Sunday, 4 January 2015

दिल्ली के दंगल में 'सेलिब्रिटी' सांसदों का सहारा लेगी भाजपा

नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव की भले ही कोई तारीख घोषित नहीं हुई हो, लेकिन भाजपा ने दिल्ली किला फतह करने के लिए कमर कस ली है। मतदाताओं को लुभाने के लिए पार्टी अब अपने 'सेलिब्रिटी' सांसदों का सहारा लेगी। नई रणनीति के तहत सांसद हेमा मालिनी, शत्रुघ्न सिन्हा, विनोद खन्ना, स्मृति ईरानी, मनोज तिवारी दिल्ली में चुनावी रैलियों को संबोधित करेंगे।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि राजधानी में मतदाताओं को रिझाने के लिए अभी तक 18 स्टार प्रचारकों की सूची तैयार कर ली गई है। इसमें पीएम नरेन्द्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह शामिल हैं।
उन्होंने बताया, 'भाजपा आम आदमी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल की रैलियों को मात देना चाहती है और उम्मीद है कि चुनाव प्रचार के दौरान सेलिब्रिटी सांसद ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं का ध्यानाकर्षित करने में सफल रहेंगे।'
नहीं छोड़ेंगे कोई कसर
उन्होंने कहा कि पार्टी ने अब तक ऐसे स्टार सांसदों को राष्ट्रीय राजधानी में चुनाव प्रचार में नहीं लगाया है और वह चाहती है कि जब मतदान करीब हो, तब इन्हें चुनाव प्रचार में लगाया जाए ताकि अधिक से अधिक फायदा उठाया जा सके।
दिल्ली में विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा अपनी तैयारियों में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है और वह 10 जनवरी को रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली आयोजित कर रही है, जिसे नरेन्द्र मोदी संबोधित करेंगे। इस रैली में हरियाणा, झारखंड और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री भी हिस्सा लेंगे।

Saturday, 3 January 2015

पंचायत ने महिला को सुनाया फरमान- प्रेमी को मानो बेटा, भीड़ के सामने किया मजबूर

प्रतीकात्मक फोटोइंदौर. मध्यप्रदेश के एक गांव की पंचायत ने
एक महिला को भरी भीड़ के सामने अपने प्रेमी को स्तनपान कराने के लिए मजबूर किया।  महिला कथित तौर पर अपने प्रेमी के साथ गांव छोड़कर भाग गई थी, जिसके बाद पंचायत ने दोनों को यह सजा सुनाई। पंचायत ने यह भी कहा कि महिला आगे से अपने प्रेमी को बेटे की तरह माने। पुलिस ने इस मामले में कुल 10 लोगों पर केस दर्ज कर उन्‍हें गिरफ्तार किया है। 
 
घटना अलीराजपुर जिले के बैदा गांव में 31 दिसंबर को हुई। अलीराजपुर के डीएसपी अखिलेश झा ने घटना की की पुष्टि की। खबर के मुताबिक, 25 साल की महिला और उसका 21 साल का प्रेमी स्थानीय भील समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। प्रारंभिक जांच के मुताबिक, महिला विवाहित है और दो महीने पहले पति और तीन बच्चों को छोड़कर प्रेमी के साथ गांव से भाग गई थी। बताया जाता है कि इस दौरान ये लोग गुजरात में रहे। समुदाय को जानकारी मिलने के बाद इन लोगों को पकड़कर गांव लाया गया। पहले इनकी जमकर पिटाई की गई, मुंह काला किया गया और महिला के बाल भी काटे गए। इसके बाद पंचायत ने आदेश दिया कि महिला अपने प्रेमी को स्तनपान कराए। इसके बाद महिला को अर्द्धनग्‍न कर दिया गया। उसे अपने प्रेमी को स्तनपान कराना पड़ा।
 
महिला के पति ने पंचायत से गुहार लगाई कि उसकी पत्नी को छोड़ दिया जाए। जब यह सब कुछ हुआ तो मौके पर सिर्फ पुरुष ही नहीं, पीड़ित की दो महिला रिश्तेदार भी मौजूद थीं। महिला ने इसकी शिकायत उदयगढ़ पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई। 
 

जानिए, पांच सवाल जो कोस्ट गार्ड के ऑपरेशन को करते हैं कठघरे में खड़ा

1. आतंकी नहीं स्मगलर थे नाव में?
केंद्र सरकार के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक, इस बात की पूरी संभावना है कि ऑपरेशन में मारे गए दो लोग आतंकवादी न होकर शराब और डीजल की तस्करी करने वाले छोटे-मोटे स्मगलर रहे हों, जो पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से शराब का कार्गो मछली पकड़ने वाली दूसरी नावों तक पहुंचाते थे।
 
2. जरूरत से ज्यादा ताकत लगाई 
यह भी बताया जा रहा है कि कोस्ट गार्ड ने मछली पकड़ने वाली नाव को घेरने में जरूरत से कहीं ज्यादा ताकत लगा दी। इंटेलिजेंस इनपुट में कहा गया था कि मछली पकड़ने वाली नाव भारत की तरफ आ रही है। ऐसे में, कोस्ट गार्ड का शिप ही नाव का पीछा करने के लिए काफी था। 
 
3. आतंकवाद से जुड़ी कोई सूचना नहीं थी 
रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, '31 दिसंबर को मिले इंटेलिजेंस इनपुट्स के मुताबिक, कराची के नजदीक केटी बंदर से एक मछली पकड़ने वाली नाव के जरिए कोई संदिग्ध डील किया जाना था।' सरकार से जुड़े शीर्ष सूत्रों के मुताबिक, इंटेलिजेंस इनपुट में आतंकवाद से जुड़ी कोई जानकारी नहीं थी। उसमें देश पर किसी बड़े खतरे की भी बात नहीं कही गई थी। इसके बजाय नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (एनटीआरओ) ने मोबाइल फोन पर कराची के नजदीक केटी बंदर से समुद्र में स्मगलिंग करने वाले गिरोह की बातचीत टेप की थी।
 
4. नेवी ने नहीं उठाया कोई कदम 
सूत्रों के मुताबिक, एनटीआरओ के मिड लेवल के अफसर ने कोस्ट गार्ड और नेवी को सीधे जानकारी दे दी, जबकि नियम यह है कि किसी भी संभावित हमले की जानकारी रॉ, इंटेलिजेंस एजेंसियों और बीएसएफ के साथ शेयर की जानी चाहिए। गुजरात पुलिस और महाराष्ट्र पुलिस को भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। नेवी ने इस इंटेलिजेंस इनपुट्स पर कोई कदम नहीं उठाया, क्योंकि मिली जानकारी से साफ था कि पूरे मामले से देश को किसी बड़े खतरे की आशंका नहीं थी।     

5. रक्षा मंत्रालय के बयान पर उठे सवाल 
कॉलमनिस्ट एम. भद्रकुमार ने रक्षा मंत्रालय के बयान पर सवाल उठाए हैं। कुमार के मुताबिक, 'रक्षा मंत्रालय का बयान बहुत ही सावधानी से लिखा गया है।' रक्षा मंत्रालय के बयान के मुताबिक इंटेलिजेंस इनपुट्स के मुताबिक, कराची से निकली मछली पकड़ने वाली नाव पर सवार लोग अरब सागर में किसी संदिग्ध डील को अंजाम देना चाहते थे। भद्रकुमार कहते हैं कि बयान में न तो पाकिस्तान का नाम लिया गया है और न ही यह बताया गया है कि नाव में विस्फोटक लदे हुए थे। उनके मुताबिक, 'सबसे अहम बात यह है कि बयान से साफ नहीं है कि घटना हुई कहां? भारतीय सीमा में, अंतरराष्ट्रीय सीमा में या पाकिस्तान की सीमा में? बयान में सिर्फ यह कहा गया है कि कोस्ट गार्ड के वहां पहुंचने पर नाव समुद्री सीमा में भारत से दूर भागने लगी। यह भी साफ नहीं है कि नाव को किसने डुबोया, कोस्ट गार्ड ने या नाव पर सवार लोगों ने?' अगर पूरे मामले में पाकिस्तान का हाथ है तो सरकार को यह खुलकर बताना चाहिए। यह भारत के फायदे की बात है, क्योंकि इस घटना पर दुनिया की नजर है। 
 
आसानी से पता लगाए जा सकते हैं तथ्य 
भद्रकुमार का कहना है कि इस पूरे मामले से जुड़े तथ्य आसानी से पता किए जा सकते हैं। उनका कहना है कि बराक ओबामा की भारत यात्रा महज तीन हफ्ते बाद है। ओबामा की सुरक्षा के मद्देनजर अब तक पूरे भारत में अमेरिकी सेना ने सैटेलाइट तैनात कर दिए गए होंगे। इन सैटेलाइट की मदद से जमीन पर और समुद्र में हुई हलचल का पता आसानी से लगाया जा सकता है।