Thursday, 29 September 2016

दो गरुड़ कमांडो की कहानी, एक शहीद हुआ तो दूसरा 6 गोलियां खाकर लड़ता रहा

अंबाला। भारतीय सेना ने बुधवार रात को एलओसी पार करके कई आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। इसे बीते दिनों जम्मू-कश्मीर के उड़ी आर्मी बेस और इससे पहले पंजाब के पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले के बदले के रूप में देखा जा रहा है। देश के वीरों को सलाम करते हुए हरियाणा के दो गरुड़ कमांडोज की कहानी से अवगत करा रहा है। शहीद गुरसेवक को मिला शौर्य चक्र, शैलभ गौड़ 6 गोलियां खाकर भी 1 घंटे तक लड़ते रहे...
झाड़ियों में छिपे आतंकियों पर नजर पड़ी तो सबसे पहले झपटा था 
शैलभ गौड़
- पठानकोट हमले में अंबाला कैंट के गरुड़ कमांडो शैलभ गौड़ जख्मी हो गए थे। पेट में छह गोलियां लगने के बावजूद कमांडो पूरा एक घंटा आतंकियों से लड़ते रहे।
- बाद में कमांडो शैलभ को अन्य सैनिकों की मदद से वहां से निकालकर पठानकोट के मिलिट्री अस्पताल में भर्ती करवाया गया और वहां से करीब 15 दिन तक आईसीयू में रहने के बाद शैलभ घर लौटे थे।
- शैलभ ने बताया था कि वह शहीद गुरसेवक के साथ ही मोर्चे पर तैनात थे। पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन में चलाए जा रहे सर्च ऑपरेशन के दौरान इन दोनों की नजर सबसे पहले झाड़ियों में छिपे आतंकियों पर पड़ी। सबसे पहले शैलभ गौड़ ने ही आतंकियों पर फायर किया।
- आतंकियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी, जिस दौरान गुरसेवक सिंह ने उसे (शैलभ को) पीछे धकेलकर खुद आतंकियों से लोहा लेने की ठानी। साथी शहीद हो गए, पर पेट में 6 गोलियां खाकर भी शैलभ 1 घंटे तक आतंकियों से लड़ते रहे।

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