Wednesday, 15 July 2015

शराब पीकर गाड़ी चलाने पर फॉकनर पर लगा 4 मैच का बैन

ऑस्ट्रेलिया के स्टार ऑलराउंडर जेम्स फॉकनर को शराब पीकर गाड़ी चलाने की बहुत महंगी कीमत चुकानी पड़ी. फॉकनर अगस्त सितंबर में इंग्लैंड और आयरलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज नहीं खेल पाएंगे. क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने उन पर चार मैचों को बैन लगा दिया है.
वर्ल्ड कप फाइनल में मैन ऑफ द मैच रहे फॉकनर को इंग्लैंड में शराब पीकर गाड़ी चलाने का दोषी पाया गया. फॉकनर इसी महीने की शुरुआत में इंग्लैंड में नशे की हालत में गाड़ी चलाते हुए पकड़े गए थे, जिसके लिए सीए ने उन्हें अपनी आचार संहिता के तहत तीसरी श्रेणी के अपराध का दोषी पाया.
सीए के मुताबिक, 'फॉकनर पर आचार संहिता के उल्लंघन का दोष है, जो किसी भी क्रिकेटर के लिए शर्मिंदगी की बात है और क्रिकेट की गरिमा को गिराने वाला है.' सीए ने कहा, 'आचार संहिता प्रक्रिया के मुताबिक, फॉकनर ने मामले की सुनवाई आचार संहिता आयोग के समक्ष किए जाने की जगह अपना दोष स्वीकार कर लिया है.'
फॉकनर पर चार मैचों का बैन लगाया गया है. इसका मतलब है कि वह आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ अगस्त-सितंबर में होने वाले मैचों में नहीं खेल सकेंगे. हालांकि निलंबन खत्म होने के बाद जरूरत पड़ने पर उन्हें किसी चोटिल खिलाड़ी की जगह शामिल किया जा सकता है.

9 साल की श्रेया ने 'गरम मसाला' कुईनोआ बर्गर से जीता ओबामा कपल का दिल

न्यूयॉर्क। अमेरिका में रहने वाली नौ साल की भारतीय बच्ची ने जब ओबामा कपल को रायते के साथ 'गरम मसाला' कुईनोआ बर्गर परोसा, तो उन्हें यह डिश इतनी पंसद आई कि वे उंगलियां चाटते रह गए। इलिनोइस के स्कैमबर्ग की रहने वाली श्रेया पटेल उन 55 नन्हें कुक में शामिल थी, जिन्हें व्हाइट हाउस की ओर से चौथे सालाना 'किड्स स्टेट डिनर' के लिए इनवाइट किया गया था। इस कॉन्टेस्ट में ऐसी रेसिपी बनानी थी, जो न केवल स्वादिष्ट हो, बल्कि हेल्दी भी हो।
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा और फर्स्ट लेडी मिशेल ओबामा को श्रेया की रेसिपी बहुत पसंद आई। उन्होंने उसे इलिनोइस का विनर अनाउंस किया। इतना ही नहीं, श्रेया को फर्स्ट लेडी के साथ डिनर करने का भी मौका मिला है। जीत के बाद श्रेया ने एक वेबसाइट से कहा, "मैं बचपन से ग्रैनी और मॉम को किचन में लजीज डिश बनाते देखती आई हूं। वे उसमें इंडियन तड़का डालती हैं।" आगे कहा, "मैं जब तीन साल की थी, तब से ही खाना बनाने में उनकी हेल्प कर रही हूं। मुझे चॉपिंग करने के अलावा किचन साफ रखना बहुत पसंद है।"
श्रेया बड़ी होकर फार्मासिस्ट बनना चाहती है। वह कहती है, "मैं और ग्रैनी दोनों ने ही मिलकर यह रेसिपी तैयार की। क्योंकि हम दोनों को सैंडविच बहुत पसंद है। मैं दोस्तों के साथ पिकनिक के मौको पर या स्कूल लंच में ये बर्गर ट्राय करती हूं।" श्रेया के बर्गर में गरम मसाला, जीरा, अदरक और ग्रेटेड सेरानो चिली का स्वाद था।
बता दें कि 'किड्स स्टेट डिनर' कॉन्टेस्ट आठ से 12 साल की उम्र के बच्चों के लिए आयोजित किया गया था। कॉन्टेस्ट में लगभग 1,000 रेसिपी आई। इनमें से श्रेया की रेसिपी ने ओबामा कपल का दिल जीता।

नक्‍सलियों ने मारे 4 जवान, सड़क पर घंटों पड़ी रहीं लाशें, पास मंडराते रहे कुत्‍ते

बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सलियों ने उन चार पुलिसवालों की हत्या कर दी, जिन्हें सोमवार रात अगवा किया गया था। सूत्रों के मुताबिक, नक्सलियों ने जन अदालत लगाकर इन जवानों को मारा और शव सड़क पर बिछा दिए। इनकी लाशें कई घंटे तक सड़क पर यूं ही पड़ी रहीं। लाशों के पास कुत्‍ते मंडराते रहे।
पुलिसवालों के शव बुधवार सुबह बीजापुर के कुटरू में मिले। सुबह छह बजे के करीब ही इसकी जानकारी आम हो गई थी, लेकिन शवों तक पहुंचने में पुलिस को करीब तीन घंटे लग गए। इस दौरान कुत्‍ते शवों के आसपास मंडराते दिखे।
मारे गए जवानों के नाम जयदेव यादव, मंगल सोढ़ी, राजू तेला और रामा मज्जी हैं। लाशें मिलने के बाद पुलिस की स्पेशल एंटी नक्सल ऑपरेशन टीम हत्यारों की तलाश में जुट गई है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इसे नक्सलियों की घिनौनी करतूत करार दिया है।
पर्चे फेंके
लाशों के पास फेंके गए पर्चे में लिखा गया है कि कॉन्स्टेबल बनने के बाद चारों जवान गांववालों पर अत्याचार करते थे, बच्चियों से छेड़छाड़ करते थे और नक्सली विरोधी अभियानों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते थे। पर्चे में नक्सलियों ने चेतावनी दी है कि पुलिस बनकर ग्रामीणों पर अत्याचार करने वालों को माफ नहीं किया जाएगा। नक्सलियों ने गांववालों से सलवा जुडूम और ऑपरेशन ग्रीन हंट का विरोध करने की अपील की है।
क्या था मामला? 
नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ के सतनापल्ली इलाके से बीते सोमवार चार पुलिसवालों को अगवा कर लिया था। ये जवान बीजापुर से कुटरू कस्बे तक जा रहे थे। दो जवान बस में सवार थे, जबकि दो मोटरसाइकिल पर थे। नक्सलियों ने उन्हें सकनापल्ली गांव के नजदीक घने जंगल वाले इलाके में रोक लिया। स्थानीय लोगों ने पुलिसवालों को बचाने की कोशिश भी की थी। लेकिन नक्सलियों ने उन्हें डरा-धमका कर भगा दिया।
एसपीओ से कॉन्स्टेबल बने थे 
मारे गए पुलिसवाले एसपीओ से सहायक कॉन्स्टेबल बने थे। एसपीओ का मतलब है स्पेशल पुलिस अफसर। इन्हें कोया कमांडो भी कहा जाता है। नक्सलियों से निपटने के लिए सरकार आदिवासियों में से युवकों को चुनकर एसपीओ बनाती है। सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2011 के अपने एक आदेश में छत्तीसगढ़ सरकार से एसपीओ की व्यवस्था खत्म करने को कहा था। बहरहाल, सरकार नया कानून ले आई और सारे एसपीओ को सहायक कॉन्स्टेबल बना दिया गया।
नक्सलियों के टारेगेट पर होते हैं ऐसे कॉन्स्टेबल
एसपीओ से जो सहायक कॉन्स्टेबल बनाए गए हैं, वे हमेशा नक्सलियों के टारगेट पर रहते हैं। समय-समय पर यह मुद्दा उठता रहा है कि इन्हें पुलिस डिपार्टमेंट काफी कम सुरक्षा मुहैया कराता है।