Sunday, 29 March 2015

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ये 6 गलतियां दुल्हनों पर पड़ सकती हैं भारी


तैयारियां ज़रूरी हैं और खासकर अगर आप होने वाली दुल्हन हैं तो. Facials, clean-ups और एक नया skincare regime ना सिर्फ आपको अच्छा दिखने में मदद करते हैं बल्कि आपकी शादी पर आपकी छुपी हुई खूबसूरती बाहर लाने में मदद करते हैं. अरे भई उस दिन आपका शानदार दिखना बेहद ज़रूरी है र उसके बाद भी हर दिन. अपनी ज़िंदगी के इस सबसे खास मौके पर आपको बचना है कुछ आम गलतियों से. तो ध्यान रखें इस लिस्ट में कही बातों का.
  1. बिना trial के ना लें makeup artist सबसे अच्छे makeup artists भी गलतियां कर सकते हैं. इसलिए हमेशा अपना wedding look पहले ही try कर लें ये जानने के लिए कि आप कैसी लगेंगी. क्या ये सही रंग है? क्या ये सही से मिला हुआ है? क्या ये मेरे Sabyasachi लहेंगे के साथ अच्छा लगेगा? सब पहले से ही जान लीजिए.
  2. शादी से दो दिन पहले wax, thread या shave ना करें – इन सबमें से कुछ भी करवाना आपकी स्किन के लिए मुसीबत का सबब बन सकता है. ये सारी चीज़ें शादी से कुछ दिन पहले करवा लेने में ही समझदारी है. जिससे की आपकी त्वचा को आराम मिल सके और इससे हुई redness भी खत्म हो जाए.
  3. चेहरे का ध्यान रखना और बाकी शरीर को नज़रअंदाज़ करना – हम में से ज़्यादातर लोग अपने चेहरे पर और शादी पर कैसा दिखना है इस पर ज़्यादा ध्यान देते हैं और बाकी शरीर को नज़रअंदाज़ करते हैं. याद रखें की आपके शरी को सबसे ज़्यादा देखभाल की ज़रूरत है. त्वचा की नमी बनाए रखने के लिए एक अच्छे तेल का इस्तेमाल करें, full body massage कराएं और वो सब करें जिसकी आपके शरीर को ज़रूरत है.
  4. शादी के दिन कुछ नया try ना करें - Violet lipstick, electric blue liner, ढेर सारा highlighter, बहुत सारी fake lashes – शादी के दिन कुछ भी नया या experimental try ना करें. ये बहुत बड़ा रिस्क है क्योंकि ये अच्छा भी लग सकता है और खराब भी.
  5. शादी से एक दिन पहले ना कराएं bikini wax ये एरिया काफी sensitive है और इसमें सूजन हो सकती है. Bikini wax से आपको irritation हो सकती है और ये आपके उन भागों में तकलीफ पैदा कर सकती है इसलिए शादी से तुरंत पहले ना करा कर कम से कम एक हफ्ते पहले कराएं.
  6. कभी भी नॉर्मल मेकप ना खरीदें – शादी के लिए long-lasting और waterproof मेकप खरीदें. क्योंकि आपको घंटों तक खड़े रहना पड़ सकता है और बहुत सारा पसीना भी हो सकता है तो आपको ज़रूरत होगी ऐसे मेकप की जो देर तक चले और गर्म lights के नीचे खराब ना हो.

Saturday, 28 March 2015

बोल्ट और साउदी की सफलता का राज उनकी गहरी दोस्ती

आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप में अजेय रही कीवी टीम के दो तेज गेंदबाज टिम साउदी और ट्रेंट बोल्ट ने मिलकर विरोधी बल्लेबाजों को खूब परेशान किया. साउदी ने कहा कि वह और उनके साथ नई गेंद संभालने वाले बोल्ट की मैदान पर सफलता का राज दोनों के बीच गहरी दोस्ती और एक दूसरे को अच्छी तरह से समझना है.
बोल्ट और साउदी ने मिलकर वर्ल्ड कप में अभी तक 36 विकेट लिए हैं. बोल्ट ने इनमें से 21 विकेट झटके हैं. साउदी से उनकी सफल जोड़ी के पीछे छिपे राज के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि हमारी सफलता का राज मैदान के बाद हमारी करीबी दोस्ती है. हमने अंडर-19 वर्ल्ड कप कुआलालम्पुर, 2008 में काफी क्रिकेट खेली है. बोल्ट टेस्ट और टी-20 क्रिकेट में खुद को साबित कर चुका था और वनडे टीम का नियमित हिस्सा बनने में उसे थोड़ा समय लगा.’
उन्होंने कहा, ‘उसने वर्ल्ड कप से पहले केवल दस वनडे खेले थे लेकिन उसने लगातार बेहतर प्रदर्शन किया.' साउदी ने इसके साथ ही कहा उनकी टीम के पास रविवार को होने वाले वर्ल्ड कप फाइनल में ऑस्ट्रेलिया को हराने के लिए पूरी तरह से तैयार है. न्यूजीलैंड पहली बार वर्ल्ड कप फाइनल में खेलेगा. उसने इस बार वर्ल्ड कप में अपने सभी मैच जीते हैं.
साउदी कहा, ‘यह सभी खिलाड़ियों के लिए सपना सच होने जैसा है. इससे बेहतर और क्या हो सकता है कि आप दुनिया के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट मैदानों में से एक पर ऑस्ट्रेलिया का सामना उसके घर में ही करोगे.’ बाएं हाथ के स्पिनर डेनियल विटोरी को न्यूजीलैंड के अपने साथियों की तुलना में एमसीजी पर खेलने का सबसे ज्यादा अनुभव है. उन्होंने 1997 से यहां सात मैच खेले हैं.
कप्तान ब्रैंडन मैकलम और रोस टेलर ने यहां तीन-तीन जबकि मार्टिन गुप्टिल, ग्रांट इलियट, साउदी और काइल मिल्स ने एक-एक मैच खेला है. न्यूजीलैंड ने इस मैदान पर आखिरी मैच 2009 में खेला था और उसमें इन सातों खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था. तब उसने ऑस्ट्रेलिया को छह विकेट से हराया था. साउदी ने कहा, ‘हम यहां लंबे समय से नहीं खेले हैं. हमारे पास उस (2009) मैच की अच्छी यादें हैं. हमारे कई खिलाड़ियों को भारत में बड़ी संख्या में मौजूद दर्शकों के सामने खेलने का अनुभव है. उम्मीद है कि रविवार को एक लाख के करीब दर्शक पहुंचेंगे.'

प्लेन क्रैश कराने वाले पायलट ने गर्लफ्रेंड से कहा था- एक दिन दुनिया याद रखेगी मेरा नाम

डूसेलडर्फ (जर्मनी): फ्रांस के आल्प्स पर्वत श्रृंखला में प्लेन क्रैश करके 150 लोगों का जान लेने वाला जर्मनविंग्स एयरलाइंस का को-पायलट काफी पहले से ही ऐसा करने का इरादा बना चुका था। उसने गर्लफ्रेंड रह चुकी महिला से कहा था कि एक दिन हर कोई उसका नाम जान जाएगा। जर्मन अखबार 'बिल्ड' ने एक रिपोर्ट में यह खुलासा किया है।
'बीमारी से परेशान था लुबिज'
'बिल्ड' को दिए इंटरव्यू में 26 वर्षीय फ्लाइट अटेंडेंट मारिया डब्ल्यू ने बताया कि क्रैश की खबर मिलते ही उसे एक साल पुरानी बात याद आ गई। मारिया के मुताबिक, आंद्रे लुबिज ने पिछले साल कहा था, "एक दिन मैं कुछ ऐसा करूंगा जिससे पूरा सिस्टम बदल जाएगा और हर कोई मेरा नाम याद रखेगा।" रिपोर्ट के अनुसार, मारिया डब्ल्यू ने लुबिज के साथ पिछले साल पांच महीने तक काम किया था। मारिया ने बताया कि इस दौरान दोनों भावनात्मक तौर पर काफी नजदीक आ गए थे। विमान क्रैश में लुबिज का नाम सामने आने से मारिया काफी परेशान हैं। मारिया ने बताया, "अगर लुबिज ने जानबूझकर प्लेन क्रैश किया है तो उसने अपनी बीमारी और स्वास्थ्य से परेशान होकर किया होगा। उसका सपना था कि वो लुफ्थांसा एयरलाइंस में बतौर मुख्य पायलट जॉब करे, जो कि व्यावहारिक रूप से काफी मुश्किल था।"
बीमारी सामने आने के बाद गर्लफ्रेंड से ब्रेकअप
मारिया के मुताबिक, लुबिज की बीमारी सामने आने के बाद उनका ब्रेकअप हो गया था। उसने बताया कि लुबिज को रात में डरावने सपने आते थे और वो आधी रात में उठकर चिल्लाने लगता था, "हम नीचे गिर रहे हैं।" विमान के वॉयस रिकॉर्डर के ऑडियो से साफ है कि 38 हजार फीट पर आंद्रे लुबिज (27) ने कॉकपिट का दरवाजा बंद कर लिया था। ऑडियो में मेन पायलट को कॉकपिट का दरवाजा नॉक करते सुना जा सकता है। बताया जा रहा कि टॉयलेट के लिए कॉकपिट से बाहर गए पायलट ने दरवाजे को खोलने के लिए कुल्हाड़ी का इस्तेमाल भी किया था, हालांकि वह कामयाब नहीं हुआ। फ्रेंच अधिकारियों ने बताया कि वॉयस रिकॉर्डिंग के आधार पर इसे सुसाइड और सामूहिक हत्या का मामला माना जा सकता है।
डिप्रेशन का शिकार था को-पायलट
जर्मन प्रॉसिक्यूटर्स ने बताया कि लुबिज के घर की तलाशी में अधिकारियों को मेडिकल डॉक्युमेंट्स मिले हैं, जिनमें उसकी बीमारी और इलाज का जिक्र है। हालांकि, लुबिज को कौन सी बीमारी थी, इसका खुलासा नहीं किया गया है। 'बिल्ड' की हालिया रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया था कि डिप्रेशन में रहने के कारण 2009 में लुबिज ने मनोरोग विशेषज्ञ से कंसल्ट किया था और क्रैश से पहले भी वो डॉक्टर्स के संपर्क में था। लुबिज अपने माता-पिता के साथ मोंटाबोर में रहता था। इसके आलावा ड्यूसेलडर्फ में भी उसका एक अपार्टमेंट था।

हम उनका स्टिंग कर लें तो वो मुंह दिखाने के लायक न रहें: आशीष खेतान

अरविंद केजरीवाल के नए ऑडियो स्टिंग के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) में कलह और तेज हो गई है. टेप में अरविंद केजरीवाल योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण और प्रोफेसर आनंद कुमार के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए सुनाई दे रहे हैं. इस पर योगेंद्र यादव ने कहा है कि उन्हें छोटे भाई ने गाली दी है और उन्हें कोई शिकायत नहीं है.
मैं आहत और शर्मिंदा हूं: आनंद कुमार
केजरीवाल की भाषा से आहत प्रोफेसर आनंद कुमार ने कहा, 'मैं आहत और शर्मिंदा महसूस कर रहा हूं और उम्मीद करता हूं कि यह झूठ हो. उनसे पूछिए जिन्होंने यह भाषा इस्तेमाल की हो. मेरे करियर के दौरान किसी ने किसी के लिए ऐसी भाषा इस्तेमाल नहीं की.'
नया टेप सामने आने के बाद केजरीवाल खेमे के नेताओं की बैठक हुई. बैठक में शामिल रहे आशीष खेतान ने कहा, 'पार्टी में जो कुछ चल रहा है हमने उस पर चर्चा की. हमें निराशा हुई है. हम आजकल अमित शाह की प्रेस कॉन्फ्रेंस से ज्यादा योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण की प्रेस कॉन्फ्रेंस से डरे हुए हैं. अगर हमने उनके हिस्से की बातचीत रिकॉर्ड कर ली होती तो वह जनता के सामने मुंह दिखाने लायक नहीं होते.' गोपाल राय ने बताया कि बैठक में केजरीवाल ने वह पीड़ा सामने रखी जिससे वह दो-चार हो रहे हैं.
प्रशांत भूषण ने कहा कि फोन पर हुई बात के भाव ज्यादा खतरनाक हैं. भाषा तो गुस्से में खराब हो सकती है, लेकिन भाव ही गंदे हैं. उन्होंने कहा कि पार्टी किसी की जागीर नहीं है. यहां कार्यकर्ता और नेशनल काउंसिल सर्वोपरि हैं.
छोटे भाई ने दी है गाली, मुझे शिकायत नहीं: योगेंद्र
AAP नेता योगेंद्र यादव ने इस पर हमेशा की तरह अपने 'मधुर' अंदाज में प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, 'पिछले साल अरविंद केजरीवाल ने मुझे अपना बड़ा भाई माना था. अगर उन्होंने ऐसा कुछ कहा है तो वह मेरे छोटे भाई हैं, मुझे कोई शिकायत नहीं है. व्यक्तिगत अपमान इतनी बड़ी बात नहीं है. यह मेरे लिए बिल्कुल भी मुद्दा नहीं है. लोग यह याद नहीं रखेंगे कि किसका अपमान किया गया बल्कि लोग यह याद रखेंगे कि हमने देश के लिए क्या किया.'
आपको तो केजरीवाल की तारीफ करनी चाहिए: आशुतोष
पार्टी इस मुद्दे पर केजरीवाल के साथ खड़ी नजर आ रही है. AAP नेता आशुतोष ने कहा, 'अगर यह केजरीवाल की आवाज है, तो उन्हें ऐसे शब्द इस्तेमाल नहीं करने चाहिए थे. लेकिन बातचीत को अलग संदर्भ में देखा जाना चाहिए. अगर कोई पार्टी को तोड़ने या हराने की कोशिश करेगा तो स्वाभाविक रूप से किसी को भी गुस्सा आ सकता है. कई बार लोग गुस्से में ऐसी बातें कह जाते हैं. आपको तारीफ करनी चाहिए कि कोई भी राष्ट्रीय संयोजक से बात कर सकता है. इसका मतलब है कि यह अरविंद केजरीवाल की छवि को नुकसान पहुंचाने की साजिश है. हालांकि अभी तक टेप की प्रामाणिकता भी साबित नहीं हुई है. कल जब डील पूरी हुई अचानक एक स्टिंग सामने आ गया. इसमें मुझे केजरीवाल की छवि खराब करने की साजिश नजर आती है. '
छवि बिगाड़ने की कोशिश: दिलीप पांडे
केजरीवाल खेमे के एक और नेता दिलीप पांडे ने कहा कि पार्टी की जीत के बाद से केजरीवाल की छवि खराब करने के मकसद से फर्जी स्टिंग सामने आ रहे हैं. यह केजरीवाल की छवि बिगाड़ने की साजिश है. अगर आप किसी निजी बातचीत को स्टिंग कहने लगेंगे तो आप मूर्ख कहलाएंगे. इसे स्टिंग कहना ठीक नहीं है.
अब चुप क्यों हैं केजरीवाल: बीजेपी
आप नेताओं पर सत्ता का लोभ और अवसरवादी होने के आरोप लगाते हुए बीजेपी ने आज अरविंद केजरीवाल को चुनौती दी कि वह अपनी ही पार्टी के लोगों के आरोपों पर स्पष्टीकरण दें और कहा कि पूरे देश के समक्ष उनका असली चेहरा उजागर हो गया है. बीजेपी ने यह भी कहा कि उनके अपने लोगों द्वारा एक स्टिंग में लगाए गए आरोपों के मुताबिक आप में पारदर्शिता और लोकतंत्र नहीं है और सिद्धांत एवं स्वराज के इसके बड़े दावे छलावा हैं. बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा ने कहा, केजरीवाल दूसरे की गलतियों का भंडाफोड़ करने पर काफी बोलते हैं लेकिन उनके लोगों ने ही उनका भंडाफोड़ कर दिया . उनके लोगों ने ही उनका नकाब उतार दिया. उन्होंने कहा, केजरीवाल को स्टिंग में अपने लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों पर स्पष्टीकरण देना चाहिए . वह चुप क्यों हैं ? उनकी चुप्पी बताती है कि जो बातें खुलकर आ रही हैं वे सत्य हैं

राष्ट्रहितः कवि हृदय, दुनियादार नेता की नसीहत और भी... http://aajtak.intoday.in/story/the-man-who-got-it-right-poet-pragmatist-always-political-1-805176.html

आप देश के किसी पूर्व प्रधानमंत्री के कामकाज या हमारे राजनैतिक इतिहास में उनकी योग्य जगह को ठीक-ठीक कैसे और कब आंक सकते हैं? आप आज देश के ट्वेंटी-20 टाइप टीवी समाचार चैनलों या दस में से कितने अंक वाले 'विश्लेषण' के तरीके से तो नहीं ही आंक सकते. न ही आप इसके लिए चीन के महान नेता चाउ इन लाइ से कोई सीख ले सकते हैं. उनसे 1971 में हेनरी किसिंजर ने अपनी पहली मुलाकात के दौरान एक दिन पूछा था कि इतिहास में फ्रांसीसी क्रांति के असर के बारे में आप क्या सोचते हैं. उन्होंने कहा था कि अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी. तो, एक दशक या ठीक-ठीक 11 साल बाद ऐसे ही एक सवाल का जवाब तलाशने का शायद सही समय है. फिर, नरेंद्र मोदी सरकार ने अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न से नवाज कर हमें वाजिब वजह भी दे दी है.
अपना कार्यकाल पूरा करने वाले किसी प्रधानमंत्री, खासकर निर्वाचित लोकप्रिय नेता, के कामकाज के आकलन का एक अहम तत्व यह है कि उन्होंने किस इरादे से, कैसे शुरुआत की और अपनी विदाई के बाद किस रूप में याद किया जाना चाहते रहे हैं. इस मामले में वाजपेयी वाकई काफी अच्छे पायदान पर हैं. आइए देखते हैं कैसे.
देश की आर्थिक और विदेश नीति की दिशा में एक व्यापक एकरूपता बनी हुई है. इसलिए कोई नेता उसके विस्तार और रफ्तार में ही बदलाव कर सकता है. लेकिन यह कोई बड़ा काम नहीं है. असली बदलाव तो मानसिकता में होता है. यानी कोई ऐसा बड़ा विचार लेकर आए, जो पुराने जड़ जमाए विचार को चुनौती दे दे और अपनी जगह ऐसे बना ले कि भविष्य में उससे अलग करना मुनासिब न हो. नेहरू का उदार बहुलतावाद ऐसा ही एक विचार था. यहां तक कि मोदी को भी उसकी कौल उठानी पड़ती है, भले ही वे ऐसा पटेल और गांधी के नाम पर करना पसंद करते हैं.
नेहरू का दूसरा योगदान वैज्ञानिक सोच वाले तर्कसम्मत, जिज्ञासु तथा सेकुलर समाज की स्थापना है, जो आज भी कायम है. लेकिन आने वाले वर्षों में उसकी परीक्षा होगी क्योंकि देश में इसके एक अहम पहलू पर राजनैतिक बहस शुरू हो सकती है, यानी उनके लगभग धर्मविहीन सेकुलरवाद और गहरे धर्म प्रधान समाज के बीच विरोधाभास पर सवाल खड़े हो सकते हैं.
उनका तीसरा योगदान नेहरूवादी या फैबियन समाजवाद पूरी तरह धराशायी हो गया है और खासकर नेहरू की अपनी पार्टी की ही एक सरकार (पी.वी. नरसिंह राव, मनमोहन सिंह के तहत) ने उसका स्मृतिलेख लिख दिया. ऐसा ही कुछ इंदिरा गांधी के साथ भी है. विश्व मंच पर बड़े राजनैतिक खेल से परहेज न करने वाले ताकतवर भारत का उनका विचार कायम रहेगा और बीजेपी केराज में और मजबूती पाएगा, क्योंकि बीजेपी ने कांग्रेस के प्रतीक पुरुषों मदन मोहन मालवीय, सरदार पटेल और अब लालबहादुर शास्त्री को आत्मसात कर आगे बढऩे का मन बना लिया है.
हालांकि गरीबी हटाओ के नारे के तहत गरीबी के समान वितरण का उनका आक्रामक विचार अब मर चुका है, दफनाया जा चुका है और अब गरीबवाद कहकर उसकी खिल्ली उड़ाई जाने लगी है. 2014 में उनकी पार्टी को मिले महज 44 सांसद उनके विचारों का ताबूत साबित हुए और कोयला तथा खनिज कानूनों में संशोधन और राज्यों में श्रम कानूनों में ढील देने का विचार उसमें आखिरी कील साबित होगा.
अब आइए सबसे अलग पी.वी. नरसिंह राव पर विचार करें. नेहरू-इंदिरा दौर के तीन सैद्धांतिक स्तंभों में से दो-सरकारपरस्त समाजवाद और पश्चिमविरुद्ध विश्व नीति-राव के पांच साल के कार्यकाल में ही ढहना शुरू हुए. राव समाजवादी थे लेकिन उससे ज्यादा व्यावहारिकतावादी थे. उन्हें नेहरू-गांधी परिवार पर लगे लगभग सात साल के ग्रहण से काफी मदद मिली. पांच साल तो सीधे उनके प्रधानमंत्री रहते और फिर दो साल देवेगौड़ा-गुजराल के दौर में जब उनके नए विचारों को तरजीह दी गई.
कांग्रेस के समर्थन से संयुक्त मोर्चा की दोनों सरकारों ने अपनी अर्थव्यवस्था पी. चिदंबरम के हवाले कर दी थी जो तमिल मानीला कांग्रेस में हुआ करते थे. कांग्रेस अपने पार्टी इतिहास के पन्नों में उनका नाम चाहे जिस कदर दफना दे लेकिन राव बौद्धिक जंग जीत चुके थे और उनके मुश्किल भरे पांच वर्षों को कभी भी आजाद भारत के इतिहास के पन्नों से मिटाया नहीं जा सकता.
उनके ठीक बाद आए, उनके ही पदचिन्हों पर चलने वाले वाजपेयी (अल्पजीवी संयुक्त मोर्चा सरकारों के बाद) पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री हैं जो पूरे पांच, दरअसल छह, वर्षों तक टिके रहे. बीच में एक छोटा झटका 1999 में उन्हें लोकसभा में विश्वास मत में हार का लगा था और वे दोबारा चुनाव लडऩे को मजबूर हुए. यह उनका तीन साल में तीसरा चुनाव था. राव और वाजपेयी दोनों ही पुराने दिग्गज सांसद थे और आपस में एक-दूसरे का बड़ा आदर करते थे. वाजपेयी राव को हमेशा अनुभवी, बुद्धिमान देशभक्त मानते रहे और नेहरू-गांधी परिवार की तरह उन्हें शक की निगाह से नहीं देखते थे.
राव भी वाजपेयी को अपनी ही तरह का नेता मानते थे. हालांकि दोनों के व्यक्तित्वों में काफी विरोधाभास था. याद कीजिए, राव ने उन्हें संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में भारत के खिलाफ प्रस्ताव के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेता बनाकर भेजा था, जबकि तब विदेश राज्यमंत्री सलमान खुर्शीद उनके डिप्टी की भूमिका में थे. वे वाजपेयी से निजी या वैचारिक तौर पर कभी नफरत नहीं करते थे.
वह 'सम्मान' तो आडवाणी के लिए सुरक्षित था. इसीलिए मेरा इस कहानी में पूरा यकीन है कि राव ने वाजपेयी को सत्ता (हालांकि शुरू में महज 13 दिनों के लिए) सौंपते हुए कहा था कि सारी सामग्री (परमाणु वगैरह) तैयार है और जनादेश मिलते ही उन्हें उस पर आगे बढ़ जाना चाहिए. राव ने नेहरू-इंदिरा दौर की अर्थव्यवस्था और विदेश नीति में जो साहसिक बदलाव किए, वे बाद में भी कायम रहे, बल्कि उसी राह पर देश और मजबूती से बढ़ रहा है.
आर्थिक और विदेश नीति तय हो जाने के बाद आखिर वाजपेयी के लिए करने को क्या था? वाजपेयी मन से पक्के आरएसएसवादी थे लेकिन कुछ हद तक नेहरू की तरह उदार संविधानवादी और रोमांटिक, यहां तक कि कवि भी थे. वे इंदिरा, राव या अब मोदी की तरह निरंकुश इरादों के धनी नहीं थे और न ही वे नेहरू की तरह दूरदर्शी थे. लेकिन उनका दिमाग खुला हुआ था और सबसे बढ़कर उनका दिल काफी बड़ा था.
ईश्वर कभी किसी नेता को सारे गुण एक साथ देकर नहीं भेजता. इतिहास में महान से महान नेताओं में भी कोई न कोई कमी या खामी देखने को मिलती है. लेकिन यह अकाट्य सत्य है कि किसी भी क्षेत्र में कोई महान नेता बड़े दिल के बिना न आज तक बना है और न कभी बनेगा. इस कसौटी पर वाजपेयी बिलाशक सबसे अव्वल साबित होते हैं. इस फेहरिस्त में हम मनमोहन सिंह पर विचार नहीं कर रहे हैं क्योंकि वे पूरी तरह अधिकार संपन्न नेता नहीं बन पाए.
पहली बार तो वाजपेयी भी नहीं थे जब 1996 में उन्होंने सबसे बड़ी पार्टी के नेता होने के नाते पद की शपथ ली थी. वे जानते थे कि संसद में विश्वास मत पर वे अपनी पहली परीक्षा में ही थोड़े दिनों बाद ही नाकाम हो जाने वाले हैं क्योंकि समूचा विपक्ष उनके खिलाफ सेकुलर छतरी में एकजुट हो गया था. लेकिन उन्होंने इसके लिए अपना दिमाग बना लिया था और उनका दिल ऐसी योजना बनाने को तैयार था जिससे वे इतिहास में अपनी खास जगह सुरक्षित करने वाले थे.
विश्वास मत पर संसद में बहस का जवाब देने के मौके के दो दिन पहले मुझे उनके पुराने रायसीना रोड के आवास से मुलाकात के लिए फोन आया. उन्होंने यह जानकर आवास नहीं बदला था कि उनकी पारी छोटी रहने वाली है. वे शांत, सहज थे और मुस्करा भी रहे थे. उन्होंने पूछा, 'मुझे याद आता है कि आपने कभी लिखा था कि भारत में बहुसंख्यक एक तरह की अल्पसंख्यक ग्रंथि के शिकार हैं.'
मैंने कहा हां, वह लेख मैंने इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रैटेजिक स्टडीज, लंदन पर (इंडिया रिडिफाइंस इट्स रोल, 1995) इसी पत्रिका के लिए लिखा था. वे मुझसे एक छोटी बहस में उलझ पड़े कि क्यों भारत में हिंदू इतनी बहुसंख्या में होने के बावजूद आहत महसूस करते हैं. उन्होंने कहा कि वे समझते हैं कि ऐसा क्यों है लेकिन उससे पूरी तरह सहमत नहीं हैं. फिर उन्होंने कहा कि ऐसे भी वे हिंदुओं के लिए अफसोस जताने की खातिर निर्वाचित प्रधानमंत्री नहीं हैं, बल्कि उनका काम उन्हें इस पेच से बाहर निकालना और अल्पसंख्यकों को भी आश्वस्त करना है. उन्हें पता था कि संसद में हार होने वाली है फिर भी उन्होंने संसद में बहुसंख्यकों में इस अल्पसंख्यक ग्रंथि पर भावुक भाषण दिया.
अपनी उस हार में भी उन्होंने देश की संसद और आम लोगों को यह बता दिया कि वे सामान्य बीजेपी/आरएसएस टाइप के नेता नहीं हैं. लिहाजा, इससे दो बातें हुईं. एक, बीजेपी के प्रतिबद्ध वोटरों के अलावा बड़े पैमाने पर लोग उन्हें एक मौका देने को तैयार हो गए. दूसरे, सेकुलर छतरी की कई छोटी पार्टियां एनडीए की तरफ जाने का भरोसा पा गईं. याद कीजिए, उनके मंत्रिमंडल में नीतीश कुमार, ममता बनर्जी, नवीन पटनायक, यहां तक कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला भी शामिल हुए थे.
अपने छह वर्षों के कार्यकाल में उन्होंने भारतीय राजनीति में दो नए विचार स्थापित किए. एक, बीजेपी मौजूदा संविधान के ढांचे में ही दक्षिणपंथी मध्यममार्गी सरकार चला सकती है. यह भी साबित किया कि भारत बीजेपी को ज्यादा बदल सकता है न कि बीजेपी भारत को. दूसरे, रणनीतिक संयम की नीति अधिकतम उकसावे में भी कायम रह सकती है जैसा कि करगिल और संसद पर हमले के दौरान उन्होंने दिखाया. इसके फायदे भी स्पष्ट थे. एक तो नियंत्रण रेखा की शुचिता स्थापित हुई और दूसरे पाकिस्तान दुनिया भर में आतंकवाद को शह देने वाले देश के रूप में स्थापित हो गया.
इस दूसरी अवधारणा की परीक्षा आने वाले वर्षों में होगी. लेकिन पहली, बीजेपी के लिए राजधर्म की वाजपेयी की परिभाषा स्थापित हो गई. अब अगर मोदी गोलवलकर के बदले वाजपेयी की अवधारणा की कौल उठाते हैं तो बीजेपी के लिए देश में प्रशासनिक विचारधारा का आयाम आगे भी कायम रहेगा. यही उनका सबसे स्थायी योगदान है और यह उतना ही मजबूत है जितना नेहरू का उदारवाद, इंदिरा का ताकतवर देश और राव का व्यावहारिकतावाद. इस पैमाने पर वाजपेयी खरे साबित होते हैं. अब इस विडंबना को तो रहने ही दीजिए कि मोदी सरकार ने उन्हें भारत रत्न से नवाजा है.

निराश न हों, 2019 का वर्ल्ड कप भी खेलेंगे महेंद्र सिंह धोनी

भारतीय वनडे क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी अगला वर्ल्ड कप भी खेल सकते हैं. 'मैं 2019 का वर्ल्ड कप खेलूंगा.' ये वो शब्द थे जो पिछले साल दिसंबर में टेस्ट क्रिकेट से अचानक संन्यास लेने के बाद उन्होंने बीसीसीआई के शीर्ष पदाधिकारी से कहे थे.
बीसीसीआई के वह पदाधिकारी भी धोनी के टेस्ट से अचानक संन्यास लेने से हैरान थे. इसीलिए उन्होंने भारतीय कप्तान से वनडे क्रिकेट में उनके प्लान के बारे में पूछा. 'हेडलाइंस टुडे' को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, इसके जवाब में धोनी ने कहा था कि वह 2019 का वर्ल्ड कप खेलेंगे.
'कैप्टन कूल' के दिमाग में क्या चल रहा है, इसका अंदाजा वह किसी को नहीं लगने देते. यहां तक कि उनके करीबी भी नहीं जानते थे कि वह पिछले साल ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज के बीच में ही संन्यास का ऐलान कर देंगे.
बीते गुरुवार को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल हारने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में धोनी ने कहा था, 'मैं 33 साल का हूं. अब भी दौड़ रहा हूं और अब भी फिट हूं. 2019 वर्ल्ड कप के बारे में खेलने का सही समय अगले साल टी-20 वर्ल्ड कप के बाद आएगा.' हो सकता है कि वह 2019 वर्ल्ड कप खेलने की अपनी इच्छा चयनकर्ताओं या देश पर थोपना न चाहते हों और तब तक अपनी फॉर्म और फिटनेस को भी परखना चाहते हों.
इससे पहले अटकलें लगाई जा रही थीं कि टीम इंडिया अगर लगातार दूसरी बार वर्ल्ड कप जीत जाती तो धोनी अपनी विरासत विराट कोहली को सौंप देंगे. लेकिन धोनी के करीबी सूत्र बताते हैं कि वह फिलहाल संन्यास न लेने को लेकर पहले ही फैसला कर चुके थे.
अगर धोनी की फॉर्म बहुत बुरी तरह नहीं गिरती, तो विराट कोहली को अपनी कप्तानी संवारने का अच्छा मौका मिलेगा. वनडे में वह धोनी के अंडर काफी कुछ सीखेंगे और टेस्ट में कप्तानी करेंगे.

Thursday, 26 March 2015

पूरे वर्ल्डकप में टीम इंडिया के जिस गेंदबाज़ी अटैक की कप्तान धोनी तारीफ़ करते नहीं थक रहे थे वही गेंदबाज़ी अटैक सेमीफाइनल में हार की सबसे बड़ी वजह बन गया. टीम का हर गेंदबाज़ पिटा, सबने रन लुटाए और ऑस्ट्रेलिया एक ऐसा बड़ा स्कोर खड़ा करने में कामयाब हो गया, जिसका तोड़ भारतीय बल्लेबाज़ों के पास नहीं था.

लुटे रन, डूबी लुटिया
मोहम्मद शमी ने 10 ओवर में 68 रन दिए, मोहित शर्मा ने 10 ओवर में 75 रन, उमेश यादव ने 9 ओवर में 72 रन दिए और जडेजा ने 10 ओवर में 56 रन लुटाए.  हालांकि उमेश को 4 और मोहित को 2 भी विकेट मिले, लेकिन इतने रन पिटवाने के बाद विकेट का जश्न मनता भी तो कैसे. टीम में केवल आर. अश्विन ही ऐसे गेंदबाज़ थे जिनका इकॉनमी रेट 5 से नीचे का था.

रिकॉर्ड भी गया पानी में
वर्ल्डकप 2015 के 7 मैचों में टीम इंडिया अपने गेंदबाज़ों के बूते एक नया इतिहास रच रही थी. वर्ल्डकप में ये पहली बार था कि टीम इंडिया अपनी विरोधी टीम को लगातार 7 मैचों में ऑलआउट करने में कामयाब हुई थी. लेकिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल मैच में भारतीय गेंदबाज़ बगले झांकते नज़र आए. ऑस्ट्रेलियाई टीम को ऑलआउट करना तो दूर उन्हें परेशान तक करने में भारतीय गेंदबाज़ नाकाम रहे.

विश्व कप लाइव : भारत हारा, फाइनल में ऑस्ट्रेलिया का मुकाबला न्यूजीलैंड से

भारतीय क्रिकेट टीम ने सिडनी में क्रिकेट विश्वकप के दूसरे सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 329 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए 233 रन पर ऑलआउट हो गई। ऑस्ट्रेलिया 95 रनों से भारत को हराकर फाइनल में पहुंच गया है। अब उसका मुकाबला न्यूजीलैंड से होगा।

पहला विकेट शिखर धवन का गिरा। धवन 45 रन बनाकर जोश हेजलवुड की गेंद पर मैक्सवेल को कैच दे बैठे। विराट कोहली एक रन बनाकर मिशेल जॉनसन की गेंद पर कैच आउट हुए। रोहित शर्मा 34 रन बनाकर मिशेल जॉनसन की गेंद पर बोल्ड हो गए। सुरेश रैना 7 रन बनाकर फॉकनर की गेंद पर आउट हुए। अजिंक्य रहाणे 44 रन बनाकर मिशेल स्टार्क की गेंद पर आउट हुए। रहाणे ने धौनी के साथ मिलकर 70 रनों की साझेदारी की। रहाणे ने 68 गेंदों में दो चौके लगाए। रवींद्र जडेजा 16 रन बनाकर रन आउट हो गए। कप्तान महेंद्र सिंह धौनी 65 रन बनाकर रन आउट हो गए। आर.अश्विन 5 रन बनाकर फॉकनर की गेंद पर बोल्ड हो गए। मोहित शर्मा बिना खाता खोले फॉकनर की गेंद पर बोल्ड हो गए।

ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों में जेम्स फॉकनर ने तीन, मिशेल जॉनसन और मिशेल स्टार्क ने दो जबकि जोश हेजलवुड को एक विकेट मिला।

इससे पहले स्टीवन स्मिथ (105 रन) और ऐरन फिंच (81) के बीच दूसरे विकेट के लिये 182 रन की बड़ी साझेदारी की बदौलत ऑस्ट्रेलिया ने कसी हुई गेंदबाजी और अच्छे क्षेत्ररक्षण के बावजूद भारत के खिलाफ गुरुवार को विश्वकप सेमीफाइनल में सात विकेट के नुकसान पर 328  रन का मजबूत स्कोर बना लिया।
       
ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय किया और 50 ओवरों में सात विकेट पर सह 328 रन का मजबूत स्कोर बनाया। टेस्ट कप्तान स्टीवन स्मिथ एक बार फिर अहम साबित हुये और उन्होंने 105 रन की शतकी पारी खेलकर टीम को लड़ने लायक स्थिति में पहुंचाया जबकि ओपनर ऐरन फिंच ने 81 रन की पारी खेली और टीम को अच्छी शुरुआत दिलाई।
      
दूसरे विकेट के लिये फिंच और स्मिथ ने 182 रन की बेहतरीन साझेदारी निभाई। विश्वकप नॉकआउट में यह दूसरी सबसे बड़ी साझेदारी है। इससे पहले वर्ष 1999 में पाकिस्तान के सईद अनवर और वाजुल्लाह वास्ती ने न्यूजीलैंड के खिलाफ 194 रन की सबसे बड़ी साझेदारी की थी।    
      
भारत ने शुरुआत में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को रन बनाने से कुछ रोका लेकिन आखिरी ओवरों में शेन वॉटसन ने ताबड़तोड़ 28 रन बटोरे। वॉटसन को हालांकि गेंदबाजों ने फिर देर तक नहीं टिकने दिया और 47वें ओवर में मोहित ने अजिंक्या रहाणे के हाथों बाउंड्री के पास कैच कराकर पवेलियन भेज दिया। इसके बाद मिशेल जॉनसन मैदान पर आये और उन्होंने केवल नौ गेंदों में नाबाद 27 रन बना डाले। उन्होंने लगातार तीन चौके लगाये।
      
भारतीय गेंदबाजों ने शुरुआत में कसी हुई गेंदबाजी से एक समय 34 ओवर तक ऑस्ट्रेलिया को 200 के अंदर रखा लेकिन फिर आखिरी नौ ओवरों में 74 रन पड़ गये जो भारत को काफी महंगा पड़ा। भारत की ओर से उमेश यादव ने नौ ओवरों में 72 रन देकर चार विकेट लिये। विश्वकप नॉकआउट में वह चार विकेट निकालने वाले पहले गेंदबाज है। लेकिन उनकी गेंदबाजी कुछ महंगी रही। मोहित शर्मा ने 10 ओवरों में 75 रन देकर दो विकेट और रविचंद्रन अश्विन ने 10 ओवरों में 42 रन पर एक विकेट लिया।
      
मैच में सिडनी की पिच की अहम भूमिका मानी जा रही थी और सुबह यह बल्लेबाजी पिच दिखाई दी लेकिन ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को शुरुआत में यहां रन बटोरने में कुछ परेशानी जरूर हुई। लेकिन स्मिथ और फिंच ने टिक्कर रन बटोरे और टीम को बेहतर स्थिति में पहुंचाया। फिंच ने 116 गेंदों में सात चौके और एक छक्का लगाकर 81 रन जबकि स्मथ ने 93 गेंदों में 11 चौके और दो छक्के लगाकर 105 रन की पारी खेली। उन्होंने 89 गेंदों में अपना शतक पूरा किया। यह उनके वनडे करियर का चौथा शतक है।
     
भारत को जहां पहली कामयाबी केवल 15 के स्कोर पर डेविड वॉर्नर (12) के रूप में मिली वहीं दूसरा विकेट निकालने में उसे काफी इंतजार करना पड़ा और 34वें ओवर में जाकर उमेश ने स्मिथ को रोहित शर्मा के हाथों कैच कराकर पवेलियन भेजा और फिंच के साथ उनकी रिकॉर्ड साझेदारी पर ब्रेक लगाया।
     
भारत ने मध्य ओवरों में मैच में वापसी की और अच्छे इकोनोमी रेट से रन दिये लेकिन आखिरी 10 ओवरों में मैच का रूख बदल गया और नौंवें नंबर पर खेलने उतरे जॉनसन ने 300 के स्ट्राइक रेट से केवल नौ गेंदों में चार चौके और एक छक्का लगाकर नाबाद 27 रन बनाये। ब्रैड हैडिन और जॉनसन ने मिलकर आठवें विकेट के लिये केवल 20.1 ओवर में 30 रन की बेहद उपयोगी अविजित साझेदारी निभाई।
       
ऑस्ट्रेलिया की ओर से ग्लेन मैक्सवेल ने 23 रन, शेन वॉटसन ने 28, कप्तान माइकल क्लार्क ने 10 और जेम्स फॉकनर ने 21 रन बनाकर स्कोर 300 के पार पहुंचाने में मदद की।

भारत की हार के 5 कारण

सेमी फ़ाइनल में भारत की टीम हारकर विश्व कप से बाहर हो गई है. ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम को उसी की धरती पर मात देना इतना आसान नहीं था. लेकिन भारत की टीम पहले गेंदबाज़ी और फिर बल्लेबाज़ी में पिट गई.
आइए नज़र डालते हैं उन पाँच कारणों पर जो भारत की हार की प्रमुख वजह बनी.

वो पांच कारण जानें

1. टॉस

जानकार पहले से ही ये कह रहे थे कि सिडनी की पिच पर टॉस जीतना काफ़ी अहम है. ऑस्ट्रेलिया के कप्तान माइकल क्लार्क ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने का फ़ैसला किया.
भारत के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने भी कहा कि टॉस जीतकर वे बल्लेबाज़ी ही करते. लेकिन टॉस ऑस्ट्रेलिया ने जीता और उनका ये फ़ैसला सही साबित हुआ.
ऑस्ट्रेलिया ने सात विकेट पर 328 रनों का बड़ा स्कोर खड़ा किया.

2. स्टीवेन स्मिथ

भारत ने ऑस्ट्रेलिया का पहला विकेट जल्द ही गिरा दिया था. डेविड वॉर्नर कुछ ख़ास नहीं कर पाए. लेकिन उसके बाद एरॉन फिंच और स्टीवेन स्मिथ ने ऑस्ट्रेलियाई पारी को न सिर्फ़ संभाला बल्कि ज़बरदस्त बल्लेबाज़ी की.
स्मिथ ने वनडे मैच की अपनी चौथी सेंचुरी लगाई और ऑस्ट्रेलिया को मज़बूत आधार प्रदान किया. स्मिथ ने सिर्फ़ 93 गेंदों पर 105 रन बनाए. उन्होंने दूसरे विकेट के लिए फिंच के साथ 182 रनों की साझेदारी भी की.

3. भारतीय गेंदबाज़ी

सिडनी की पिच को भाँप पाने में भारतीय गेंदबाज़ नाकाम रहे. उन्होंने शॉर्ट पिच गेंद करने की नाकाम कोशिश जारी रखी और फिर उनकी जम कर धुनाई हुई. सबसे ज़्यादा निराश तेज़ गेंदबाज़ों ने किया.
मोहम्मद शमी ने 68 रन दिए, उमेश यादव ने 72 और मोहित शर्मा ने 75 रन दिए. उमेश यादव तो चार विकेट लेने में सफल रहे, लेकिन मोहम्मद शमी के खाते में एक भी विकेट नहीं आए.
मोहित शर्मा ने दो विकेट लिए. सबसे अच्छी गेंदबाज़ी की अश्विन ने. उन्होंने 10 ओवरों में सिर्फ़ 42 रन दिए.

4. विराट कोहली का विकेट

ऑस्ट्रेलिया ने पहला विकेट जल्द ही गँवा दिया था. उसके बाद नंबर तीन पर बल्लेबाज़ी करने आए स्टीवेन स्मिथ ने बेहतरीन पारी खेली. लेकिन जब बारी भारत की आई तो इसका उल्टा हुआ.
विराट कोहली से भारत ने ज़रूरत से ज़्यादा उम्मीदें बाँध रखी थी. लेकिन कोहली ने काफ़ी निराश किया. कोहली सिर्फ़ एक रन ही बना पाए.
कोहली के विकेट ने भारतीय कैंप को हताश कर दिया और उसके बाद भारतीय मध्यक्रम कभी भी भरोसेमंद नहीं दिखा. एक-एक करके विकेट गिरते रहे और आख़िरकार भारतीय टीम पूरे 50 ओवर भी नहीं खेल पाई.

5. ऑस्ट्रेलियन तेज़ गेंदबाज़

ऑस्ट्रेलियन तेज़ गेंदबाज़ शुरू में थोड़ा परेशान ज़रूर दिखे, लेकिन उन्हें पता था कि उनके पास अच्छे रन हैं. एक बार विकेट गिरने शुरू हुए, तो उन्होंने भारतीय बल्लेबाज़ों की रीढ़ तोड़ दी.
मिचेल स्टार्क ने ख़ास तौर पर बेहतरीन गेंदबाज़ी की और 28 रन देकर दो विकेट लिए. जब भी भारतीय गेंदबाज़ थोड़ा जमने की कोशिश करते स्टार्क, जॉनसन और फॉकनर की तिकड़ी में से कोई न कोई आकर एक विकेट चटका देता था.
ये अलग बात है कि सिडनी की ये पिच सामान्य ऑस्ट्रेलियन पिच की तरह नहीं थी, जो आम तौर पर तेज़ गेंदबाज़ों को मदद करती है.
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Sunday, 22 March 2015

...तो इसलिए रुबेल ने विराट को कहा अपशब्द, 4 साल से कर रहे थे इंतजार

खेल डेस्क. हाल ही में क्वार्टर फाइनल मुकाबले में बांग्लादेशी बॉलर रुबेल हुसैन टीम इंडिया के स्टार बैट्समैन विराट कोहली से उलझते और अपशब्द कहते नजर आए थे। तब विराट ने उन्हें पलटकर कुछ भी नहीं कहा था। अब रुबेल की इस हरकत के पीछे की सच्चाई सामने आ रही है। दरअसल इससे पहले भी विराट और रुबेल एक-दूसरे से उलझ चुके हैं। पहले विराट ने रुबेल पर भद्दे कमेंट किए थे और इस बार मौका मिलते ही रुबेल ने भी अपनी भड़ास निकाल ली। इसके लिए उन्होंने करीब चार साल का इंतजार किया।
2011 वर्ल्ड कप में हुई थी झड़प
2011 वर्ल्ड कप में पहले विराट कोहली ने रुबेल हुसैन को अपशब्द कहे थे। तब बॉलिंग के दौरान रुबेल अपनी गेंदों से विराट को डराने की कोशिश कर रहे थे, जिससे विराट भड़क गए थे। लगता है तभी से रुबेल अपने दिल में इस बात को दबाए बैठे थे और विराट को जवाब देने के लिए सही मौके का इंतजार कर रहे थे।
2008 में शुरू हुई थी रुबेल-विराट के बीच नोंक-झोंक
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रुबेल-विराट के बीच तकरार अंडर-19 क्रिकेट खेलने के दौरान हुई थी। ये बात साल 2008 की है। पहली बार तभी इन दोनों खिलाड़ियों के बीच बहस हुई थी।
क्या हुआ था क्वार्टर फाइनल मैच में
19 मार्च 2015 को हुए क्वार्टर फाइनल मैच में पारी का 17वां ओवर रुबेल फेंक रहे थे। ओवर की पांचवीं बॉल को विराट कोहली ने ड्राइव किया, लेकिन एज लगने के बाद बॉल सीधे विकेटकीपर मुशफिक्कुर रहीम के दस्ताने में जा समाई। निराश विराट पवेलियन की ओर चल पड़े, लेकिन इसी बीच रुबेल हुसैन ने साथियों संग जश्न मनाते वक्त विराट की ओर देखकर अपशब्द कहे। हालांकि, विराट ने रुबेल को जरा भी महत्व नहीं दिया और पवेलियन की ओर चले गए। वहीं, जब बांग्लादेश की बैटिंग के दौरान रुबेल क्रीज पर थे तो दर्शक फिर किसी घटना की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। रुबेल जब शून्य पर आउट हुए तो विराट ने कुछ भी रिएक्ट नहीं किया। बता दें कि इस मैच में विराट भी मात्र तीन रन बनाकर आउट हुए थे।

सेमीफाइनल मुकाबलों की जमीन तैयार, ये हैं वर्ल्ड कप-2015 के FANTASTIC FOUR

वेलिंगटन. वर्ल्ड कप क्रिकेट में एक महीने तक चले लंबे और रोमांचक मुकाबले के बाद अब टॉप चार टीमें तय हो चुकी हैं। इनमें डिफेंडिंग चैम्पियन इंडिया, चार बार के वर्ल्ड कप विजेता ऑस्ट्रेलिया के अलावा मजबूत दिख रहे न्यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका शामिल हैं। वेलिंगटन में शनिवार को खेले गए आखिरी क्वार्टर फाइनल मैच में न्यूजीलैंड के हाथों वेस्ट इंडीज की 143 रनों की हार के बाद सेमीफाइनल में पहुंचने वाली अंतिम टीम का नाम भी तय हो गया। न्यूजीलैंड अब 24 मार्च को ऑकलैंड में साउथ अफ्रीका से भिड़ेगा। कीवी टीम ने अब तक इस वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया के ग्राउंड पर एक भी मैच नहीं खेला है, लेकिन सेमीफाइनल जीतने की स्थिति में उसे फाइनल खेलने के लिए मेलबर्न जाना होगा। वहीं, 26 मार्च को सिडनी में ऑस्ट्रेलिया और इंडिया आमने-सामने होंगे।
1. भारत
वनडे रैंकिंग में नंबर दो टीम इंडिया विश्व कप में एक भी मैच हारे बिना सेमीफाइनल तक पहुंची है। टीम इंडिया ने हर मैच में विरोधी टीम के सभी विकेट हासिल करने में कामयाबी हासिल की। टीम के बॉलर्स ने 7 मैच में 70 विकेट झटके। मोहम्मद शमी सबसे बेहतरीन तेज गेंदबाज बनकर उभरे। शमी को उमेश यादव और मोहित शर्मा की भी मदद मिली। वहीं, अश्विन और जडेजा जैसे स्पिनर्स ने भी वक्त पर विकेट निकाले। बॉलिंग के अलावा बैटिंग में शिखर धवन, रोहित शर्मा, विराट कोहली और सुरेश रैना ने मैच विनिंग पारियां खेलीं। कप्तान धोनी ने भी जरूरत पड़ने पर मजबूत पारी (वेस्ट इंडीज और जिम्बाब्वे के खिलाफ) खेली।
2. ऑस्ट्रेलिया
वनडे की पहली रैंकिंग वाली टीम और आयोजन के को-होस्ट ऑस्ट्रेलिया ने माइकल क्लार्क की कप्तानी में बॉलिंग, फील्डिंग और बैटिंग, सभी क्षेत्रों में दमदार प्रदर्शन किया है। इस वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया सिर्फ एक मैच न्यूजीलैंड से हारा है। टीम बस क्वार्टर फाइनल में पाकिस्तान के वहाब रियाज के खिलाफ थोड़ा संघर्ष करती दिखी, इसके अलावा अभी तक उसने सभी मैच आसानी से जीते। दिसंबर-जनवरी में हुई सीरीज में ऑस्ट्रेलिया ने टीम इंडिया को भले ही मात दी हो, लेकिन अब वे जानते हैं यह एक बदली हुई टीम है। शायद तभी क्लार्क के सुर बदले हुए हैं और वे धोनी की तारीफ करते दिख रहे हैं। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया के पास मिचेल स्टार्क की धारदार गेंदबाजी की ताकत है। स्टार्क की परफॉर्मेंस इस वर्ल्ड कप में बेहद सधी हुई रही है। उनकी बल्लेबाजी भी बेहद मजबूत है। 9वें नंबर पर उतरने वाले मिचेल जॉनसन भी बैटिंग कर लेते हैं। ऐसे में, शायद टीम इंडिया को इस बार 10 विकेट लेने का मौका न मिले।
3. साउथ अफ्रीका
वनडे में तीसरी रैंकिंग वाले साउथ अफ्रीका को भले ही लीग मैच में इंडिया के हाथों कड़ी शिकस्त का सामना करना पड़ा हो, लेकिन यह हार टीम को और मजबूत होकर उभरने में मदद करेगी। पूल बी में दूसरे नंबर पर फिनिश करने वाले साउथ अफ्रीका ने श्रीलंका को हराकर सेमीफाइनल का टिकट पाया। अब सभी की नजरें कप्तान एबी डिविलियर्स पर होंगी, जिन्होंने अभी तक 417 रन स्कोर किए हैं। साउथ अफ्रीका के पास मिलर, अमला और डुप्लेसिस भी हैं, जिनकी बल्लेबाजी विरोधी टीम के लिए खतरा बन सकती है। हालांकि, तेज गेंदबाजी का दारोमदार डेल स्टेन पर है। स्टेन ने इस वर्ल्ड कप में भले ही कोई खास प्रदर्शन नहीं किया हो, लेकिन सेमीफाइनल उनके लिए बड़ा प्लैटफॉर्म साबित हो सकता है। वहीं, इमरान, ताहिर और मोर्कल भी बॉलिंग में कमाल कर सकते हैं।

4. न्यूजीलैंड
टीम इंडिया के अलावा कोई दूसरी टीम जो इस वर्ल्ड कप में नहीं हारी है, तो वह न्यूजीलैंड है। इस आयोजन के को-होस्ट न्यूजीलैंड ने अपने क्लासी क्रिकेट और लोकल कंडीशन का फायदा उठाया। क्वार्टर फाइनल जैसे बड़े स्टेज पर मार्टिन गुप्टिल ने डबल सेंचुरी जड़कर वेस्ट इंडीज को बाहर कर दिया। अब उन्हें दक्षिण अफ्रीका का मुकाबला करना है। यह मैच ऑकलैंड में होगा, जहां उसे लोकल कंडीशन और दर्शकों के समर्थन का लाभ मिलेगा। अब सब की नजर कप्तान मैक्कुलम के अलावा गुप्टिल पर भी होगी। न्यूजीलैंड के पास किसी भी लक्ष्य का बचाव करने के लिए बेहतरीन गेंदबाजी की ताकत है। टीम साउदी, ट्रेंट बोल्ट और एडम मिल्ने की तेज गेंदबाजी के अलावा वेटरन डेनियल विटोरी की स्पिन भी कमाल दिखा सकती है।

इंडिया का परफॉर्मेंस 2011 जैसा, इस बार भी आ सकता है वर्ल्ड कप

रिसर्च डेस्क. सात में से सात मैच जीतकर टीम इंडिया क्रिकेट वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में है। टीम का परफॉर्मेंस 2011 जैसा ही है। तब टीम सचिन, सहवाग और गंभीर जैसे बैट्समैन और युवराज सिंह के ऑलराउंड परफॉर्मेंस के बूते जीती थी। इस बार टीम की लगातार जीत में बैट्समैन के साथ ही बॉलर्स का योगदान ज्यादा नजर आ रहा है। टीम एक यूनिट की तरह खेल रही है।
पिछले वर्ल्ड कप में इंडिया के टॉप-6 बैट्समैन ने 9 मैचों में 2140 रन बनाए थे। इस बार 7 मैचों में टॉप बैट्समैन ने 1580 रन बनाए हैं। तब बॉलर्स ने 9 मैचों में 60 विकेट लिए थे। जबकि इस बार 7 मैचों में 63 विकेट लिए हैं। बाकी 7 विकेट रन आउट के जरिए मिले हैं। सचिन की कमी शिखर धवन पूरी करते दिख रहे हैं। वहीं, सुरेश रैना अपने बल्ले से और रवींद्र जडेजा गेंद से युवराज सिंह की कमी पूरी करते नजर आ रहे हैं। जानिए क्या कहते हैं आंकड़े :
कितनी समान है दोनों वर्ल्ड कप में धोनी बिग्रेड
टीम
2011
2015
ओपनर्स
सहवाग और सचिन
शिखर और रोहित
मिडिल ऑर्डर
गंभीर, कोहली और धोनी
कोहली, अजिंक्य और धोनी
ऑल राउंडर्स
युवराज और रैना
रैना और जडेजा
बॉलर्स
हरभजन, जहीर, नेहरा/अश्विन और मुनफ
शमी, उमेश, अश्विन और मोहित
कितना अलग है इस बार परफॉर्मेंस
2011 में टॉप बैट्समैन
टोटल रन
2015 में टॉप बैट्समैन
अब तक रन
सहवाग, सचिन, गंभीर, कोहली, धोनी, युवराज
2140 रन, 9 मैचों में
शिखर, रोहित, कोहली, अजिंक्य, धोनी, रैना
1580 रन, 7 मैचों में
2011 में टॉप बॉलर्स
टोटल विकेट
2015 में टॉप बॉलर्स
अब तक विकेट
जहीर, युवराज, मुनफ, हरभजन, अश्विन
60 विकेट, 9 मैचों में
शमी, उमेश, अश्विन, मोहित, जडेजा
63 विकेट, 7 मैचों में

WC: सेमीफाइनल, फाइनल में अंपायरिंग नहीं करेंगे बांग्ला फैंस के 'विलेन' अलीम डार

कराची. क्वार्टर फाइनल मुकाबले में भारतीय बल्लेबाज रोहित शर्मा को नॉट आउट देने के बाद बांग्लादेशी फैंस और आईसीसी प्रेसिडेंट मुस्तफा कमाल के निशाने पर आए पाकिस्तानी अंपायर अलीम डार का विश्व कप का सफर खत्म हो गया है। अब खेले जाने वाले दो सेमीफाइनल मैच के लिए तय अंपायरों की लिस्ट में उनका नाम नहीं है। फाइनल मैच के लिए अंपायरों का एलान सेमीफाइनल मैचों के बाद ही होगा, लेकिन आईसीसी फाइनल के लिए उसी पैनल से अंपायर चुनती है, जो सेमीफाइनल मैचों को सुपरवाइज करती है। ऐसे में अलीम डार के अब विश्व कप फाइनल मैच में भी अंपायरिंग करने की कोई संभावना नहीं है। बता दें कि अलीम डार दुनिया के बेहतरीन अंपायरों में शुमार किए जाते हैं और 2007 और 2011 के विश्व कप फाइनल में अंपायरिंग भी कर चुके हैं।
विवाद में अलीम डार
अलीम डार के नहीं चुने जाने के पीछे क्या इंडिया और बांग्लादेश के बीच हुए क्वार्टर फाइनल मुकाबले के दौरान उपजा विवाद है? जानकार इसे अलीम डार के फाइनल और सेमीफाइनल मैचों में अंपायरिंग न करने से जोड़कर देख रहे हैं। मैच में भारतीय ओपनर रोहित शर्मा को 90 रनों के निजी स्कोर पर जीवनदान मिला था। दरअसल, रोहित शर्मा सेन्चुरी के करीब थे और रोबेल हुसैन की बॉल पर लपक लिए गए। लेकिन अलीम डार ने इस गेंद को नो बॉल करार दे दिया। इसके बाद रोहित ने सेन्चुरी लगाकर टीम इंडिया को जीत में अहम भूमिका निभाई। अलीम डार ने बॉल को कमर के ऊपर बताकर 'नो बॉल' करार दिया था। हालांकि, रीप्ले में ऐसा लग नहीं रहा था। बाद में आईसीसी के प्रेसिडेंट मुस्तफा कमाल और बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना तक ने भारत की जीत के लिए अंपायरों की भूमिका को संदेह के घेरे में बताया था। दोनों ने पक्षपात का आरोप लगाया था।
अलीम डार का करियर
पाकिस्तान के अलीम डार उन चुनिंदा अंपायर्स में शामिल हैं, जो दो वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबलों में फील्ड अंपायर रहे हैं। डार 171 वनडे मुकाबलों में अंपायरिंग कर चुके हैं। वर्ल्ड कप-2007 में श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया के बीच किंग्सटन ओवल में खेले गए फाइनल मुकाबले में स्टीव बकनर के साथ फील्ड अंपायर की भूमिका में थे। साउथ अफ्रीका के रुड़ी कर्टजन टीवी अंपायर थे। वहीं, वर्ल्ड कप-2011 का खिताबी मुकाबला इंडिया और श्रीलंका के बीच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला गया था। इस मैच में भी अलीम डार फील्ड अंपायर थे। उनके साथ दूसरे अंपायर ऑस्ट्रेलिया के साइमन टॉफेल थे।

माइंडगेम शुरू : मैक्सवेल बोले- टीम इंडिया और विराट दोनों का तोड़ हमारे पास

सिडनी. भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच वर्ल्ड कप सेमीफाइनल तय होने के साथ ही 'माइंडगेम' भी शुरू हो गया है। धोनी और क्लार्क के बयान के बाद ग्लेन मैक्सवेल ने इसे आगे बढ़ाया। उन्होंने भारत से मुकाबले पर कहा, "उम्मीद है कि भारत हाल ही में हमसे मिली हार नहीं भूला होगा।" मैक्सवेल ने कहा, "पूरी गर्मियों में वे हमारे खिलाफ एक भी मैच नहीं जीत पाए। उम्मीद करता हूं कि उन्हें यह अच्छी तरह याद है।" बता दें कि वर्ल्ड कप-2015 के शुरू होने से ठीक पहले टेस्ट सीरीज में 0-2 की हार झेलनी पड़ी। साथ ही, त्रिकोणीय सीरीज में भी भारतीय टीम कोई भी मैच नहीं जीत सकी।
'कोहली को ज्यादा रन नहीं बनाने देंगे'
ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर ने कहा, "हमने ट्राई सीरीज में विराट को ज्यादा रन नहीं बनाने दिए थे। इस बार भी ऐसा ही होगा।" मैक्सवेल ने हालांकि लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के लिए भारतीय टीम की तारीफ भी की। मैक्सवेल ने कहा, "हमें इस हफ्ते उनके खिलाफ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा।" मैक्सवेल ने कहा, "हमारी टीम में अभी इस संबंध में कोई चर्चा नहीं हुई है, लेकिन टेस्ट और त्रिकोणीय सीरीज में अपनाई गई योजनाएं ही यहां मुख्य रूप से काम करेंगी।"

'आईपीएल से जुदा है माहौल और हम हैं बेस्ट'
मैक्सवेल ने कहा, "भारतीय टीम बहुत मजबूत है। वे अगर अच्छा नहीं खेल रहे होते तो सेमीफाइनल में नहीं होते। हमें उनके खिलाफ सबसे अच्छा खेल दिखाना होगा।" यह पूछे जाने पर कि क्या इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में भारतीय गेंदबाजों के खिलाफ खेलते रहने के अनुभव का फायदा उन्हें यहां भी मिलेगा, "मैक्सवेल ने कहा कि आईपीएल और वर्ल्ड कप के मैचों में दबाव और परिस्थिति में बहुत अंतर है।" मैक्सवेल ने कहा कि आईपीएल में रविचंद्रन अश्विन या रविंद्र जडेजा के खिलाफ खेलना अधिक मायने नहीं रखता क्योंकि राष्ट्रीय टीम में उनकी भूमिका अलग है।

Wednesday, 18 March 2015

श्रीलंका को एक्सपेरिमेंट पड़ा भारी, तीन बड़ी गलतियों ने वर्ल्ड कप से किया बाहर

खेल डेस्क. वर्ल्ड कप 2015 के पहले क्वार्टर फाइनल मुकाबले में साउथ अफ्रीका ने श्रीलंका को 9 विकेट से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया है। श्रीलंकाई टीम 37.2 ओवरों में 133 रन पर ऑल आउट हो गई। जवाब में साउथ अफ्रीका ने एक विकेट खोकर टारगेट को 18 ओवर में ही हासिल कर लिया। सिडनी में दोनों ही टीम टॉस जीतकर पहले बैटिंग करना चाहती थी। यहां किस्मत ने श्रीलंका का साथ दिया, बावजूद इसके उसने आज बहुत बुरा खेल दिखाया। पहले बैटिंग करने का फायदा उसने बिलकुल नहीं उठाया और ऐसा लगा, मानो वह अतिआत्मविश्वास का शिकार हो गई हो। ठीक इसके विपरीत, साउथ अफ्रीका ने हर क्षेत्र में काफी बढ़िया परफॉर्मेंस किया
. ओपनिंग जोड़ी से छेड़छाड़
श्रीलंकाई कप्तान एंजेलो मैथ्यूज को एक्सपेरिमेंट करना भारी पड़ गया। उन्होंने ओपनिंग जोड़ी से छेड़छाड़ कर कर आज सबसे बड़ी गलती की। उन्होंने उस ओपनिंग जोड़ी को बदल दिया, जिसने 6 में से 3 लीग मैचों में टीम को अच्छी शुरुआत दिलाई थी। यह ओपनिंग जोड़ी थी थिरिमाने और तिलकरत्ने दिलशान की। इन दोनों ने पहले लीग मुकाबले में न्यूजीलैंड के खिलाफ 67 रन, दूसरे मुकाबले में अफगानिस्तान के खिलाफ 0, तीसरे मुकाबले में बांग्लादेश के खिलाफ 122 रन, चौथे मुकाबले में इंग्लैंड के खिलाफ 100 रन, पांचवें मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 5 रन और छठे मुकाबले में स्कॉटलैंड के खिलाफ 21 रनों की साझेदारी की। लेकिन मैथ्यूज ने आज साउथ अफ्रीका के खिलाफ दिलशान के साथ ओपनिंग करने के लिए 6 नंबर के बैट्समैन कुशल परेरा को भेज दिया। इसके पीछे उनकी स्ट्रैटजी तेज रन बनाने की थी, लेकिन यह देखना भी जरूरी होता है कि जिस बैट्समैन को प्रमोट किया जा रहा है, क्या वह इतने बड़े मुकाबले का दबाव झेल सकता है? परेरा मैच की पहली बॉल से ही हिट करने के चक्कर में लग गए, पर एक बॉल भी वे कलेक्ट नहीं कर पा रहे थे। नतीजतन, वे 10 गेंदों में तीन रन बनाकर एबॉट का शिकार बन गए। क्वार्टर फाइनल में श्रीलंका की ओपनिंग जोड़ी तीन रन पर ही टूट गई।
2. गैर जिम्मेदराना बैटिंग
श्रीलंकाई टीम के बैट्समैन ने आज शुरुआत से ही ऐसा बिलकुल नहीं खेला, जैसा उन्होंने लीग मैच में खेला था। उनकी बॉडी लैंग्वेज ऐसी लग रही थी, मानो वे किसी हड़बड़ाहट में हों। चाहे वे परेरा (3) हों, दिलशान (0) हों, जयवर्धने (4) हों या फिर कप्तान मैथ्यूज (19) हों। सभी बैट्समैन गैर जिम्मेदराना शॉट खेलकर आउट हुए। पहला विकेट जल्दी गिरने के बाद भी दिलशान संभले नहीं और लंबे शॉट खेलने के चक्कर में लग गए और आउट होकर पवेलियन लौट गए। ऐसा ही कुछ जयवर्धने और मैथ्यूज के साथ भी हुआ। पुछल्ले बैट्समैन पर दबाव इतना था कि वे बस आए और चलते बने।
3. जरूरत से अधिक स्लो बैटिंग
श्रीलंका के दो विकेट सिर्फ 4 रन पर ही गिर गए। इसका नतीजा यह हुआ कि कुमार संगकारा और लाहिररू थिरिमाने ने संभल-संभलकर खेलना शुरू किया। थिरिमाने धीरे-धीरे लय में लौट रहे थे, लेकिन लगातार चार सेन्चुरी लगाने वाले कुमार संगकारा जरूरत से ज्यादा धीमी बैटिंग कर रहे थे। उन्होंने 96 गेंदें खेलीं और 46.87 की स्ट्राइक रेट से सिर्फ 45 रन बनाए। इसका नतीजा यह हुआ कि पूरी टीम पर विकेट बचाने का दबाव तो था ही, रन बनाने का भी दबाव बढ़ गया। बल्ले से रन नहीं निकल रहे थे, नतीजतन गलतियां शुरू हो गईं और पूरी श्रीलंकाई टीम 37.2 ओवरों में 3.56 की औसत से सिर्फ 133 रन बनाकर आउट हो गई।
विशेषज्ञों ने क्या कहा...
"आज साउथ अफ्रीका के सबसे कमजोर बॉलर जेपी डुमिनी ने एक ऐसी टीम के खिलाफ शानदार बॉलिंग की, जो स्पिनर्स को बहुत अच्छे ढंग से खेलने के लिए जानी जाती है। वर्ल्ड कप से आज एक उपमहाद्वीप बाहर हो गया, कल एक और बाहर हो जाएगा और उसके अगले दिन भी एक बाहर हो जाएगा। इस ट्वीट को रिफरेंश के तौर पर रख सकते हैं।" @आकाश चोपड़ा
"विश्वास करना मुश्किल है कि एक मजबूत बैटिंग लाइन-अप वाली टीम ऐसे लड़खड़ा जाएगी। श्रीलंका के बैट्समैन साउथ अफ्रीकी बॉलर्स के प्रेशर को झेल नहीं सके। उनकी कमी सामने आ गई।"

खुला नौकरी का पिटारा, सैकड़ों पदों पर भर्ती

जिला स्तरीय चयन समिति, मालदा, पश्चिम बंगाल ने विभिन्न पदों पर रिक्तियों को भरने के लिए विज्ञप्ति जारी की है। कुल विज्ञापित पदों में ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यकारी सहायक के 26 पद, सचिव के 7 पद, सहायक के 117 पद, निर्माण सहायक के 46 पद, और पंचायत ‌सम‌िति स्तर पर समिति शिक्षा अधिकारी के 3 पद, अकाउंट क्लर्क के 14 पद, क्लर्क कम टाइपिस्ट के 10 पद, डाटा एंट्री ऑपरेटर के 4 पद और ब्लॉक इन्फॉर्मेटिक्स अधिकारी के 5 पद शामिल हैं।

466 पदों में सहायक के 238 पद और कनिष्ठ सहायक के 228 पद हैं। आयु सीमा के तहत इन पदों पर आवेदन करने वाले उम्मीदवार की नयूनतम आयु सीमा 18 वर्ष तथा अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष है। वेतनमान के तौर पर चयनित उम्मीदवारों को पदों के अनुसार 7,188 - 37,600 रुपये, 5,400 - 20,200 रुपये, 9,000 - 40,500 रुपये दिया जाएगा। पदों के अनुसार ग्रेड पे अलग-अलग दिया जाएगा। सहायक पद के उम्मीदवार को 10,250 - 25,180 रुपये तथा कनष्ठि सहायक के उम्मीदवार को 9,050 - 23,080 रुपये प्रति माह दिया जाएगा।

सोनिया का नया अवतार, राहुल के लिए खतरे की घंटी

पखवाड़े भर पहले चर्चा थी कि कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी सक्रिय राजनी‌ति से संन्यास ले सकती हैं। हालांकि पिछले हफ्ते जब उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के घर तक मार्च किया तो लगा कि जैसे वह राजनीति की नई पारी शुरु कर रही हैं।

कोयला घोटाले में आरोपी बनाए गए मनमोहन सिंह के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए सोनिया गांधी ने कांग्रेस मुख्यालय से उनके घर तक मार्च किया। शीर्ष नेताओं के साथ कदमताल करती सोनिया की तस्वीरों ने निरुत्साहित कार्यकर्ताओं को जोश से भर दिया।

जानकारों ने कहा कि सोनिया गांधी मनमोहन सिंह को जारी किए गए समन का इस्तेमाल उसी तरह कर सकतीं है, जैसे इं‌दिरा गांधी ने 1977 में अपनी गिरफ्तारी के आदेश का किया था। कांग्रेस में जान डालने की सोनिया की ये नई रणन‌ीति थी।

मंगलवार को सोनिया गांधी ने एक बार फिर मार्च निकाला। इस बार वह विपक्ष की 14 पार्टियों के सांसदों के साथ मार्च कर रही थीं। सोनिया नए मार्च ने 1998 की उस कांग्रेस की याद दिला दी, जिसने प्याज को मोहरा बना कर सत्तासीन राजग सरकार की चूलें हिला दी थीं। महंगाई के मुद्दे पर उस समय भी विपक्ष सोनिया के इर्दगिर्द खड़ा हो गया था। सोनिया ने चंद दिनों पहले ‌ही कांग्रेस की कमान संभाली थी।

आठ एकड़ में बने बंगले में बिना एसी के रहना चाहते हैं केजरीवाल

नई दिल्‍ली. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अगले सप्ताह तक सिविल लाइन्स के फ्लैग रोड स्थित बंगला नंबर-6 में रहने जा सकते हैं। पीडब्ल्यूडी ने बंगले को पूरी तरह तैयार कर दिया है‌। लेकिन सीएम के एक निर्देश ने पीडब्ल्यूडी की परेशानी बढ़ा दी है। सीएम ने कहा है कि बंगले से सारे एसी हटा दिए जाएं। 
करीब आठ एकड़ में फैले बंगले में पांच बेडरूम, एक ड्रांइग रूम और ऑफिस रूम के अलावा दो बड़े लॉन, एक गार्डन, तीन सर्वेंट क्वार्टर और पार्किंग है। पांचों बेडरूम, ड्राइंग रूम और ऑफिस रूम में एयर कंडीशनर लगे हुए हैं। बंगला तैयार करने में लगे एक अधिकारी ने कहा, "उन्होंने हमसे घर से सभी एसी हटाने को कहा है जो हमारे लिए कठिन काम है, क्योंकि इसका मतलब एक तरह से घर का डिजाइन बदलना होगा। हमें दीवारों में बन गई खाली जगहों को भरने के लिए खिड़कियां बनानी होंगी या कोई वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी। हमने उनसे इस मांग पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है, लेकिन अगर वह अपनी बात पर कायम रहे तो हमें जरूरी बदलाव करना होगा।"
अधिकारी के अनुसार, इसके अलावा मुख्यमंत्री ने उनसे कहा था कि घर की मरम्मत में ज्यादा समय और पैसा नहीं लगाया जाए और इसकी नए सिरे से पुताई की भी जरूरत नहीं है। अधिकारी के मुताबिक, "हालांकि, हमने घर की फिर से पुताई और साफ-सफाई कराई है, क्योंकि एक साल से अधिक समय से इसका उपयोग नहीं हो रहा था।"
पूरे बंगले में इंटरनेट
पूरे बंगले में वाई-फाई और ब्रॉडबैंड के जरिए हाईस्‍पीड इंटरनेट की सुविधा है। गार्डन में कौन-से फूल के पौधे लगाए जाने हैं, इस बारे में मुख्यमंत्री कार्यालय से पूछा गया था। लेकिन अब तक जवाब नहीं आया। अब मुख्यमंत्री और उनके परिवार के आने पर ही गार्डन का काम पूरा होगा।
बेडरूम में सुविधाओं के बारे में पूछे जाने पर पीडब्ल्यूडी के कर्मचारी ने कहा कि बेडरूम में सिर्फ बेड और एसी की व्यवस्था है। अन्य व्यवस्थाएं मुख्यमंत्री और उनके परिवार के अनुरूप उनके आने पर होंगी। अधिकारी ने बताया कि कि पूरे घर में फर्नीचर लकड़ी का है और सिर्फ एक लॉकर लोहे का है।
फ्लैग रोड का 6 नंबर बंगला दिल्ली के मुख्य सचिव के लिए बनाया गया था। इसमें पूर्व मुख्य सचिव जयकृष्णन रहे थे, उसके बाद कोई मुख्य सचिव नहीं रहा। विस अध्यक्ष चौधरी प्रेम सिंह लंबे समय तक रहे और फिर यह बंगला कांग्रेस के 2008-13 के कार्यकाल में विस उपाध्यक्ष अमरीश सिंह गौतम को आवंटित हुआ था।
पहली बार सीएम बनने के बाद केजरीवाल तिलक लेन रोड पर रहे थे। उस बार उन्‍होंने कहा था कि उन्‍हें बड़ा बंगला नहीं चाहिए। हालांकि, बाद में एक टीवी चैनल ने एक चिट्ठी दिखाते हुए दावा किया था कि सीएम ऑफिस से मुख्‍यमंत्री के लिए बड़ा घर मांगा गया था। लेकिन इस बार खुद केजरीवाल ने ही शपथ लेने के बाद दिए गए भाषण में कहा था कि उनका बंगला कम से कम इतना बड़ा तो हो, जहां वह जनता से मिल सकें और दफ्तर का काम कर सकें। दिल्ली के मुख्यमंत्री को टाइप-6 मकान मिलता है, लेकिन केजरीवाल ने केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के अधीन आने वाले मकानों में से घर दिए जाने की मांग की थी। वहीं, उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को मथुरा रोड स्थित पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का पुराना बंगला एबी-17 आवंटित है।

महमदुल्लाह को रोका तो कल बांग्लादेश को वर्ल्ड कप से बाहर कर देगा इंडिया

स्पोर्ट्स डेस्क. टीम इंडिया 19 मार्च को बांग्लादेश के खिलाफ मेलबर्न में क्वार्टर फाइनल खेलेगी। अगर दोनों टीमों के टॉप प्लेयर्स पर नजर डालें तो आप पाएंगे कि ओपनिंग के मामले में इंडिया के शिखर धवन बांग्लादेश के तामिम इकबाल से आगे हैं। इंडिया को चुनौती बांग्लादेश के मिडल ऑर्डर से मिल सकती है। विराट कोहली की तुलना में बांग्लादेशी महमदुल्लाह ज्यादा रन बना रहे हैं। इस वर्ल्ड कप में वे पांचवें टॉप स्कोरर हैं। 
बॉलिंग में मोहम्मद शमी भी बांग्लादेश के रूबेल हुसैन के मुकाबले अच्छे फॉर्म में चल रहे हैं। ऑलराउंड परफॉर्मेंस के मामले में भी बांग्लादेश के शाकिब अल हसन हमारे रवींद्र जडेजा से आगे नजर आ रहे हैं। अब तक के आंकड़े बताते हैं कि क्वार्टर फाइनल में इंडिया की बैटिंग से ज्यादा बॉलिंग हावी रह सकती है।
दोनों टीमों के टॉप प्लेयर्स का एनालिसिस
1. बॉलर्स
इंडिया : मोहम्मद शमी, 5 मैच, 15 विकेट, वर्ल्ड कप में टॉप विकेट टेकर्स की लिस्ट में दसरे नंबर पर
बांग्लादेश : रुबेल हुसैन, 5 मैच, 7 विकेट, विकेट टेकर्स की लिस्ट में 34वें नंबर पर
2. ओपनर्स
इंडिया : शिखर धवन, 6 मैच, 337 रन, वर्ल्ड कप के टॉप स्कोरर्स में 7वें नंबर पर
बांग्लादेश : तामिम इकबाल, 5 मैच, 129 रन, रन स्कोरर्स में टॉप-50 में भी नहीं
3. मिडिल ऑर्डर बैट्समैन
इंडिया : विराट कोहली, 6 मैच, 301 रन, वर्ल्ड कप के टॉप रन स्कोरर्स में 12वें नंबर पर
बांग्लादेश : महमदुल्लाह 5 मैच, 344 रन, रन स्कोरर्स में 5वें नंबर पर
4. ऑल राउंडर्स
इंडिया : रवींद्र जडेजा, 6 मैच, 7 विकेट, सिर्फ 18 रन बनाए
बांग्लादेश : शाकिब अल हसन, 5 मैच, 7 विकेट, 186 रन
बांग्लादेश के साथ पिछले 5 वनडे में क्या रहा नतीजा
मैच
कप
कौन जीता
जून 2014
इंडिया टूर ऑफ बांग्लादेश
इंडिया
फरवरी 2014
एशिया कप
इंडिया
मार्च 2012
एशिया कप
बांग्लादेश
फरवरी 2011
वर्ल्ड कप
इंडिया
जून 2010
एशिया कप
इंडिया
इंडिया वर्सेस बांग्लादेश : अब तक के फैक्ट्स
- इंडिया और बांग्लादेश के बीच वनडे कुल 28 वनडे हुए। भारत 24 मैच जीता। बांग्लादेश 3 मैच जीता। 1 मैच बेनतीजा रहा।
- वर्ल्ड कप में दोनों टीमों के बीच 2 ही मैच हुए। भारत और बांग्लादेश को 1-1 जीत मिली।
- यह पहला मौका है जब दोनों टीमें वर्ल्ड कप के नॉकआउट स्टेज में आमने-सामने हैं। इससे पहले दोनों मैच ग्रुप स्टेज में हुए थे।
- इंडिया की तरफ से वर्ल्ड कप में बांग्लादेश के खिलाफ दो सेंचुरी लगी है। एक बार वीरेंद्र सहवाग ने 175 रन बनाए, दूसरी बार विराट कोहली ने 100 रन बनाए।
- धोनी बांग्लादेश के खिलाफ वर्ल्ड कप में अब तक खाता नहीं खोल पाए हैं। 2007 के वर्ल्ड कप में वे 3 बॉल खेलकर शून्य पर आउट हो गए थे।
- 2007 के मैच में बांग्लादेश जीता था। मशरफ मुर्तजा ने 4 विकेट लिए थे। वे अब बांग्लादेश के कैप्टन हैं।
- बांग्लादेश के किसी बैट्समैन ने अब तक इंडिया के खिलाफ वर्ल्ड कप में सेंचुरी नहीं लगाई है। हाईस्कोरर तामिम इकबाल रहे जिन्होंने 2011 में 70 रन बनाए थे।
- बांग्लादेश की टीम में 6 प्लेयर्स ऐसे हैं जो पिछले वर्ल्ड कप में इंडिया के खिलाफ खेल चुके हैं। ये हैं तामिम, इमरूल, शाकिब अल हसन, मुशफिक उर रहमान और रूबेल हुसैन।
- इंडिया की तरफ से सिर्फ धोनी और कोहली ही बांग्लादेश के खिलाफ पिछला वर्ल्ड कप मैच खेले हैं।

अनुष्का और विराट के बीच आई एक आइटम गर्ल!

आइटम गर्ल राखी सावंत ने एक बार फिर सार्वजनिक तौर पर अपना जुबानी सनसनीखेज आइटम पेश कर दिया है और ‌शिकार बने हैं विराट कोहली।

राखी ने खुलेआम विराट से अपने प्यार का इजहार ‌करते हुए कहा है कि वह अनुष्का को छोड़ उनको अपना लें। वैसे तो राखी सावतं हमेशा ही कोई न कोई ऐसा काम करती रहती हैं जो चर्चा में आ जाता है।

लेकिन काफी दिनों से वह खामोश थीं। पर अब मुंबई में एक पत्रकार वार्ता के दौरान उनकी जुबान ने ऐसे शब्द निकाल दिए जिससे हर कोई हैरान हो गया।

राखी का यह बयान विराट और अनुष्का को परेशानी में डाल सकता है। राखी ने कहा कि वह विराट से बहुत प्यार करती हैं और इस बात का खुलेआम इजहार कर रही हैं।

राखी यहीं नहीं रुकी उन्होंने कहा कि अनुष्का तो अपने प्यार का इजहार तक नहीं कर रही हैं अगर वह विराट से प्यार करती तो यूं खामोश नहीं रहती।

एक मैं हूं जो सच्चे मन से विराट के प्रति अपना प्यार प्रदर्शित कर रही हूं। यानी कि राखी ने तो अनुष्का को खुलेआम चुनौती तक दे डाली। अब जब विराट और अनुष्का तक यह बात पंहुचेगी तो वह तो सोच में पड़ जाएंगे।

क्योंकि आइटम गर्ल राखी के बारे में सब जानते हैं कि वह अपनी कही बात का न तो अफसोस करती हैं और न ही शर्म। ऐसे में इस बात को भी वह मसाले कि तरह आगे तक ही ले जाना पसंद करेंगी।