लोग जिन्होंने भारत में रहना पसंद किया गया है, अगले महीने से आना शुरू कर देंगे।''

बीजेपी ने लगवाए पोस्टर, 'केजरीवाल सर' से मांगा विज्ञापन के खर्च का हिसाब

नई दिल्ली. राजधानी में आप और बीजेपी के बीच पोस्टर वॉर जारी है। केजरीवाल सरकार द्वारा पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधने वाले पोस्टर लगवाए जाने के बाद अब बीजेपी ने पलटवार किया है। बीजेपी ने कुछ पोस्टर लगवाकर 'केजरीवाल सर' से विज्ञापनों पर किए जाने वाले खर्च पर जवाब मांगा है। बता दें कि इससे पहले सीएम अरविंद केजरीवाल की ओर से दिल्ली में लगवाए गए पोस्टर व होर्डिंग्स में 'प्रधानमंत्री सर' से दिल्ली पुलिस का कंट्रोल उन्हें सौंप दिए जाने की डिमांड की गई थी।
क्या है बीजेपी के पोस्टर्स में
दिल्ली की सड़कों पर 'केजरीवाल सर' से जवाब मांगते हुए ये पोस्टर प्रदेश बीजेपी उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल की तरफ से लगवाए गए हैं। पोस्टरों में दिल्ली सरकार के 526 करोड़ के विज्ञापन बजट का जिक्र करते हुए कहा गया है कि इतने पैसे से महिला सुरक्षा के लिए 5 लाख सीसीटीवी कैमरा लगाए जा सकते थे। 200 नए स्कूल या 50 कॉलेज खोले जा सकते थे। 2000 नई बसें खरीदी जा सकती थीं। 1000 कॉलोनियों में पीने के पानी की व्यवस्था की जा सकती थी। 5 लाख लोगों को पेंशन दी जा सकती थी। इन पोस्टर्स के जरिए बीजेपी ने दिल्ली सरकार को इस पैसे का जनहित के लिए इस्तेमाल करने के कई सुक्षाव दिए हैं।
राजनीतिक रूप से बेरोजगार हो गई है बीजेपी
आप प्रवक्ता दिलीप पांडे ने कहा है कि पोस्टर बीजेपी की हताशा को दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता ने आप को जिस तरह का जनादेश दिया है उससे दिल्ली में बीजेपी के नेता बेरोजगार हो गए हैं। इसी हताशा में वे अजीब किस्म की राजनीति कर रहे हैं। गांधी ने कहा कि हमें इससे कुछ फर्क नहीं पड़ता। दिल्ली सरकार दिल्ली की जनता के हित में काम करती रहेगी।

सांसद ने लिखित सवाल पूछा- देश में कितने कब्ज पीड़ित? मंत्री ने जवाब दिया- नहीं पता

नई दिल्ली. मानसून सेशन के दो सप्‍ताह में एक भी दिन सही तरीके से नहीं चलने वाली संसद में एआईएडीएमके सांसद ए.अरुणमोक्षीथिवन ने अजीब सवाल पूछा। उन्‍होंने लिखित सवाल पूछा कि देश में कब्‍ज (कॉन्‍सटिपेशन) से पीड़ित लोगों की संख्‍या क्‍या है और इस बारे में सरकार की प्लानिंग क्या है? हेल्थ मिनिस्ट्री ने इसका जवाब दिया और कहा कि ऐसी कोई स्टडी नहीं कराई।
कब्ज पर सांसद का क्या था सवाल
सांसद ए.अरुणमोक्षीथिवन ने सरकार से 'कब्ज' की बीमारी को लेकर अवेयरनेस फैलाने की प्लानिंग की भी जानकारी मांगी। आईडीएमके सांसद ने शहरी इलाकों में कब्जियत की समस्या से परेशान लोगों की तादाद और इस बीमारी को रोकने को लेकर उठाए जा रहे कदम के बारे में भी पूछा।
सरकार ने दिया जवाब
एआईएडीएम के सांसद ए.अरुणमोक्षीथिवन के सवाल का जवाब केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री श्रीपद नाइक ने दिया। शुक्रवार को जवाब में सरकार ने की ओर से उन्होंने बताया कि इस बारे में देश में कोई स्टडी नहीं की गई है। सरकार के पास ऐसा कोई आंकडा नहीं है जिससे बताया जा सके कि देश के शहरी इलाकों में कितने लोग 'क्रोनिक कब्ज' से पीड़ित हैं।
'राज्य का सब्जेक्ट है हेल्थ'
हेल्थ मिनिस्ट्री ने अपने जवाब में कहा कि हेल्थ राज्यों का मामला है। राज्य को अपने लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करानी चाहिए। साथ ही संबंधित डिपार्टमेंट को इस प्राब्लम का इलाज करने के लिए कहना चाहिए। नाइक ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार राज्य सरकार के हॉस्पिटल्स में फैसिलिटी बढ़ा रही है लेकिन अपने लोगों को हेल्थ रिलेटेड और उन्हें फिट रखने की जानकारी राज्य सरकारों को ही देनी होगी।

चार साल के बच्चे को ISIS आतंकी ने थमा दी तलवार, कहा-मां का सिर काट डालो

बेरुत। इराक की एक यजीदी महिला ने आतंकी संगठन आईएसआईएस की क्रूरता की नई कहानी सुनाई है। महिला ने बताया कि आतंकी उसके चार साल के बच्चे को ट्रेनिंग कैंप में ले गए। यहां उसे जबरन अरबी भाषा के अलावा कुरान और शरीयत की तालीम दी। इसके अलावा, हथियार चलाना भी सिखाया। हद तो तब हो गई जब आतंकियों ने उसके बेटे को तलवार देकर अपनी ही मां का सिर काटने के लिए कहा।
चार महीने बाद चंगुल से भागी
महिला का नाम बोहर (काल्पनिक नाम) है और वो उत्तरी इराक के दोहुक में एक रिफ्यूजी कैंप में रह रही है। ब्रिटिश वेबसाइट मेल ऑनलाइन को दिए इंटरव्यू में 35 साल की बोहर ने बताया कि उसके बेटे हामो (काल्पनिक नाम) और उसके तीन भाई-बहनों को पिछले साल अगस्त में सिंजार पर्वत से बंधक बनाया गया था। इन्हें 2000 यजीदियों के साथ बादुश और तल-अफर के बीच जेलों में बंधक बनाकर रखा गया था। चार महीने की यातना के बाद बोहर अपने बेटे के साथ आतंकियों की कैद से भागने में कामयाब रही।
क्या बताया महिला ने
महिला ने बताया, "मेरे बच्चे को कुरान पढ़ना और अरबी बोलना सिखाया गया। यह भी बताया गया कि तलवार कैसे चलाते हैं। आतंकी कहते थे कि हमें काफिरों के खिलाफ लड़ना है। एक बार आतंकी ने मेरे बेटे के हाथ में तलवार देकर कहा कि तुम्हे अपनी मां का सिर काटना है।" उसने बताया, ''बादुश जेल में उन्होंने हामो के दो बड़े भाई और एक बहन को भी बंधक बनाया था। बाद में वे उन्हें सीरिया ले गए। कुछ दोस्तों ने बताया कि आतंकी उन्हें रक्का ले गए हैं। मुझे उम्मीद है कि वे जिंदा होंगे।"
जेल के कड़े अनुभव
बोहर ने बताया, "तल-अफर जेल का अनुभव सबसे खराब था। आतंकी वाटर टैंक में पेशाब मिला देते थे और खाने के लिए घास देते थे। अगस्त में गठबंधन सेना के हवाई हमले के दौरान हालात और भी खराब हो गए। वे हमें बुरी तरह मारते थे। खासकर जब वो आसमान में अमेरिकी फाइटर जेट्स देखते थे।" आतंकी उनके खाने में मॉर्फीन मिला देते थे, ताकि वे नशे में रहें और भाग न सकें। भागने और मोबाइल इस्तेमाल की कोशिश करने वालों को मार डाला जाता था।

याकूब की पत्नी को MP बनाने की डिमांड करने वाले सपा नेता पर एक्शन, पद से हटाए गए

मुंबई. 1993 मुंबई बम धमाकों के दोषी याकूब मेमन को फांसी दिए जाने के बाद उसकी पत्नी राहीन को सांसद बनाने की डिमांड करने वाले सपा के प्रदेश उपाध्यक्ष मोहम्मद फारुक घोसी ने यूटर्न लिया है। घोसी ने शनिवार को कहा कि यह उनकी निजी राय थी। उधर, पार्टी ने इस बयान को लेकर एक्शन लेते हुए उन्हें पद से हटा दिया है। सपा ने कहा है कि उसका इस बयान से कोई लेना-देना नहीं है।बता दें कि घोसी ने अपनी इस मांग को लेकर मुलायम सिंह यादव को चिट्ठी भी लिखी थी।
चिट्ठी में क्या लिखा था एसपी नेता ने
सपा नेता ने लिखा था, ''मुंबई बम धमाके के मामले में याकूब के साथ उसकी पत्नी को भी अरेस्ट किया गया था। हालांकि, फिर राहीन को बरी कर दिया गया, लेकिन तब तक वह कई सालों तक जेल में रही। कितनी तकलीफ सही होगी। हम समाजवादियों की एक खूबी है कि मन में जो बात रहे, उसे कहना जरूरी है। आप हमारे नेता हैं, वह भी समाजवादी जिन्होंने मजलूम और असहाय लोगों का हमेशा साथ दिया है। आज मुझे राहीन याकूब मेमन असहाय लग रही है और इस देश में कितने असहाय होंगे, जिनकी लड़ाई हम सबको लड़नी है। मुसलमान आज अपने आपको असहाय समझ रहा है। हमें साथ देना चाहिए और राहीन याकूब को संसद सदस्य बनाकर मजलूम व असहाय लोगों की आवाज बनने देना चाहिए।''
वीडियो फुटेज खंगाल रही है पुलिस
इस बीच, खबर है कि 30 जुलाई को याकूब के जनाजे पर मुंबई पुलिस की कड़ी नजर थी। अपराधियों के आने की आशंका को देखते हुए मुंबई पुलिस ने याकूब के जनाजे का वीडियो भी बनाया है। गुरुवार को जिस वक्त याकूब के लिए माहिम दरगाह पर दुआ पढ़ी गई और जब उसे मरीन लाइन्स के बड़ा कब्रिस्तान में दफनाया गया, उस वक्त हजारों लोगों की भीड़ थी। पुलिस को इस बात की आशंका थी कि जनाजे में जरूर कई अपराधी आएंगे, इसके चलते ही जनाजे का वीडियो बनाया गया। जानकारी के मुताबिक, जनाजे के बाद पुलिस उस वीडियो के फुटेज की स्कैनिंग कर रही है। याकूब के जनाजे में दस हजार से ज्यादा लोगों की भीड़ जुटी थी। एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, मेमन को फांसी दिए जाने से पहले मुंबई पुलिस ने आपराधिक रिकॉर्ड रखने वाले 526 लोगों को हिरासत में ले लिया था।
क्या था पुलिस का प्लान
याकूब के शव को भले ही फैमिली को दे दिया गया था, लेकिन पुलिस ने पूरी प्लानिंग के साथ ऐसा किया था। उसके शव को तुंरत दफनाने के लिए कहा गया था। पहले ही अंडरटेकिंग ले ली गई थी कि शवयात्रा नहीं निकाली जाएगी। प्रशासन ने ऐसा इंतजाम किया कि याकूब के शव को तुरंत मुंबई लाया गया। जब 12.30 बजे उसका शव पहुंचा तो मुंबई एयरपोर्ट पर कॉरपोरेट एविएशन टर्मिनल से एंबुलेंस निकाली गई। बता दें कि इस रूट का इस्तेमाल केवल वीआईपी के लिए होता है। मुंबई पुलिस के अलावा कुल 35 हजार से ज्यादा जवान तैनात किए गए थे। इनमें रैपिड एक्शन फोर्स और सेंट्रल फोर्सेस के जवान भी थे।