लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी ने एक बार फिर राजाराम व वीर सिंह को राज्यसभा
भेजने का फैसला किया है। दलित वर्ग के ही दो लोगों को राज्यसभा सदस्य के
लिए प्रत्याशी बनाए जाने के फैसले पर बसपा प्रमुख मायावती ने सफाई भी दी
है। उन्होंने कहा कि विधायकों की संख्या कम होने से सभी प्रमुख जातियों को
भागीदारी देने में वह असमर्थ थीं, इसलिए आधार वोट बैंक दलित वर्ग के ऐसे
व्यक्तियों को प्रत्याशी बनाया गया है जो बामसेफ के समय से पार्टी से जुड़े
हुए हैं।
माल एवेन्यू स्थित बसपा के प्रदेश मुख्यालय में बुधवार को आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में पार्टी प्रमुख मायावती ने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की। बताया कि राजाराज और वीर सिंह एडवोकेट को फिर से राज्यसभा सदस्य बनाने का निर्णय किया गया है। दोनों ही पार्टी के मूवमेंट के लिए जी-जान से जुटे रहते हैं। उन्होंने कहा कि वह अगर किसी एक वर्ग को भागीदारी देती तो दूसरा वर्ग खुद की उपेक्षा महसूस करता जो कि पार्टी हित में ठीक नहीं था।
राजाराम बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तो वीर सिंह हैं महासचिवः
बसपा से फिर राज्यसभा सदस्य बनने जा रहे राजाराम और वीर सिंह बामसेफ और बीएस-फोर से पार्टी के मूवमेंट से जुड़े हुए हैं। बसपा प्रमुख मायावती ने दोनों को पार्टी की अहम जिम्मेदारी सौंप रखी है। राजाराम बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष है। मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले राजाराम को मायावती ने मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा व राजस्थान राज्यों का पार्टी प्रभारी भी बना रखा है।
वर्ष 2008 में पहली बार राज्यसभा सदस्य बनने से पहले वह उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य भी थे। मुरादाबाद के मूल निवासी वीर सिंह पेशे से वकील हैं। पहली बार 2002 में पार्टी से राज्यसभा सदस्य बने वीर सिंह लगातार तीसरी बार राज्यसभा के सदस्य बनेंगे। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव पद का भी दायित्व संभाल रहे वीर सिंह महाराष्ट्र सहित तीन राज्यों के पार्टी प्रभारी भी हैं।
टिकट के लिए 100 करोड़ दे रहे थे अखिलेश दासः
बसपा अध्यक्ष मायावती ने बुधवार को प्रेस वार्ता में सनसनीखेज खुलासा किया कि राज्यसभा का टिकट दोबारा हासिल करने के लिए डा. अखिलेश दास सौ करोड़ रुपये देने की पेशकश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अखिलेश 200 करोड़ रुपये देते तो भी उन्हें दोबारा नहीं भेजतीं। उन्हें ही राज्यसभा व विधान परिषद भेजा जाएगा जो पार्टी के मूवमेंट को समझने के साथ ही जमीन से जुड़े हैं और जनाधार बढ़ाने वाले हैं।
बसपा छोडऩे के पीछे पार्टी नेतृत्व पर पैसे के लेन-देन के अखिलेश दास के आरोपों को खारिज करते हुए मायावती ने कहा कि उनके दुख को समझा जा सकता है। अखिलेश जब कांग्रेस छोड़कर आए थे तब उन्होंने राहुल गांधी पर भी गंभीर आरोप लगाए थे। बकौल मायावती, 'मैंने वैश्यों को पार्टी से जोडऩे के उनके वादे पर भरोसा करते हुए उन्हें राज्यसभा भेजा था, पर वह राज्यसभा की बैठकों में भी जाने के बजाय बिजनेस में पैसे को सेट करने में ही लगे रहे।
बसपा प्रमुख ने बताया कि अखिलेश दास पहले लखनऊ में और फिर 21 अक्टूबर को दिल्ली में उनसे मिले थे। अखिलेश ने उनसे कहा कि 'बहन जी आपके सिवा मेरा कोई नहीं है, मुझे राज्यसभा में जरूर रिपीट कर दें। पार्टी को आगे बढ़ाने को धन की जरूरत होती है। जितना भी मेरे से चाहें मैं 50-100 करोड़ रुपये देने को तैयार हूं।इस पर मैने उनसे पूछा कि पार्टी से वैश्यों को कितना जोड़ा? वादे पर खरे नहीं उतरे हो इसलिए 200 करोड़ देने पर भी रिपीट नहीं करूंगी।
माल एवेन्यू स्थित बसपा के प्रदेश मुख्यालय में बुधवार को आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में पार्टी प्रमुख मायावती ने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की। बताया कि राजाराज और वीर सिंह एडवोकेट को फिर से राज्यसभा सदस्य बनाने का निर्णय किया गया है। दोनों ही पार्टी के मूवमेंट के लिए जी-जान से जुटे रहते हैं। उन्होंने कहा कि वह अगर किसी एक वर्ग को भागीदारी देती तो दूसरा वर्ग खुद की उपेक्षा महसूस करता जो कि पार्टी हित में ठीक नहीं था।
राजाराम बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तो वीर सिंह हैं महासचिवः
बसपा से फिर राज्यसभा सदस्य बनने जा रहे राजाराम और वीर सिंह बामसेफ और बीएस-फोर से पार्टी के मूवमेंट से जुड़े हुए हैं। बसपा प्रमुख मायावती ने दोनों को पार्टी की अहम जिम्मेदारी सौंप रखी है। राजाराम बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष है। मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले राजाराम को मायावती ने मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा व राजस्थान राज्यों का पार्टी प्रभारी भी बना रखा है।
वर्ष 2008 में पहली बार राज्यसभा सदस्य बनने से पहले वह उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य भी थे। मुरादाबाद के मूल निवासी वीर सिंह पेशे से वकील हैं। पहली बार 2002 में पार्टी से राज्यसभा सदस्य बने वीर सिंह लगातार तीसरी बार राज्यसभा के सदस्य बनेंगे। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव पद का भी दायित्व संभाल रहे वीर सिंह महाराष्ट्र सहित तीन राज्यों के पार्टी प्रभारी भी हैं।
टिकट के लिए 100 करोड़ दे रहे थे अखिलेश दासः
बसपा अध्यक्ष मायावती ने बुधवार को प्रेस वार्ता में सनसनीखेज खुलासा किया कि राज्यसभा का टिकट दोबारा हासिल करने के लिए डा. अखिलेश दास सौ करोड़ रुपये देने की पेशकश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अखिलेश 200 करोड़ रुपये देते तो भी उन्हें दोबारा नहीं भेजतीं। उन्हें ही राज्यसभा व विधान परिषद भेजा जाएगा जो पार्टी के मूवमेंट को समझने के साथ ही जमीन से जुड़े हैं और जनाधार बढ़ाने वाले हैं।
बसपा छोडऩे के पीछे पार्टी नेतृत्व पर पैसे के लेन-देन के अखिलेश दास के आरोपों को खारिज करते हुए मायावती ने कहा कि उनके दुख को समझा जा सकता है। अखिलेश जब कांग्रेस छोड़कर आए थे तब उन्होंने राहुल गांधी पर भी गंभीर आरोप लगाए थे। बकौल मायावती, 'मैंने वैश्यों को पार्टी से जोडऩे के उनके वादे पर भरोसा करते हुए उन्हें राज्यसभा भेजा था, पर वह राज्यसभा की बैठकों में भी जाने के बजाय बिजनेस में पैसे को सेट करने में ही लगे रहे।
बसपा प्रमुख ने बताया कि अखिलेश दास पहले लखनऊ में और फिर 21 अक्टूबर को दिल्ली में उनसे मिले थे। अखिलेश ने उनसे कहा कि 'बहन जी आपके सिवा मेरा कोई नहीं है, मुझे राज्यसभा में जरूर रिपीट कर दें। पार्टी को आगे बढ़ाने को धन की जरूरत होती है। जितना भी मेरे से चाहें मैं 50-100 करोड़ रुपये देने को तैयार हूं।इस पर मैने उनसे पूछा कि पार्टी से वैश्यों को कितना जोड़ा? वादे पर खरे नहीं उतरे हो इसलिए 200 करोड़ देने पर भी रिपीट नहीं करूंगी।
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