इंग्लैंड की महिला कप्तान चालरेट
एडवर्डस और श्रीलंका के कप्तान एंजेलो मैथ्यूज भी दौड़ में थे। भुवनेश्वर
चौथे और भारत के तीसरे क्रिकेटर हैं जिन्होंने यह पुरस्कार जीता है। उनसे
पहले सचिन तेंदुलकर (2010) और महेंद्र सिंह धोनी (2013) यह पुरस्कार पा
चुके हैं। श्रीलंका के कुमार संगकारा ने 2011 और 2012 में यह पुरस्कार जीता
था।
बोर्ड सचिव संजय पटेल ने कहा, वे पिछले कुछ
समय में बल्ले और गेंद से लगातार अच्छा प्रदर्शन करते आए हैं। बीसीसीआई की
ओर से मैं उन्हें बधाई देता हूं और भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी।
भुवनेश्वर ने आईसीसी की विज्ञप्ति में कहा,
सबसे पहले मैं इस पुरस्कार में मेरे लिए वोट करने वाले हर व्यक्ति को
धन्यवाद देना चाहता हूं। मेरे लिए यह पुरस्कार बहुत मायने रखता है क्योंकि
यह सिर्फ मेरे प्रदर्शन के आधार पर नहीं बल्कि मेरे प्रशंसकों के प्यार की
वजह से मिला है।
उन्होंने कहा, मैं आज अपने माता-पिता और
कोचों से मिली सीख की वजह से यहां हूं। मैं अपने साथी खिलाड़ियों का भी
शुक्रगुजार हूं क्योंकि उनके सहयोग के बिना यह संभव नहीं होता। बीसीसीआई ने
भुवनेश्वर को इस उपलब्धि पर बधाई दी है।
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