Saturday, 2 May 2015

'धोनी बाधा' पार कर चुकी KKR के सामने अब नई चुनौती

मौजूदा चैंपियन कोलकाता नाइटराइडर्स ने आईपीएल इतिहास की सबसे सफल टीम चेन्नई सुपरकिंग्स के खिलाफ बड़ी जीत हासिल कर लय हासिल कर ली है। मगर बावजूद इसके आगे की राह उसके लिए इतनी आसान भी नहीं होने जा रही है। नाइटराइडर्स के सामने शनिवार को सितारों से भरी रॉयल चैलेंजर्स बंगलोर की चुनौती होगी।

अंक तालिका में तीसरे नंबर पर मौजूद कोलकाता और चौथे नंबर पर काबिज बंगलोर के धुरंधर जब यहां ईडन गार्डेंस पर आमने-सामने होंगे तो रोमांच भी अपने चरम पर होगा। कोलकाता के लिए चेन्नई के खिलाफ जीत मनोबल बढ़ाने वाली रही। रोबिन उथप्पा का फॉर्म में लौटना उसके लिए अच्छा संकेत है। आंद्रे रसेल भी निरंतर अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।

वहीं आरसीबी के लिए कप्तान विराट कोहली और क्रिस गेल लय में लौट आए हैं। वहीं दक्षिण अफ्रीका के तूफानी बल्लेबाज एबी डीविलियर्स भी अपनी भूमिका बढ़िया तरीके से निभा रहे हैं। गेंदबाजी हालांकि टीम के लिए कमजोर पक्ष साबित हुआ है। टीम को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है।

CSK से पिछली हार का बदला लेकर KKR ने मारी बाजी

आईपीएल-8 के 30वें मुकाबले में चेन्नई के 166 रनों के जवाब में कोलकाता ने रॉबिना उथप्पा और आंद्रे रसैल की शतकीय साझेदारी के दम पर चेन्नई से पिछली हार का बदला ले ही लिया। 1 गेंद और 7 विकेट रहते बाजी मारी। 28 अप्रैल को चेन्नई से उसी के होमग्राउंड में 2 रनों से शिकस्त खाने के बाद अपने होमग्राउंड ईडन गार्डन में हार का बदला लिया।

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चेन्‍नई के सम्मानजनक स्कोर का पीछा करने उतरी कोलकाता नाइट राइडर्स को अच्छी शुरुआत मिली। चेन्नई के खिलाफ पिछले मैच में जल्दी अपना विकेट गंवाने से सबक लेने की कोशिश की, लेकिन एक बार फिर आशीष नेहरा का शिकार बने। कोलकाता को पहला विकेट कप्तान गौतम गंभीर (19) के रुप में लगा। पहला झटका लगने के बाद रॉबिन उथप्पा के साथ मनीष पांडे ने टीम के स्कोर को आगे बढ़ाने का प्रयास किया।

आईपीएल के इस सीजन में पहला मैच खेल रहे चेन्नई सुपर किंग्स के फिरकी मास्टर पवन नेगी ने बल्लेबाजी के साथ-साथ गेंदबाजी में भी जौहर दिखाते हुए विकेट भी लिए। मनीष पांडे (3) को आउट कर अपनी टीम को उन्होंने दूसरी सफलता दिलाई। 10वें ओवर में सूर्यकुमार यादव (2) के सस्ते में आउट होने के बाद चेन्नई की झोली में तीसरी सफलता आई। इसके बाद बल्लेबाजी करने आए आंद्रे रसैल (नाबाद 59) ने रॉबिन उथप्पा (नाबाद 80) के साथ कुछ तेज हिट लगाई। 15वें ओवर की पहली गेंद पर छक्का लगाकर उथप्पा ने अपने पचास रन पूरे किए।

दोनों बल्लेबाजों ने अपना आतिश खेल जारी रखा और चेन्नई के गेंदबाजों पर जमकर रन बरसाए। दोनों ने चेन्‍नई के हर गेंदबाज पर चौके और छक्के लगाए। शानदार बल्लेबाजी करते हुए दोनों ने चौथे विकेट के लिए 112 रनों की महत्वपूर्ण साझेदारी निभाई।

Film Review: 'गब्बर' के ताप से बचो

फिल्म: गब्बर इज बैक
रेटिंगः 2.5 स्टार
डायरेक्टर: कृष
कलाकारः अक्षय कुमार, श्रुति हासन, सुमन तलवार और सुनील ग्रोवर
'गब्बर' जैसी फिल्म देखकर आमिर खान का वह गाना दिमाग में घूमने लगता है कि 'दिल है कि मानता नहीं'. ऐसा ही हमारा बॉलीवुड भी है जो मानने को तैयार ही नहीं है. कुछ नया करने को इसका दिल करता ही नहीं. बस इसी उम्मीद के साथ हर शुक्रवार को एक फिल्म परोस देता है कि उसने बहुत मेहनत की है और फिल्म 100 करोड़ रु. का आंकड़ा पार कर लेगी. 'गब्बर इज बैक' भी इन्हीं इरादों के साथ बनाई गई फिल्म है. अक्षय अपनी पिछली कुछ फिल्मों के साथ संदेश देने की कोशिश करते आ रहे हैं, फिर चाहे यह 'बेबी' हो 'हॉलीडे' या फिर अब 'गब्बर इज बैक'. फिल्म का उद्देश्य अच्छा है, लेकिन ऐसा लगता है कि डायरेक्टर ने तो दिमाग ना लगाने की कसम खा ली है, और उन्हें यह बात समझ ही नहीं आ रही है कि जनता होशियार हो गई है. उसे साउथ की रीमेक बनाकर बहलाया नहीं जा सकता. फिल्म फ्लो में चलती है, लेकिन हर बात ठूंसी हुई-सी लगती है. हर चीज देखी हुई लगती है. वह भी कई-कई बार.
कहानी में कितना दम
अक्षय कुमार हमेशा सही राह पर चलने वाला प्रोफेसर है और उसका लक्ष्य यही है कि वह नई पीढ़ी में कुछ करने के लिए जोश जगाए और प्रेरित करे. उसकी लड़ाई भ्रष्टाचार से है. लेकिन उसका एक अतीत है, जिसमें वह कुछ लोगों की बेईमानी से अपने परिवार को खो बैठता है. यही उसकी लड़ाई की असल वजह भी है. वह भ्रष्ट अधिकारियों के सफाये की दिशा में कदम बढ़ाता है और गब्बर बन जाता है. किसी भी भ्रष्ट सरकारी अधिकारी को उसके अंजाम तक पहुंचाने में झिझकता नहीं है. फिल्म का लुक बहुत कुछ साउथ की फिल्मों जैसा है. शायद यह इसके रीमेक होने की वजह से हो सकता है, लेकिन यह बात खलती है. क्या बॉलीवुड क्रिएटिविटी के मामले में इतना कंगाल हो चुका है?
स्टार अपील
फिल्म हमेशा की तरह जैसा बॉलीवुड के सुपरस्टार्स के मामले में होता है, सिर्फ हीरो के लिए बनाई गई है. ऐसे में मजाल है किसी और कैरेक्टर की वह अपना जलवा या काम दिखा सके. अक्षय कुमार अच्छे लगते हैं. ऐसे रोल सिर्फ वही कर सकते हैं. कैरेक्टर में जमते हैं. लेकिन अब प्लीज कुछ नया करो. सुनील ग्रोवर थोड़े अजीब लगते हैं क्योंकि हमने उन्हें गुत्थी के रोल में ज्यादा कनेक्ट किया है. लेकिन पुलिसवाले के रोल में उन्होंने अच्छा काम किया है. श्रुति हासन को काफी मेहनत करनी है. ऐक्टिंग और डायलॉग डिलिवरी पर ध्यान देना होगा. मेन विलेन सुमन तलवार एकदम साउथ मार्का विलेन हैं.
कमाई की बात
संजय लीला भंसाली ने पिछली बार अक्षय कुमार के साथ 'राउडी राठौर' जैसी हिट दी थी. यह फिल्म भी साउथ की रीमेक थी, लेकिन जायका और वन लाइनर मजेदार थे. यह एक्स फैक्टर 'गब्बर' में मिसिंग है. फिल्म का संगीत अच्छा है. फिल्म का बजट लगभग 70 करोड़ रु. बताया जा रहा है. जिस तरह देश के किसानों के खेत मौसम की मार झेलकर बेहाल हैं, उसी तरह भारतीय बॉक्स ऑफिस बॉलीवुड की बेसिरपैर की फिल्मों की वजह से हांफ रहा है. 'गब्बर' से इसे बहुत उम्मीदें हैं लेकिन यह फिल्म हौसले बहुत बढ़ाती लगती नहीं है.

Friday, 1 May 2015

नेपाल सीमा पर वाहनों के फंसने से सड़ रहा खाना

भूकंप प्रभावित नेपाल में राहत सामग्री लेकर जा रहे वाहनों के सीमा पर फंस जाने की वजह से फल, ब्रेड जैसी अन्य खाद्य सामग्रियां खराब होनी शुरू हो गई हैं।

उत्तर प्रदेश से नेपाल जाने के लिए सबसे सटीक मार्ग गोरखपुर के नजदीक सोनौली सीमा है।

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार और अन्य स्थानों से राहत सामग्री लेकर जा रहे हजारों माल ढुलाई वाहन वाहनों, हल्के वाहनों, सरकारी बसों के लंबी कतारों में फंसने की वजह से यह मार्ग बाधित है।

इस वजह से सीमा शुल्क मंजूरी मिलने में देरी होने के कारण राहत सामग्रियों को भेजने में देरी हो रही है। इस कारण ब्रेड, दूध और अन्य सामान खराब हो रहे हैं।

जोधपुर की एक स्वयंसेवी संस्था 'अपना घर आश्रम' के एक कार्यकर्ता पश्चाताप के साथ कहते हैं कि इससे अच्छा होता कि वह बढ़नी-कृष्णनगर सीमा से आते, जिससे समय कम लगता और सुरक्षा समंधी औपचारिकताओं से बचा जा सकता था।

नेपाल के सशस्त्र पुलिस बल (सीमा शुल्क प्रभार) के प्रमुख महेंद्र यादव ने बताया, "भीड़ नहीं होने की वजह से भानसर में हमारी सीमा शुल्क मंजूरी की प्रक्रिया जल्द ही पूरी हो गई।"

सीमा शुल्क जांच चौकियों के अधिकारियों ने कहा कि सोनौली सीमा पूरी तरह से बाधित होने की वजह से अन्य चौकियों की ओर से आने वाले वाहनों की संख्या बढ़ रही है।

भारत-नेपाल सीमा को जोड़ने वाली एटवा की खराब सड़कों को छोड़कर, राहत सामग्री लेकर काठमांडू जा रहे यात्री और काठमांडू व अन्य क्षेत्रों से लोगों को लेकर वापस सुरक्षित स्थानों के लिए लौट रहे लोगों की ओर से किसी तरह की कोई शिकायत नहीं है।

जांच चौकी के पास खाने-पीने के सामानों की दुकान चला रहे द्रोण प्रसाद आचार्य के मुताबिक, "हमे खुशी है कि भारत हमारे बचाव में आगे आया है। यदि भारत से मदद नहीं मिलती तो हमें सोचते हुए डर लगता है कि क्या हुआ होता।"

नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप में 6,000 से अधिक लोगों की मौत हो गई है।
काठमांडू. नेपाल में आए भूकंप के 22 घंटे बाद मलबे से जीवित बचाए निकाले गए चार महीने के सोनित अवाल की मां का कहना है कि जितनी देर वह मलबे में दबा रहा उसके रोने और चीखों की आवाज उन्हें सुनाई देती रही। सोनित जिस जगह मलबे में दबा था वहां उसके ऊपर एक मजबूत कपबोर्ड उसके ऊपर था और राहतकर्मी मान रहे हैं कि इस कपबोर्ड के चलते ही सोनित का बाल भी बांका नहीं हुआ।
क्या कहा सोनित की मां ने
सोनित की मां रशिमला अवाल अब राहत कर्मियों का तहेदिल से शुक्रिया अदा कर रही हैं। हालांकि सोनित को बचाने में उसके पिता का भी योगदान कम नहीं रहा। उसके पिता ने अकेले के दम पर खाली हाथों से उस चट्टान को हटाने की कोशिश की जहां सोनित दबा था और जहां से उसके रोने की आवाज लगातार सुनाई दे रही थी। जिस समय भूकंप आया उस समय सोनित सो रहा था और उसकी मां कुछ काम कर रही थीं। उनका चार मंजिला मकान भूकंप में भरभराकर गिर गया और सोनित उसमें दब गया। सोनित की मां और पिता पूरे समय अपने पड़ोसियों के साथ मिलकर उसे खोजते रहे। काफी देर बाद उसके रोने की आवाज उन्हें सुनने मिली। सोनित की मां ने कहा कि उन्होंने अपने बेटे को बचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश की लेकिन राहत कर्मियों के पहुंचने के बाद उन्हें यकीन हो गया कि सोनित को कुछ नहीं होगा क्योंकि हम खाली हाथ थे जबकि राहतकर्मियों के पास उपकरण थे।
बेघर हुआ परिवार

सोनित को बचा लिया गया और परिवार की खुशी का कोई ठिकाना नहीं है लेकिन अवाल परिवार अब बेघर हो चुका है। उनका मकान किसी मलबे के ढेर से ज्यादा कुछ नहीं है। सोनित की मां और उसके पिता किसी तरह खुले में रह रहे हैं। लेकिन सोनित की मां कहती हैं कि घर आज नहीं तो कल फिर बना लिया जाएगा लेकिन सोनित को भगवान ने बचा लिया। सोनित के पिता श्याम ड्राइवर हैं और घटना के दिन वह घर पर नहीं थे।

यूजर्स के फोन बिल को कम करने में मदद कर सकते हैं ये 8 ऐप्स

गैजेट डेस्क। स्मार्टफोन्स की मदद से हर समय लोगों से कनेक्ट रहना आसान हो गया है। मार्केट में कई ऐसे ऐप्स मौजूद हैं जो यूजर्स को फ्री टेक्स्ट मैसेज, ऑडियो और वीडियो कॉलिंग की सुविधा देते हैं। हम आपको बता रहे हैं ऐसे 8 ऐप्स के बारे में जिनका इस्तेमाल कर आप फ्री में कॉल, चैट और SMS कर अपना फोन बिल कम कर सकते हैं। बता दें कि ये ऐप्स बिना इंटरनेट के इस्तेमाल नहीं किए जा सकते।
Skype

लॉन्च के बाद से माइक्रोसॉफ्ट का स्काइप ऐप सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला ऐप रहा। इस ऐप की मदद से आप टेक्स्ट मैसेज, वॉइस और वीडियो चैट कर सकते हैं। यह यूजर को ग्रुप कॉल्स की सुविधा भी देता है। इस ऐप को iOS, एंड्रॉइड, विंडोज फोन, ब्लैकबेरी 10, विंडोज और मैक पर इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके इस्तेमाल से आप अपने फोन बिल में कटौती कर सकते हैं।
एंड्रॉइड यूजर्स ने इस ऐप को 5 में से 4.1 रेटिंग दी है। इसे 50 करोड़ से ज्यादा एंड्रॉइड यूजर्स ने डाउनलोड किया है। इस ऐप को डाउनलोड और इस्तेमाल करने के लिए जरूरी ऑपरेटिंग सिस्टम मोबाइल हैंडसेट के मुताबिक बदलते रहता है।

दवाई पर सवाल खड़ा करने वाले पहले आयुर्वेद को समझें: रामदेव

बाबा रामदेव ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुत्रजीवक दवा पर अपनी सफाई दी। इस दवा पर कल राज्यसभा में जेडीयू सांसद केसी त्यागी ने सवाल खड़े किए थे जिसके बाद से ही सोशल मीडिया पर भी इसकी चर्चा हो रही है।

बाबा रामदेव ने अपनी सफाई में कहा कि ये दवा बेटा पैदा करने की दवा नहीं है। उन्होंने कहा कि सवाल खड़े करने वाले लोग पहले आयुर्वेद को समझें।

बाबा रामदेव ने कहा कि उनके पास दवा का लाइसेंस है।

उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर लिखा,"कुछ लोग अज्ञान और स्वार्थ के कारण हमें और आयुर्वेद को बदनाम करने के लिये सुनियोजित प्रयास कर रहे हैं, सत्यता यह है कि आयुर्वेद में निःसंतान और बाँझपन के रोगियों की संतान प्राप्ति के लिये हजारों वर्षों पहले से पुत्रजीवक औषधि प्रयोग की जा रही है।"

राज्यसभा में हुआ था हंगामा

इससे पहले गुरुवार को राज्यसभा में विपक्ष ने योगगुरू बाबा रामदेव की दिव्य फार्मेसी द्वारा बेची जा रही कथित तौर पर बेटा पैदा करने वाली एक दवा पर तुरंत प्रतिबंध लगाने की मांग की गई।

विपक्ष का आरोप है कि एक तरफ सरकार बेटी बचाओ अभियान चला रही है, दूसरी तरफ बाबा की फार्मेसी द्वारा ऐसी दवाएं बेची जा रही हैं जिनसे बेटा पैदा करने का दावा किया जा रहा है। विपक्ष के हंगामे पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करेगी।

जदयू के केसी त्यागी ने गुरुवार को शून्यकाल के दौरान यह मामला उठाया। प्रतिपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद, सपा की जया बच्चन, तृणमूल के सुखेंदु राय, माकपा के सीताराम येचुरी ने भी त्यागी का समर्थन किया और तुरंत जांच की मांग की।

विपक्ष ने कहा कि जांच पूरी होने तक दवा की बिक्री को प्रतिबंधित किया जाए। त्यागी ने सदन में दवा का एक पैकेट भी दिखाया और कहा कि उन्होंने इसे दिव्य फार्मेसी से खरीदा है। 14 अप्रैल को यह पैकेट उन्होंने खरीदा है जिसकी रसीद भी उनके पास है।

केंद्र पर निशाना साधते हुए त्यागी ने कहा कि सरकार एक ओर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की बात करती है वहीं हरियाणा सरकार द्वारा नियुक्त ब्रांड अंबेस्डर ऐसे उत्पादों की बिक्री कर रहे हैं। उन्होंने इसे अवैध और असंवैधानिक बताया। हालांकि रामदेव का नाम नहीं लिया। इसी दौरान सपा की जया बच्चन ने के.सी त्यागी से वह पैकेट लेकर वहां मौजूद स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा को दे दिया।

आजाद ने कहा कि इसकी जांच की जाए कि ऐसी दवा को बिक्री की अनुमति कैसे मिल गई। जबकि येचुरी ने कहा कि ऐसी दवा की बिक्री लिंगानुपात कानूनों के खिलाफ तो है ही वैज्ञानिक सोच के भी विरुद्ध है। जबकि जावेद अख्तर ने सरकार से दो टूक पूछा कि वे बताएं कि लिंग अनुपात बिगाड़ने वाली दवा गैरकानूनी है या नहीं। जबकि जया बच्चन ने कहा कि तुरंत फार्मेसी का लाइसेंस रद्द होना चाहिए।

उपसभापति पी. जे. कुरियन ने कहा कि लिंग चयन या प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण कानून तथा संविधान के खिलाफ है लेकिन इस मामले में आसन कुछ नहीं कर सकता। बाद में स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने कहा कि यह आयुष विभाग में आता है लेकिन सरकार इसकी जांच करेगी और उचित कार्रवाई करेगी।