खेल डेस्क. वर्ल्ड कप 2015 के पहले क्वार्टर फाइनल मुकाबले में साउथ
अफ्रीका ने श्रीलंका को 9 विकेट से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया
है। श्रीलंकाई टीम 37.2 ओवरों में 133 रन पर ऑल आउट हो गई। जवाब में साउथ
अफ्रीका ने एक विकेट खोकर टारगेट को 18 ओवर में ही हासिल कर लिया। सिडनी
में दोनों ही टीम टॉस जीतकर पहले बैटिंग करना चाहती थी। यहां किस्मत ने
श्रीलंका का साथ दिया, बावजूद इसके उसने आज बहुत बुरा खेल दिखाया। पहले
बैटिंग करने का फायदा उसने बिलकुल नहीं उठाया और ऐसा लगा, मानो वह
अतिआत्मविश्वास का शिकार हो गई हो। ठीक इसके विपरीत, साउथ अफ्रीका ने हर
क्षेत्र में काफी बढ़िया परफॉर्मेंस किया
. ओपनिंग जोड़ी से छेड़छाड़
श्रीलंकाई कप्तान एंजेलो मैथ्यूज को एक्सपेरिमेंट करना भारी पड़ गया। उन्होंने ओपनिंग जोड़ी से छेड़छाड़ कर कर आज सबसे बड़ी गलती की। उन्होंने उस ओपनिंग जोड़ी को बदल दिया, जिसने 6 में से 3 लीग मैचों में टीम को अच्छी शुरुआत दिलाई थी। यह ओपनिंग जोड़ी थी थिरिमाने और तिलकरत्ने दिलशान की। इन दोनों ने पहले लीग मुकाबले में न्यूजीलैंड के खिलाफ 67 रन, दूसरे मुकाबले में अफगानिस्तान के खिलाफ 0, तीसरे मुकाबले में बांग्लादेश के खिलाफ 122 रन, चौथे मुकाबले में इंग्लैंड के खिलाफ 100 रन, पांचवें मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 5 रन और छठे मुकाबले में स्कॉटलैंड के खिलाफ 21 रनों की साझेदारी की। लेकिन मैथ्यूज ने आज साउथ अफ्रीका के खिलाफ दिलशान के साथ ओपनिंग करने के लिए 6 नंबर के बैट्समैन कुशल परेरा को भेज दिया। इसके पीछे उनकी स्ट्रैटजी तेज रन बनाने की थी, लेकिन यह देखना भी जरूरी होता है कि जिस बैट्समैन को प्रमोट किया जा रहा है, क्या वह इतने बड़े मुकाबले का दबाव झेल सकता है? परेरा मैच की पहली बॉल से ही हिट करने के चक्कर में लग गए, पर एक बॉल भी वे कलेक्ट नहीं कर पा रहे थे। नतीजतन, वे 10 गेंदों में तीन रन बनाकर एबॉट का शिकार बन गए। क्वार्टर फाइनल में श्रीलंका की ओपनिंग जोड़ी तीन रन पर ही टूट गई।
. ओपनिंग जोड़ी से छेड़छाड़
श्रीलंकाई कप्तान एंजेलो मैथ्यूज को एक्सपेरिमेंट करना भारी पड़ गया। उन्होंने ओपनिंग जोड़ी से छेड़छाड़ कर कर आज सबसे बड़ी गलती की। उन्होंने उस ओपनिंग जोड़ी को बदल दिया, जिसने 6 में से 3 लीग मैचों में टीम को अच्छी शुरुआत दिलाई थी। यह ओपनिंग जोड़ी थी थिरिमाने और तिलकरत्ने दिलशान की। इन दोनों ने पहले लीग मुकाबले में न्यूजीलैंड के खिलाफ 67 रन, दूसरे मुकाबले में अफगानिस्तान के खिलाफ 0, तीसरे मुकाबले में बांग्लादेश के खिलाफ 122 रन, चौथे मुकाबले में इंग्लैंड के खिलाफ 100 रन, पांचवें मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 5 रन और छठे मुकाबले में स्कॉटलैंड के खिलाफ 21 रनों की साझेदारी की। लेकिन मैथ्यूज ने आज साउथ अफ्रीका के खिलाफ दिलशान के साथ ओपनिंग करने के लिए 6 नंबर के बैट्समैन कुशल परेरा को भेज दिया। इसके पीछे उनकी स्ट्रैटजी तेज रन बनाने की थी, लेकिन यह देखना भी जरूरी होता है कि जिस बैट्समैन को प्रमोट किया जा रहा है, क्या वह इतने बड़े मुकाबले का दबाव झेल सकता है? परेरा मैच की पहली बॉल से ही हिट करने के चक्कर में लग गए, पर एक बॉल भी वे कलेक्ट नहीं कर पा रहे थे। नतीजतन, वे 10 गेंदों में तीन रन बनाकर एबॉट का शिकार बन गए। क्वार्टर फाइनल में श्रीलंका की ओपनिंग जोड़ी तीन रन पर ही टूट गई।
2. गैर जिम्मेदराना बैटिंग
श्रीलंकाई टीम के बैट्समैन ने आज शुरुआत से ही ऐसा बिलकुल नहीं खेला, जैसा उन्होंने लीग मैच में खेला था। उनकी बॉडी लैंग्वेज ऐसी लग रही थी, मानो वे किसी हड़बड़ाहट में हों। चाहे वे परेरा (3) हों, दिलशान (0) हों, जयवर्धने (4) हों या फिर कप्तान मैथ्यूज (19) हों। सभी बैट्समैन गैर जिम्मेदराना शॉट खेलकर आउट हुए। पहला विकेट जल्दी गिरने के बाद भी दिलशान संभले नहीं और लंबे शॉट खेलने के चक्कर में लग गए और आउट होकर पवेलियन लौट गए। ऐसा ही कुछ जयवर्धने और मैथ्यूज के साथ भी हुआ। पुछल्ले बैट्समैन पर दबाव इतना था कि वे बस आए और चलते बने।
श्रीलंकाई टीम के बैट्समैन ने आज शुरुआत से ही ऐसा बिलकुल नहीं खेला, जैसा उन्होंने लीग मैच में खेला था। उनकी बॉडी लैंग्वेज ऐसी लग रही थी, मानो वे किसी हड़बड़ाहट में हों। चाहे वे परेरा (3) हों, दिलशान (0) हों, जयवर्धने (4) हों या फिर कप्तान मैथ्यूज (19) हों। सभी बैट्समैन गैर जिम्मेदराना शॉट खेलकर आउट हुए। पहला विकेट जल्दी गिरने के बाद भी दिलशान संभले नहीं और लंबे शॉट खेलने के चक्कर में लग गए और आउट होकर पवेलियन लौट गए। ऐसा ही कुछ जयवर्धने और मैथ्यूज के साथ भी हुआ। पुछल्ले बैट्समैन पर दबाव इतना था कि वे बस आए और चलते बने।
3. जरूरत से अधिक स्लो बैटिंग
श्रीलंका के दो विकेट सिर्फ 4 रन पर ही गिर गए। इसका नतीजा यह हुआ कि कुमार संगकारा और लाहिररू थिरिमाने ने संभल-संभलकर खेलना शुरू किया। थिरिमाने धीरे-धीरे लय में लौट रहे थे, लेकिन लगातार चार सेन्चुरी लगाने वाले कुमार संगकारा जरूरत से ज्यादा धीमी बैटिंग कर रहे थे। उन्होंने 96 गेंदें खेलीं और 46.87 की स्ट्राइक रेट से सिर्फ 45 रन बनाए। इसका नतीजा यह हुआ कि पूरी टीम पर विकेट बचाने का दबाव तो था ही, रन बनाने का भी दबाव बढ़ गया। बल्ले से रन नहीं निकल रहे थे, नतीजतन गलतियां शुरू हो गईं और पूरी श्रीलंकाई टीम 37.2 ओवरों में 3.56 की औसत से सिर्फ 133 रन बनाकर आउट हो गई।
श्रीलंका के दो विकेट सिर्फ 4 रन पर ही गिर गए। इसका नतीजा यह हुआ कि कुमार संगकारा और लाहिररू थिरिमाने ने संभल-संभलकर खेलना शुरू किया। थिरिमाने धीरे-धीरे लय में लौट रहे थे, लेकिन लगातार चार सेन्चुरी लगाने वाले कुमार संगकारा जरूरत से ज्यादा धीमी बैटिंग कर रहे थे। उन्होंने 96 गेंदें खेलीं और 46.87 की स्ट्राइक रेट से सिर्फ 45 रन बनाए। इसका नतीजा यह हुआ कि पूरी टीम पर विकेट बचाने का दबाव तो था ही, रन बनाने का भी दबाव बढ़ गया। बल्ले से रन नहीं निकल रहे थे, नतीजतन गलतियां शुरू हो गईं और पूरी श्रीलंकाई टीम 37.2 ओवरों में 3.56 की औसत से सिर्फ 133 रन बनाकर आउट हो गई।
विशेषज्ञों ने क्या कहा...
"आज साउथ अफ्रीका के सबसे कमजोर बॉलर जेपी डुमिनी ने एक ऐसी टीम के
खिलाफ शानदार बॉलिंग की, जो स्पिनर्स को बहुत अच्छे ढंग से खेलने के लिए
जानी जाती है। वर्ल्ड कप से आज एक उपमहाद्वीप बाहर हो गया, कल एक और बाहर
हो जाएगा और उसके अगले दिन भी एक बाहर हो जाएगा। इस ट्वीट को रिफरेंश के
तौर पर रख सकते हैं।" @आकाश चोपड़ा
"विश्वास करना मुश्किल है कि एक मजबूत बैटिंग लाइन-अप वाली टीम ऐसे
लड़खड़ा जाएगी। श्रीलंका के बैट्समैन साउथ अफ्रीकी बॉलर्स के प्रेशर को झेल
नहीं सके। उनकी कमी सामने आ गई।"
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